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लंबे समय से है खांसी-जुकाम? तुरंत कराएं डॉक्टर से जांच, हो सकता निमोनिया

Serious Pneumonia Symptoms: निमोनिया फेफड़ों का एक गंभीर रोग है, जो बैक्टीरिया, वायरस या फंगल संक्रमण के कारण होता है.

Serious Pneumonia Symptoms: आपने अपने आसपास कई लोगों को निमोनिया की बीमारी से जुझते सुना होगा. कई लोगों को निमोनिया होने के बाद कई गंभीर रोग तक हो जाते हैं. क्योंकि निमोनिया फेफड़ों का एक इंफेक्शन होता है. निमोनिया के लक्षण दिखने पर अगर आप इसे इग्नोर करते हैं, तो ये स्थिति खतरनाक साबित हो सकती है.

निमोनिया फेफड़ों का एक गंभीर रोग है, जो बैक्टीरिया, वायरस या फंगल संक्रमण के कारण वायु थैलियों यानि एल्वियोली जिन्हें एयर सैक्स भी कहा जाता है. ये फेफड़ों में पाई जाने वाली लाखों सूक्ष्म, गुब्बारे जैसी संरचनाएं हैं, जहां ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान होता है. इसका मतलब है कि जब किसी इंसान को निमोनिया हो जाता है तो फेफड़ों की ये संरचनाएं संक्रमित हो जाती हैं.

कैसे करें निमोनिया की पहचान?

निमोनिया को साइलेंट खतरा माना जाए तो गलत नहीं होगा. इसके लक्षण मामूली संकेतों के साथ शुरू होते हैं. जो बहुत तेजी के साथ बढ़ते हैं. वहीं पल्स ऑक्सीमीटर, ब्लड प्रेशर की मदद से आप निमोनिया को आसानी से पहचान सकते हैं.

निमोनिया की शुरुआती स्टेज के लक्षण

निमोनिया के शुरूआती स्टेज के लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं. जिन लोगों की हमेशा नाक बहती है, साथ ही हल्का बुखार और गले में सूजन रहती ये इसके शुरूआती स्टेज के लक्षण हो सकते हैं. कई लोग इस तरह के लक्षण दिखने पर इग्नोर कर देते हैं, जो आगे चलकर सेहत के लिए खतरनाक साबित होते हैं. इसलिए इस तरह के लक्षण होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें.

इस तरह के लक्षण फेफड़ों को अंदर तक नुकसान पहुंचाते हैं. और लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट यानि श्वसन तंत्र का निचला हिस्सा जिसमें श्वासनली, ब्रोन्काई, ब्रोंकियोल्स और फेफड़े शामिल होते हैं. ये तंत्र फेफड़ों में ऑक्सीजन के आदान-प्रदान के लिए जाने जाते हैं. इन्हें ही लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट कहा जाता है.

ऐसे करें पहचान

खांसी में बदलाव: निमोनिया के गंभीर होने पर सबसे पहले खांसी में बदलाव आता है. बार-बार कफ आता है और बलगम निकलता है. ऐसे में खांसी होने पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है. डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. अगर आपको हरे, पीले या जंग जैसे रंग का गाढ़ा बलगम आता है या फिर उसमें खून नजर आता है तो इसका सीधा मतलब है कि फेफड़ों में इंफेक्शन होना. सामान्य खांसी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन अगर खांसी में इस तरह के लक्षण नजर आते हैं, तो ये खतरनाक हो सकता है. निमोनिया को न्यौता देना जैसा होगा.

पल्स ऑक्सीमीटर: स्वस्थ लोगों में ऑक्सीजन का लेवल 95 प्रतिशत से अधिक होता है. वहीं अगर यह 90-92 प्रतिशत से नीचे गिर रहा है तो मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है. ऑक्सीजन का लो लेवल बताता है कि फेफड़ें ढंग से काम नहीं कर रहे, ऐसी स्थिति में निमोनिया होने का खतरा हो सकता है. इसलिए अगर निमोनिया के लक्षण नजर आते हैं, तो पल्स ऑक्सीमीटर जांच से आप इसकी पहचान कर सकते हैं. यह खून के अंदर की ऑक्सीजन सैचुरेशन बताता है, मतलब खून के अंदर कितनी ऑक्सीजन है.

सांस लेने में तकलीफ: वहीं निमोनिया के शुरुआती लक्षणों में सीढ़ी चढ़ना, या फिर आसान शारीरिक गतिविधियों के दौरान सांस का फूलना जैसे लक्षण नजर आते हैं. सांसों का फूलना के सीधा मतलब होता है कि आपके लंग्स यानि फेफड़े अंदर से किसी न किसी वजह से संक्रमित है. सांस फूलना, छाती में दर्द, तेज चुभने, खांसी और छींकने के साथ तेज दर्द होता है. इसे प्यूरिटिक चेस्ट पेन कहते हैं, जो फेफड़ों के आसपास की लाइनिंग में दिक्कत की वजह से होता है.

तेज बुखार: निमोनिया के सामान्य लक्षणों में बुखार जैसे लक्षण भी नजर आते हैं. अगर किसी को ठंड लगने के साथ तेज बुखार आ रहा है तो उसका इम्यून सिस्टम कमजोर हो गया है. वह संक्रमित हो चुका है. ये इंफेक्शन के गंभीर लक्षण होते हैं. इसलिए निमोनिया की जितनी जल्दी हो जांच करवानी चाहिए.

लो ब्लड प्रेशर: अगर किसी को बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द होने के साथ-साथ लो ब्लड प्रेशर होने के संकेत भी नजर आते हैं, तो ये गंभीर निमोनिया के संकेत हो सकता है. और डॉक्टर से तुरंत इलाज लेना चाहिए.

यह भी पढ़ें: 13 साल के लंबे इंतजार के बाद.. हरीश राणा का निधन, दिल्ली के एम्स में ली अंतिम सांस

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


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