Moolchand Hospital Cataract Surgery: नई दिल्ली से आई एक बड़ी मेडिकल खबर अब आंखों के इलाज को पूरी तरह बदल सकती है. जिस मोतियाबिंद सर्जरी को लोग अब तक सामान्य प्रक्रिया मानते थे, उसी में अब ऐसा बदलाव हुआ है जो मरीजों के दर्द, रिकवरी टाइम और रिजल्ट तीनों को बेहतर बना सकता है. राजधानी के मशहूर Moolchand Hospital ने एक ऐसा नया सर्जिकल तरीका पेश किया है, जो दुनिया के सबसे छोटे चीरे (incision) के साथ मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने का दावा करता है.
8 अप्रैल 2026 को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल के सीनियर आई सर्जन Dr. Krishna Vaitheeswaran द्वारा विकसित इस तकनीक को एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है, जिसे Wolters Kluwer (Medknow) ने पब्लिश किया है. यह रिसर्च इस बात की पुष्टि करती है कि यह तरीका न सिर्फ सुरक्षित है बल्कि मरीजों को बेहतर विज़न रिजल्ट भी देता है.
मोतियाबंद की सर्जरी में लगाया जाता है इतने मिलीमीटर तक का कट
इस नई तकनीक की सबसे खास बात है कि इसमें सिर्फ 0.7 मिलीमीटर का बेहद छोटा चीरा लगाया जाता है, जबकि आमतौर पर मोतियाबिंद सर्जरी में 1.8 से 2.2 मिलीमीटर तक का कट लगाया जाता है. छोटा चीरा होने की वजह से आंख पर कम असर पड़ता है, जिससे मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी भी काफी तेज होती है. स्टडी के नतीजे भी काफी पॉजिटिव रहे.
सभी मरीजों की दृष्टि 6/12 या उससे बेहतर रही, जबकि 80% मरीजों को ऑपरेशन के अगले ही दिन नजर में साफ सुधार देखने को मिला। सबसे खास बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी मरीज में कोई जटिलता सामने नहीं आई. इससे यह साफ होता है कि यह तकनीक न सिर्फ असरदार है बल्कि बेहद सुरक्षित भी है.
आंख को रखा जाएगा अधिक सुरक्षित
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह तकनीक मोतियाबिंद के हर स्टेज (ग्रेड 1 से 4) में काम करती है और इसमें अल्ट्रासाउंड एनर्जी की जरूरत भी कम पड़ती है, जिससे आंख को और ज्यादा सुरक्षित रखा जा सकता है. इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे एडवांस और मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल तरीकों में से एक माना जा रहा है. इस उपलब्धि पर बात करते हुए डॉक्टर का कहना है कि उनका मकसद हमेशा से सर्जरी को ज्यादा सुरक्षित, सटीक और मरीज के लिए आरामदायक बनाना रहा है.
उनका मानना है कि यह नई तकनीक उसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जो आने वाले समय में आंखों के इलाज के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है. मरीजों के लिए यह तकनीक कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है. इससे ऑपरेशन के बाद जल्दी रिकवरी मिलती है, नजर तेजी से बेहतर होती है और पूरी प्रक्रिया में असुविधा भी कम होती है. कुल मिलाकर, यह नई पहल न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में आंखों के इलाज के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


