Ayushman card claim process: केंद्र सरकार गरीब लोगों के मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान योजना तो ले आई लेकिन मुफ्त इलाज के चक्कर में अस्पतालों और सरकारी सिस्टम के बीच अक्सर ठन जाती है. प्राइवेट अस्पताल इलाज के क्लेम का इंतज़ार सालों तक करते रहते हैं और इस चक्कर में आयुष्मान कार्ड धारक का इलाज करने से ही बचने लगते हैं.
लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. सरकार ने ये ज़िम्मा भारत के लोगों को सौंपने का फैसला लिया है. सरकार ने Innovators से अपील की है कि वो ये सुझाएं कि इस प्रोसेस को सरल और ऑटोमेटिक करने के लिए क्या किया कर सकती है. बता दें कि आरटीआई के मुताबिक आयुष्मान कार्ड के करीब 63 लाख से अधिक मामले पैंडिंग हैं.
सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन योजना (ABPMJAY) के तहत ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन 2026 प्लान किया है. इसके लिए देशभर के इनोवेटर्स, छात्रों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और बिजनेसमैन को इनविटेशन भेजा है. इस पहल का उद्देश्य क्लेम प्रोसेसिंग सिस्टम को और अधिक तेज, सटीक और पूरी तरह डिजिटल बनाना है. सरकार चाहती है कि किसी एप, सॉफ्टवेयर स्टार्टअप या किसी नई तकनीक और आइडिया के माध्यम से क्लेम का निपटारा जल्दी और आसानी से हो सके.
रोजाना 50 हजार क्लेम होते प्रोसेस
बता दें कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत रोजाना 50,000 क्लेम प्रोसेस किए जाते हैं. जिनमें 1,900 से अधिक ट्रीटमेंट पैकेज शामिल हैं. फिलहाल 15 से 20 प्रतिशत क्लेम ही सरकार पूरे कर पाती है. बाकी क्लेम वाद विवाद में फंस जाते हैं. कहीं कागजों की कमी, तो कहीं बीमारी क्लेम के तहत कवर हो सकती है या नहीं- इस तरह से सरकार के पास अस्पतालों की फाइलों का अंबार लग जाता है. ऐसे ही लंबित क्लेम के लिए सरकार ने देशभर के शोधकर्ताओं से तकनीक आधारित क्लेम प्रेसेस तैयार करने का आईडिया मांगा है. इस तकनीक की मदद से सरकार क्लेम प्रोसेस को बेहतर और डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठा रही है.
आयुष्मान कार्ड के क्लेम में आएगी तेजी
2011 की जनगणना के अनुसार जो लोग गरीबी रेखा के नीचे आते हैं, वह आयुष्मान कार्ड का लाभ उठा सकते है. बता दें कि इस कार्ड के तहत सरकार 5 लाख रूपये तक का फ्री इलाज देती है. वहीं इस कार्ड का लाभ मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर, गरीब परिवारों, ग्रामीण/शहरी वंचित वर्गों, दिहाड़ी मजदूरों और 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी बुजुर्ग लोग बनवा सकते हैं.
व्यक्ति देशभर के किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होकर अपना इलाज करवा सकता है. वहीं अगर किसी अस्पताल में इलाज प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगर किसी प्रकार की कोई परेशानी आती है तो उसमें सरकार को किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश है जो इन प्रक्रिया को सुचारू रूप से निपाटाने में सरकार की मदद कर सकें. ऑटो एडजुडिकेशन यानि सरकार चाहती है कि बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के, सॉफ्टवेयर की मदद से इन क्लेम को निपटा सकें.
पंजीकरण की आखिरी तारीख
ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन के जरिए सरकार ऐसी डिजिटल प्रक्रिया का निर्माण कर रही है जिसमें मैन्युकल कार्य को कम किया जा सके और क्लेम प्रोसेसिंग को तेज कर सके. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फ्रॉड डिटेक्शन और रियल-टाइम वेरिफिकेशन किया जाएगा. इस पहल में अबतक देशभर से 2,600 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया है वहीं पंजीकरण की आखिरी तारीख 13 अप्रेल है.
इस पहल के माध्यम से नेशनल हेल्थ अथॉरिटी देश में डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने, पारदर्शिता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है.
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