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उसने खरीदा मैं भी खरीदूंगा, Panic बाइंग का शिकार होते जा रहे लोग; जानें क्या होता है ये?

WHAT IS PANIC BUYING: शॉपिंग करना किसे नहीं पसंद होता. हर कोई चाहता है कि हर महीने घूमने जाएं बाजार में मौजूद जो सामान अगर पसंद आ रहा उसे घर ले आएं

WHAT IS PANIC BUYING: शॉपिंग करना किसे नहीं पसंद होता. हर कोई चाहता है कि हर महीने घूमने जाएं बाजार में मौजूद जो सामान अगर पसंद आ रहा उसे घर ले आएं. लेकिन हम रुक जाते हैं क्योंकि क्या समान लाया जाएगा यह हमारी जेब डिसाइड करती है.

हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं कि कई बार बिना जरूरत की चीजें भी खरीद लेते हैं, जबकि उनकी कोई जरूरत भी नहीं होती. ऐसा तब होता है जब खरीदारी करने वाले व्यक्ति यह लहता है कि वो प्रोडक्ट जल्द ही खत्म होने वाला है. लेकिन इसे क्या कहते हैं?

क्या कहते हैं ऐसे बिहेवियर को?

आप ऐसे समान की खरीदारी करते हैं जिसकी जरूरत भी नहीं होती. साइकोलॉजी की भाषा में इसे कहा जाता है ‘Panic Buying’. पहली बार सुना? आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये क्या नई बला है. घबराइए नहीं आज हम आपको इसी बारे में जानकारी देने वाले हैं कि आखिर पैनिक बाइंग होता क्या है. कहीं आप तो इसका शिकार नहीं.

कब होती है ऐसी कंडीशन?

इसका नाम सुनते ही जरूर आपके मन में सवाल आया होगा कि क्या यह मुझे तो नहीं. ऐसे में आखिर आप इसका कैसे पता लगा पाएंगे तो बता दें कि ऐसी कंडीशन तब होती है जब लोग कुछ लोग किसी चीज की कमी या फिर यह मौका दुबारा नहीं आयेगा खासतौर पर सेल के दौरान ऐसा देखा जाता है. लोग ये सेल दुबारा नहीं आएगी ले ले इस तरह उस सामान की भी खरीदारी कर लेते हैं जिसकी उन्हें जरूरत ही नहीं होती.

लिमिट में अगर किया जाए तो घबराने वाली बात नहीं लेकिन कुछ लोग जरूरत से ज्यादा सामान खरीद लेते हैं. जिसकी कभी जरूरत ही उन्हें नहीं थी. आप सोच रहे हैं कि सिर्फ राशन तो ऐसा नहीं है बल्कि कुछ लोग गैजेट्स, ट्रेंडिंग प्रोडक्ट्स, ऑनलाइन सेल से देखकर खरीदना शुरू कर देते हैं. कौनसे लोग इस से ज्यादा परेशान हैं, क्या आप जानते हैं?

किन लोगों को जल्दी होती है पैनिक बाइंग?

पैनिक बाइंग ( Panic Buying) की समस्या किन लोगों को ज्यादा होती है? कभी आपने यह सोचा है? खरीदारी का पागलपन क्यों बढ़ जाता है. ऐसी कंडीशन तब और परेशान करती है जब आपको ये डर रहे की वो चीज खत्म हो जाएगी या तो किसी दूसरे व्यक्ति को देखकर लोग उस चीज को खरीदना शुरू कर देते हैं. कई बार यह व्यवहार कुछ छूट जाने के डर या फोमो से भी जुड़ा होता है. इसी कारण से गैजेट्स जूते जल्दबाजी में कुछ लोग खरीदारी करने लगते हैं.

क्या दिमाग काम नहीं करता?

आप सोच रहे होंगे कि ऐस कही थोड़ी होता है. क्या मेरे अंदर दिमाग नहीं जो मैं बिना सोचे समझे कुछ भी खरीदने लग जाऊं. आपको बता दें कि पेस्यकोजी के अनुसार जब किसी भी प्रोडक्ट क्या फिर कुछ आइटम्स पर ऑफर बचे हैं आप इस तरह के मैसेज देखते हैं, तो दिमाग में मौजूद अमिगडाला हिस्सा एक्टिव हो जाता है.

ये वो हिस्सा होता है जब हमारे पास कोई खतरा है फिर हमारे साथ कोई नुकसान होने वाला हो उसका संकेत हमें देता है. दिमाग का यह हिस्सा एक्टिव हो जाता है. लेकिन शॉपिंग में कैसा खतरा? तो बता दें जब कोई चीज खो जाना या फिर खत्म हो जाना इस बात का डर हो ऐसी कंडीशन जब सामने होती है तो व्यक्ति चीज़ें खरीदने लग जाता है.

खरीदारी के बाद मिलती है संतुष्टि

क्योंकि आप उस चीज को खरीद चुके हो और वो अपने हासिल कर ली है. जिसके बाद आपका माइंड डोपामिन नाम का एक केमिकल रिलीज करने लगता है. आपको लगता है कि आप सेटिस्फाई हैं.

कौन से लोग ज्यादा इसका शिकार होते हैं?

किन लोगों को यह समस्या ज्यादा परेशान करती है? तो बता दें कि यह वाही लोग हैं जिन्हें सोशल कंपैरिजन काफी इफेक्ट करती है. यानी खरीदारी करते समय कुछ लोग ऐसा भी सोचते हैं कि अगर यह चीज उन्होंने नहीं खरीदी और यह खत्म हो गई और दूसरे उसे खरीद लेंगे. फिर वो पीछे रह जाएगा. इसलिए वो शॉपिंग करने लगते है. ऐसे लोगों में पैनिक बाइंग सबसे ज्यादा देखने को मिलती है.

हालांकि सोशल मीडिया का जमाना है आप सोच रहे होंगे कौन ही ऑफलाइन शॉपिंग के लिए जा रहा है तो ऐसा नहीं है सोशल मीडिया के इस दौर में यह समस्या और भी अधिक बढ़ गई है. सामने वाला व्यक्ति खास ब्रांड का सामान खरीदता है तो लोग भी उसके पीछे भागना शुरू कर देते हैं.

कैसे बचूं कोई उपाय

अब बात करें इस से बचने की तो कुछ स्टेप्स हैं आसान से जिन्हें अगर आप अपनाते हैं तो इस से बच सकते हैं. जैसे अगर कोई ट्रेडिंग चीज अगर महंगी है या फिर खत्म होने वाली है तो उसको खरीदने से पहले समय लें. इस से उस समय उस चीज को लेकर होने वाली एक्साइटमेंट कम होगी.

कुछ भी शॉपिंग करें तो उस से पहले एक लिस्ट जरूर तैयार कर लें जो आपके लिए काफी हेल्पफुल होगा. अगर आपके मोबाइल में सेल, डिस्काउंट ऑफर इस से जुड़े नोटिफिकेशन ऑन हैं, तो उन्हें बंद कर दें. ऐसे नोटिफिकेशन इस तरह की शॉपिंग खरीदने के लिए और एक्साइटेड कर देते हैं. ये लेनिक बाइंग को ट्रिगर करते हैं.

Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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