Alzheimer Symptoms: क्या आप भी छोटी-छोटी बातों को भूल जाते हैं. तो अपनी मेंटल हेल्थ के प्रति थोड़ा सर्तक हो जाने की जरूरत है. क्योंकि शायद ही आपने सोचा हो कि भूलना भी किसी प्रकार की कोई बीमारी हो सकती है. लेकिन ये बात सही है कि भूलना भी एक तरह की बीमारी है. अगर आप भी घर से निकलने से पहले कुछ जरूरी सामानों को साथ ले जाना भूल जाते हैं तो आपको सावधान हो जाने की जरूरत है.
दरअसल भूलने की बीमारी को अल्जाइमर कहा जाता है. पहले के समय में किसी बात का भूलना बढ़ती उम्र की निशानी मानी जाती थी. लेकिन अब ये समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति में आसानी से देखने को मिल जाती है. इसलिए अगर आप भी इस तरह की समस्या से जूझ रहे हैं तो आपको थोड़ा सतर्क हो जाने की जरूरत है.
बता दें कि अल्जाइमर एक तरह का मेंटल डिसऑर्डर है. आज के समय में अल्जाइमर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. लेकिन समय रहते इस बीमारी की पहचान कर लेना से इस समस्या से बचा जा सकता है.
क्या है अल्जाइमर?
अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है जो धीरे-धीरे दिमाग की कोशिकाओं को खराब करती है. इस समस्या में भूलने की आदत धीरे-धीरे बढ़ती जारी है. कुछ छोटी-छोटी और जरूरी बातों का भूल जाना. जैसे- चाबियां कहां रखी, या फिर ये काम करना तो मैं भूल गई. अभी यहीं तो रखा था ये सामान कहां गया. लेकिन उस सामान को रखा कहीं और था और भूल जाना. इस तरह की चीजों को भूलने से हमारी रोज की जिंदगी काफी हद तक प्रभावित होती है. इसे ही अल्जाइमर कहा जा सकता है. ये बीमारी इस हद तक दिमाग को नुकसान पहुंचाती है कि इंसान किसी करीबी दोस्तों के नाम, चेहरे तक भूल जाता. ये बीमारी समय के साथ बढ़ती जाती है.
अल्जाइमर के लक्षण

- अल्जाइमर के लक्षणों की पहचान करना आसान है. पहले हम छोटी-छोटी बातें भूलते हैं. समय के साथ जब ये बीमारी बड़ा रूप ले लेती है तो व्यक्ति घटनाओं को, नामों को या फिर जानकारियों को भूलना शुरू कर देता है.
- लेकिन इन लक्षणों के अलावा कुछ मामलों में व्यक्ति एक ही सवाल को या फिर कहानी को या फिर बात को रिपीट करता है ये भी एक लक्षण हो सकता है. जब वह बातों को दोहराएं. बार-बार उन बातों को बताएं जिन्हें वह पहले बता चुका है.
- कुछ मामलों में व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों को पहचानना तक भूल जाता है.
- अल्जाइमर के मरीज शीशे में खुद को देखकर खुद को पहचाना तक भूल जाते है. अपनी परछाई को वह किसी दूसरे इंसान की परछाई मानने लगते हैं. बातचीत करने के दौरान जब शब्द नहीं मिल पाते, वह कुछ शब्दों को बार-बार दोहराते रहते हैं.
- मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन और सामाजिक अलगाव भी अल्जाइमर के लक्षण हो सकते हैं. व्यक्ति अचानक शांत या आक्रामक हो सकता है, और बिना किसी कारण के गुस्सा कर सकता है.
- डिसीजन लेने में परेशानी होना.
अल्जाइमर बीमारी अनुवांशिक कारकों पर भी निर्भर करती है. यानि जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को अल्जाइमर हो चुका है, आने वाली पीढ़ी को ये बीमारी होने की आंशका हो सकती है. कुछ जेनेटिक म्यूटेशंस इस बीमारी को कम उम्र में ही शुरू कर सकती हैं. वहीं हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और नशों का सेवन करने वाले लोगों में इसका खतरा अधिक रहता है. आपको बता दें कि मेंटल डिसऑर्डर से जुड़ी बीमारियों से बचाव के लिए हेल्दी रहना और तनाव, स्ट्रेस साथ ही गुस्से जैसी स्थिति से बचना ही पहला उपाय है. क्योंकि कई डिसऑर्डर के मामलों में इसका कोई इलाज नहीं है. अगर व्यक्ति मानसिक रूप से सही रहेगा तभी वह मेंटल डिसऑर्डर से बच सकता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


