Middle East War: इस समय अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध जारी है. इस युद्ध की आग ने आम जन जीवन को मुश्किलों में डाल दिया है. आपको बता दें कि इसी युद्ध के कारण कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब और उसके साथ-साथ कई खाड़ी देशों पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है.
सरकार की ओर से इन देशों में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद की जा रही है. लेकिन इस युद्ध को देखते हुए देश में कई डॉक्टर्स ने बड़ी संख्या में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी (आईएमए) ने इन देशों में फंसे हुए भारतीय नागरिकों, डॉक्टरों और आईएमए के सदस्यों की मदद के लिए कुछ हेल्पलाइन नंबरों के बारे में जानकारी साझा की है.
96 लाख भारतीयों की होगी मदद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के लगभग 96 लाख नागरिक ऐसे हैं, जो पश्चिम एशिया में रहते हैं. क्योंकि इस समय स्थिती तनाव भरी है. इस सैन्य टकराव के चलते किसी न किसी रूप ये लोग भी काफी प्रभावित हो रहे हैं. वहीं इन हेल्पलाइन नंबरों को जारी करते हुए IMA का कहना है कि ऐसे कठिन समय में प्रभावित लोगों के साथ एसोसिएशन खजडी है.
इसी के साथ जो लोग जरूरतमंद है वो जारी हुए इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं. साथ ही IMA ने सभी से अपील की है कि शांत रहें और इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, ताकि जरूरतमंदों को समय पर मदद मिल सके.
LPG सप्लाई में हो रही परेशानी
उधर पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट से दुनियाभर में तनाव का माहौल है. भारत पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है. इस बीच एलपीजी की सप्लाई भी काफी प्रभावित हो रही है. दरअसल भारत की सबसे अधिक गैस कतर से आती है. क्योंकि स्थिति तनावपूर्ण है. ऐसे में कतर ने इन गैस सप्लाई को बंद करने का फैसला लिया. जिसके कारण ये एलपीजी संकट खड़ा हो गया. कई इंडस्ट्री को नुकसान झेलना पड़ रहा है.
क्योंकि बड़ी इंडस्ट्री कमर्शियल गैस सिलेंडर पर ही काम करती है. लेकिन सप्लाई बंद होने के कारण इसका मिल पाना काफी मुश्किल हो रहा है. जिसके कारण रेस्टोरेंट इंडस्ट्री काफी नुकसान हो रहा है. घरेलु सिलेंडर भी इस परेशानी से दूर नहीं. यहां तक की देश में गैस की कालाबाजारी होना शुरू हो चुकी है. कई डिस्ट्रीब्यूटर्स हैं, जो ये कह रहे हैं कि घरेलु गैस सिलेंडर की कमी नहीं. लेकिन इसके बावजूद देश तनाव में है.
किसानों के हित में सरकार का फैसला
उधर किसानों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. जहां किसानों को समय पर उर्वरक यानी Fertilizer मिलते रहे और इसका खेती पर कोई असर न पड़े. आपको बता दें कि इसके लिए सरकार ने एक फैसला लिया है. सरकार ने नैचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर 2026 जारीकिया है. जिसके तहत फर्टीलाइजर्स बनाने वाली फैक्ट्रियां नैचुरल गैस की सप्लाई को प्रायोरिटी दी जाएगी. सरकार का कहना है कि गैस सप्लाई को लेकर कंफ्यूजन बनी हुई है.
खासतौर पर पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण. ऐसे में भारत में फर्टीलाइजेशन प्रोडक्शन प्रभावित न हो इसके लिए सरकार ने ये कदम उठाया है. आपको बता दें कि इन नए नियम के अनुसार, उर्वरक फैक्टरियों को पिछले छह महीनों में उनकी औसत गैस खपत के आधार पर कम से कम 70 प्रतिशत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी. यह गैस सिर्फ उर्वरक बनाने के काम में ही इस्तेमाल की जा सकेगी.
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