Atrial Fibrillation Symptoms And Causes: दिल की धड़कन तेज होना, सीने में फड़फड़ाहट होना या कोई कारण नहीं तब भी सांस फूलना. सुनने में काफी नॉर्मल लगता है. जिसके चलते लोग इसे परेशानी नहीं मानते और इग्नोर कर देते हैं. लेकिन आपको बता दें कि ये दिल की एक ऐसी कंडिशन हो सकती है जिसे कहा जाता है एट्रियल फिब्रिलेशन.
दिल की लय यानी बीट्स से जुड़ी ये सबसे आम समस्याओं में से एक है. चिंता की बात तो ये है कि कई लोगों में इसके लक्षण तक नहीं दिखाई देते. जिससे बीमारी जब गंभीर हो जाती है. समस्या बढ़ने लगती है तब इसका खुलासा होता है लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि लाखों लोग इस समस्या के साथ जी रहे हैं. कितने लाख लोग हैं? आइए जानते हैं.
लाखों लोगों को हो रही दिल की ये बीमारी
भारत में करीब 80 लाख लोग जिन्हें एट्रियल फिब्रिलेशन की समस्या है. ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी में ये जानकारी दी गई है. आप पूछेंगे कि आखिर इतने लोगों को कैसे ये समस्या हो रही? तो इसका कारण है बढ़ती उम्र और उसके साथ-साथ होने वाली समस्याएं जैसेः
- मोटापा
- डायबिटीज
- अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर
यही कारण है इस समस्या के बढ़ते हुए मामलों की. एट्रियल फिब्रिलेशन उस समय होता है, जब दिल के ऊपरी चैंबर यानी एट्रिया में असामान्य इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी होने लगती है. इसके कारण दिल सामान्य और व्यवस्थित तरीके से धड़कने के बजाय अनियमित रूप से धड़कने लगता है.
क्या होते हैं इसके लक्षण?
इसके लक्षणों पर गौर करना चाहिए क्योंकि इसी की जानकारी पाकर आप इससे बच सकते हैं. अगर बात करें लक्षणों की तो इसकी पहचान हर व्यक्ति में आसान नहीं होती. यानी कुछ लोगों में तो लक्षण दिख जाते हैं लेकिन कई लोगों को ये बीमारी बिना किसी लक्षण के हो सकती है. अगर बिना लक्षण के ये समस्या हो तो इसे साइलेंट एट्रियल फिब्रिलेशन कहते हैं. समस्या गंभीर होने पर इसके लक्षण दिखाई देते हैं. इसमें
- दिल की धड़कन तेज हो सकती है
- सांस फूल सकती है
- ज्यादा थकान महसूस हो सकती है
- एक्सरसाइज करने की क्षमता कम हो सकती है
- पल्स अनकंट्रोल्ड हो सकती है
ऐसे अगर कुछ लक्षण दिखें तो आपको सावधान हो जाना चाहिए.
क्या हो सकता है खतरा
इस समस्या के कॉम्प्लिकेशन भी हो सकते हैं. जैसे सबसे बड़ा खतरा स्ट्रोक का है. जब दिल का ऊपरी चैंबर नॉर्मल तरीके से सिकुड़ नहीं पाता है तो इससे खून दिल में ही जमा होने लगता है. जब खून जमता है तो क्लॉट बन जाता है. यही क्लॉट अगर दिल से निकल जाए और दिमाग तक पहुंचे तो ब्लड के फ्लो को रोक सकता है, जो इस्केमिक स्ट्रोक का कारण बन सकता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. एक्सपर्ट्स द्वारा दी जाने वाली जानकारी के लिए जुड़े हमारे Youtube के साथ.)

