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कोमा से बाहर आने का समय अलग क्यों होता है? यहां जानें कारण

Health News: जब हम कोमा के बारे में सुनते हैं, तो हमारा दिमाग काफी विचलित होने लगता है. आपने आप से एक बार जरूर लेकिन हम यह जरूर कहते हैं कि हम सलामत रहें और ऐसी स्थिति हमारे साथ कभी न हो.

Health News: जब हम कोमा के बारे में सुनते हैं, तो हमारा दिमाग काफी विचलित होने लगता है. आपने आप से एक बार जरूर लेकिन हम यह जरूर कहते हैं कि हम सलामत रहें और ऐसी स्थिति हमारे साथ कभी न हो.

ये एक ऐसी गंभीर स्थिति है जहां जो व्यक्ति इसका शिकार है वो लंबे समय तक बेहोशी की अवस्था में चला जाता है. उस दौरान उस व्यक्ति के आसपास क्या हो रहा है नहीं पता चलता या फिर अगर पता चलता भी है तो वो उसपर रिएक्ट नहीं कर पाता.

किन कारणों से कोमा में जाता इंसान

पहले जान लेते हैं कि आखिर किन केस में एक इंसान कोमा में चला जाता है. जो व्यक्ति कोमा की अवस्था में है. वो जाग नहीं पाता, नॉर्मल इंसानों की तरह बोलचाल नहीं कर पाता. लेकिन ये होता किन कंडिशन में है?

जब हमारे दिमाग पर गंभीर चोट लगे, ब्रेन स्ट्रोक आए, ऑक्सीजन की कमी हो, इन्फेक्शन हो, नशे का अधिक मात्रा में सेवन, या फिर किसी गंभीर बीमारी के कारण व्यक्ति कोमा में चला जाता है. जब हमारे माइंड यानी दिमाग को ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती है फिर पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता या फिर खून नहीं मिल पाता. ऐसे मामलों में नॉर्मल रूटीन के कार्य करने में दिक्कत होने लगती है, और व्यक्ति कोमा में जा सकता है.

रिएक्ट नहीं कर सकता व्यक्ति

जब ऐसी कंडीशन होने लगती है तो पीड़ित को खाने पीने, सांस लेने, शरीर के कई कार्य को करने के लिए मेडिकल सपोर्ट की नीड पढ़ने लगती है. कुछ मामलों में ऐसा भी देखा जाता है कि मरीज को अपने आस-पास क्या हो रहा है उसकी आवाजें तो सुनाई देती हैं, लेकिन वो उसपर रिएक्ट नहीं कर पाता. लेकिन चाहे केस कैसा भी हो ऐसे मामलों को सीरियस मेडिकल इमरजेंसी ही माना जाता है. हालांकि कुछ ऐसी कंडीशन से जल्द बाहर निकल आते हैं, कुछ को सालों का समय लग जाता है. जानेंगे कि आखिर हर व्यक्ति के लिए यह समय अलग क्यों होता है.

अलग क्यों होता है, कोमा से बाहर आने का समय

इस कंडीशन पर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कोमा से बाहर जाने का समय अलग हो सा है. ये पूरी तरह से पीड़ित व्यक्ति की कैसी कंडीशन है, उसे क्या मेडिकल सपोर्ट की नीड पड़ रही है उसपर निर्भर करता है. इस बात पर भी यह निर्भर करता है कि सामने वाले व्यक्ति के दिमाग में कितना नुकसान हुआ है.

आसान भाषा में समझाया जाए तो पीड़ित किस कारण से कोमा में पहुंचा, क्या उसके दिमाग को नुकसान पहुंचा है. अगर पहुंचा है, तो कितना. कैसी कंडीशन है ऐसी स्थिति क्यों हुई. अगर नुकसान ज्यादा नहीं यानि हल्का है और समय रहते इलाज मिल गया है तो कुछ दिनों या फिर हफ्तों में होश आ सकता है. लेकिन यदि चोट या फिर परेशानी ज्यादा गंभीर है और दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचने में कमी हो रही है, तो अधिक रिकवरी का समय लग सकता है.

बॉडी की कंडीशन पर डिपेंड

हालांकि मरीज की उम्र, उसके बॉडी की क्या कंडिशन है, क्या उसे पहले कोई बीमारी है, ये सब चीजें भी शरीर में काफी अहम भूमिका निभाते हैं. कुछ केस ऐसे होते हैं जिनमें व्यक्ति धीरे-धीरे होश में आने लगता है. कुछ की कंडीशन समय रहते बेहतर होने लगती है. यही वजह है कि हर व्यक्ति को कोमा से बाहर आने का समय अलग होता है.

मेडिकल सपोर्ट की क्यों पड़ती जरूरत?

ऐसी हालत में व्यक्ति मेडिकल सपोर्ट पर पूरी तरह निर्भर होता है. क्योंकि अगर सही इलाज और बेहतर केयर मिले तो कंडीशन को बेहतर करने में मदद मिलती है. यही वजह भी है कि डॉक्टर्स पहले कोमा में जाने का कारण ढूंढते हैं. जिसके बाद इलाज किया जाता है. कई बार डॉक्टर्स मरीज को वेंटिलेटर पर रखते हैं, तो कुछ को लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जरूरत पड़ती है.

कोमा के मरीज को कैसा ट्रीटमेंट दिया जाता है

क्योंकि व्यक्ति बेहोशी की हालत में होता है. इसलिए उसके बॉडी पार्ट्स भी कामकाज करने में दिक्कत होती हैं. ऐसे में डॉक्टर्स जरूरी पार्ट्स को नॉर्मल बनाए रखने में दवाइयां और खास ट्रीटमेंट देते हैं. रेगुलर जांच, सही पोषण, साफ सफाई इन सबका भी खास ख्याल रखा जाता है. हालांकि मरीज की हालत को सुधारने में सिर्फ डॉक्टर्स की मदद नहीं परिवार की भी जरूरत पड़ती है. जिसके कारण धीरे-धीरे ही सही मरीज की हालत में सुधार की संभावना बढ़ जाती है.

कोमा से बाहर आने के बाद कैसी होती है लाइफ?

अगर आप ऐसा सोच रहे हैं कि अगर कोमा से बाहर आ जाए तो सब ठीक हो जाता है तो ऐसा नहीं है. कोमा से बाहर आने के बाद कई समस्या का सामना लोगों को करना पड़ता है. कुछ मरीजों को बोलने, चलने या फिर मेमोरी से जुड़ी प्रॉब्लम्स होने लगती है. यानी कोमा से निकलने के बाद भी व्यक्ति को आगे इलाज, थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है.

Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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sarthak arora
sarthak arora
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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