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भारत के पास परमाणु हमले से बचाने वाला कैप्सूल, Bahrain ने भारतीय कंपनी से मांगी ये दवाई

Nuclear Emergencies Bahrain: ईरान-इजारयल युद्ध की जंग इतनी तेज हो गई है कि हमलों से जहरीली हवा वातावरण को प्रदूषित कर रही है।

ईरान-इजारयल युद्ध के बीच एक बड़ी खबर आ रही है। दोनों देशों के बीच जंग इतनी तेज हो गई है कि मिसाइल और ड्रोन के हमलों से निकल रहा धुंआ और जहरीली हवा वातावरण को प्रदूषित कर रही है। ऐसे में बहरीन ने भारत से संपर्क किया है।

वहीं इस भयावह मानवीय आपदा में काम आने वाली दवाओं के बारे में इस जानकारी का होना अपको बहुत जरूरी है। इस आर्टिकल में विस्तार से जानिए कि बहरीन ने भारत से किस-किस कैप्सूल की डिमांड की है। बहरीन की एक दवा कंपनी ने भारत की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देखा है, और उन दवाओं के बारे में जानकारी ली जो दवाईयां इस अशुद्ध वातावरण के समय उनकी हेल्थ को स्वस्थ और सही रखेगी। चलिए जानते हैं ऐसी कौन-कौन सी कैप्सूल है जिन्हें वह भारत से अपने देश ले जाएंगे।

भारत से मांगी गई ये कैप्सूल | Nuclear Emergencies Bahrain

इन कैप्शूल का नाम है, प्रशियन ब्लू कैप्सूल (Prussian Blue Capsule) और पोटेशियम आयोडाइड (Potassium Iodide)। चलिए विस्तार से इन कैप्शूल के बारे में समझते हैं। आखिर क्यों बहरीन ने भारत से इन कैप्शूल की डिमांड की ?

आपको बता दें कि मिडिल ईस्ट का बहरीन देश में स्थित लायजनिक एजेंट नामक फार्मा कंपनी ने भारत के चंडीगढ़ में स्थि एक दवा कंपनी से बातचीत की, और कंपनी से कम-से-कम एक करोड़ की संख्या में प्रशियन ब्लू कैप्सूल (Prussian Blue Capsule) बनाने की क्षमता के बारे में पूछताछ की है। वहीं बहरीन की ये कंपनी भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ भी बातचीत कर रही है। आंशका है कि अगर बातचीत सही रही तो ये कैप्सूल मिडिल ईस्ट के कतर, कुवैत, जॉर्डन तक सप्लाई की जाएगी। इसके साथ ही करीब सवा करोड़ पोटेशियम आयोडाइड टैबलेट की उपलब्धता की बातचीत भी हुई है।

प्रशियन ब्लू कैप्सूल (Prussian Blue Capsule)

भारत में बनने वाली प्रशियन ब्लू कैप्शूल, डीआरडीओ की तकनीक की मदद से बनाई जाती है। इसे रेडियोगार्डेस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक विशेष दवा है जिसका उपयोग शरीर से रेडियोऐक्टिव सीजियम-137 (Cesium-137) और थैलियम (Thallium) को शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है। रेडियोऐक्टिव सीजियम-137 (Cesium-137) और थैलियम (Thallium), ये हानिकारक प्रदूषक तत्व होते हैं। हालांकि यह दवा डॉक्टर की देखरेख में ही दी जानी चाहिए।

पोटेशियम आयोडाइड (Potassium Iodide)

वहीं दूसरी दवा पोटेशियम आयोडाइड (Potassium Iodide) को लेकर भी बहरीन ने जानकारी मांगी है। यह एक सफेद, गंधहीन अकार्बनिक कम्पाउंड है, जो परमाणु हमलों द्वारा फैले जहरीले वातावरण में हेल्थ को सही रखता है। ये दवा रेडियोऐक्टिव आयोडीन को थायरॉयड ग्रंथि में एब्जॉर्ब होने से रोकता है। यह मुख्य रूप से रेडिएशन से सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाता है और थायराइड से जुड़ी बीमारी के इलाज में भी सहायक है। ये दवा केवल विशेष प्रकार के रेडिएशन (रेडियोधर्मी आयोडीन) से बचाता है, ना कि सभी प्रकार के रेडिएशन से। इसे मुख्य रूप से सैचुरेटेड सॉल्यूशन (SSKI) के रूप में या फिर टैबलेट के रूप में उपयोग की जाती है। पोटेशियम आयोडाइट यानि KI, थायराइड ग्रंथि को रेडिएशन से बचाने, हाइपरथायरायडिज्म के इलाज और फेफड़ों में जमे बलगम को ढीला करके शरीर से बाहर निकालता है।

WHO की महत्वपूर्ण सूची में शामिल कैप्सूल

बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में बनने वाली प्रशियन ब्लू कैप्शूल और पोटेशियम आयोडाइट कैप्सूल को रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवाओं की सूची में शामिल किया है। पहले यह दवा अमेरिका और यूरोप में बनती थी, लेकिन भारत में इन दवाओं का उत्पादन दो साल पहले ही शुरू हुआ है।

महिलाओं-पुरुषों के लिए अलग डोज की जानकारी मांगी

दवाओं के साथ-साथ बहरीन ने इस बात की जानकारी भी ली कि क्या वह एक करोड़ कैप्सूल तैयार कर सप्लाई करने की क्षमता रखती है। साथ ही महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के लिए अलग-अलग डोज की जानकारी भी मांगी गई है। कंपनी का मुख्यालय चंडीगढ़ में है, जबकि इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हिमाचल प्रदेश के बद्दी में स्थित है।

यह भी पढ़ें: पेशाब से आती है गंदी बदबू? क्या जानते हैं इसका कारण

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