Health Advice on Social Media: आजकल लोग सोशल मीडिया पर काफी निर्भर रहने लगे हैं. इतना ही कि हेल्थ जैसी जानकारी पाने के लिए भी सोशल मीडिया से ज्ञान बटौर लेते हैं. अब इसे लेकर एक रिसर्च सामने आई है. प्यू रिसर्च सेंटर ने मई 2026 में एक रिपोर्ट जारी की. जिसमें जानकारी सामने आई कि दस में से 4 अमेरिकी अडल्ट और 50 साल से भी कम उम्र के आधे लोग हेल्थ और वेलनेस की जानकारी लेने के लिए सोशल मीडिया, इंफ्लुएंसर्स या फिर पॉडकास्ट का सहारा ले रहे हैं.
हैरानी की बात ये है कि जिन इंफ्लुएंसर्स ने ऐसा ज्ञान बटौरा जा रहा है उनके पास कोई असली मेडिकल क्रेडेंशियल ही नहीं होता है. यानी कोई सर्टिफिकेट नहीं कि वो इस फील्ड में एक्सपर्ट हैं या उनके पास डिग्री भी है. जो बेहद चिंता का विषय है. इस रिसर्च के लिए हजारों अकाउंट की छानबीन की गई.
हजारों अकाउंट्स को खंगाला गया
जानकारी है कि डेटा निकालने के लिए रिसर्चर्स ने 6,828 जाने-माने वेलनेस इंफ्लुएंसर्स के अकाउंट खंगाले और 12,800 वेलनेस इंफ्लुएंसर्स के अकाउंट निकाले. इनमें इन लोगों के कई प्लेटफॉर्म के अकाउंट्स थे जैसे यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टिकटॉक. अब आंकड़ा कहता है कि इन प्लेटफॉर्म पर इन लोगों के एक लाख फॉलोअर्स थे.
इन सभी के बायो भी पढ़े गए जिनमें 41 प्रतिशत ऐसे थे जो किसी न किसी तरह से अपने आप को हेल्थ प्रोफेशनल बता रहे ते. यानी लगभग 10 में से 3 इंफ्लुएंसर्स ऐसे थे जो खुद को कोच या फिर एंटरप्रेन्योर बना चुके हैं. इनमें लाइसेंस वाले डॉक्टर्स बी शामिल हैं.
कितने लोग मानते हैं एडवाइस?
ऐसा नहीं है कि अमेरिका के लोगों को इसकी जानकारी नहीं है. उन्हें भी ऐसा महसूस होता है कि ये गलत है लेकिन फिर भी वो इसका विश्वास करते हैं. जानकारी है कि ये सर्वे 5,111 अडलट्स पर किया गया है. अगर बात करें विश्वास की तो आंकड़ा बताता है कि लोगों का कहना है कि वो इसलिए इसपर विश्वास करते हैं क्योंकि सोशल मीडिया पर हेल्थ की जानकारी मिलना काफी आसान है. 7 प्रतिशत लोग इसे सही मानते हैं.
क्यों गंभीर है ये?
इसे टेस्ट करने के लिए कि जानकारी असली है या नहीं फैक्ट चेक के लिए टूल बनाए जा रहे थे उसी दौरान एक और नई मुश्किल सामने आई. माउंट सिनाई के इकान स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसर्चर्स ने बड़े मेडिकव AI मॉडल को असली अस्पताल की डिस्चार्ज समरी दी इसमें कुछ अपने आप से जोड़कर सलाह डाल दी गई. इतना ही नहीं रेडिट से सीधे उठाए गए आम हेल्थ मिथक भी इसमें जोड़े गए. हैरानी की बात ये है कि जो रिजल्ट्स सामने आए उसमें गलत गाइडेंस को फ्लैग करने के बजाए इसे सही मान लिया गया.
उस डिस्चार्ज नोट में सलाह दी गई कि एसोफैगिटिस से जुड़ी ब्लीडिंग वाले मरीजों को लक्षणों को शांत करने के लिए ठंडा दूझ पीने की गलत सलाह दे दी गई. जब इसे अनसेफ मानना चाहिए था लेकिन बजाए इसके इस बात को मान लिया गया और इसे हेल्थ एडवाइस की तरह ले लिया गया.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

