Rising Colon Cancer In Young Adults: दुनियाभर में कैंसर काफी तेजी से फैलता जा रहा है. जो काफी चिंताजनक है. हालांकि कैंसर के बढ़ते हुए मामलों पर स्टडी रिपोर्ट सामने आई. इस रिपोर्ट में कोलन कैंसर को लेकर खास चिंता जताई जा रही है.
कोलन कैंसर आंत से जुड़ा एक बड़ा कैंसर होता है. नई स्टडी रिपोर्ट के अनुसार ये युवाओं को सबसे अधिक अपनी चपेट में ले रहा है. हालांकि कई मॉर्डन टेक्नॉलोजी से कैंसर के मामलों में राहत पाई है. यानी कैंसर के मामलों में गिरावट तो देखी गई है.
स्वस्थ दिखते हैं, फिर भी हो सकता खतरा!
कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि हम तो काफी फिट हैं, हमें ये परेशानी नहीं हो सकती है. हालांकि अब ऐसा पैटर्न देखा जा रहा है कि जो लोग बाहर से दिखने में काफी फिट हैं, उनमें भी कई बार ये बीमारी पाई जा रही है. लेकिन स्टडी रिपोर्ट के अनुसार कोलन कैंसर युवाओं में अधिक बढ़ता जा रहा है.
कैसे पहचानें? क्या होते हैं लक्षण? | What Are Symptoms of Colon Cancer
इस कैंसर के लक्षण काफी नॉर्मल होत हैं. जैसे पेट में दर्द, मल यानी पॉटी में खून आना, लंबे समय तक पेट से जुड़ी समस्या से परेशानी आपको हो सकती है. क्योंकि ये काफी नॉर्मल है. किसी गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं है इसलिए कुछ लोग इसे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम समझकर इग्नोर कर देते हैं. हालांकि कई डॉक्टर ऐसी सलाह देते हैं कि अगर आपको ऐसे लक्षण दिखाई दें तो आपको इसकी जांच करवानी चाहिए.
कैसे अचानक बढ़ गए केस?
सवाल आता है कि आखिर आखिर अचानक से कैसे युवाओं में इसके केस ज्यादा देखे जा रहे हैं. इसके पीछे के कारण पर फिलहाल जांच जारी है. लेकिन ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि माइक्रोप्लास्टिक की अधिक मात्रा इस बीमारी का कारण हो सकती है.
हालांकि सिर्फ यही नहीं कई डॉक्टर्स का ऐसा माना है कि बढ़ती हुई उम्र, रेड और प्रोसेस्ड मीट का ज्यादा सेवन, शरीर में फाइबर की कमी, सूजन से जुड़ी आंतों की बीमारियां, मोटापा, फिजिकल एक्टीविटी में कमी आना या फिर परिवार में किसी का भी पुराना पहले कैंसर के साथ केस रहा हो. ये कारण भी कोलन कैंसर के हो सकते हैं.
क्या है माइक्रोप्लास्टिक का खेल
समझते हैं कि आखिर कैसे माइक्रोप्लास्टिक से हमारे शरीर में कैंसर पैदा हो सकता है. तो यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया के रिसर्चर ने एक एनालिसिस किया. जिसमें उन्होंने बताया कि माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर पर गंभीर असर डाल सकते हैं.
आपको बता दें कि रिसर्चर के अनुसार ये माइक्रो यानी छोटे प्लास्टिक के कण कोलन कैंसर ही नहीं फेफड़ों से जुड़ी बीारियों यहां तक की फर्टीलिटी पर भी बुरा असर डाल सकते हैं. चौंकाने वाली बात ये कि ऐसे माइक्रोप्लास्टिक का सेवन हम डिरेक्टली नहीं कर रहे. ये आपके एनवायरमेंट में मौजूद हवा, पानी, समुद्र तट, मिट्टी या फिर खाने तक में मिल जाएंगे. क्योंकि इनका आकार काफी छोटा होता है, तो इसके कण शरीर के अंदर आसानी से पहुंच सकते हैं इसी के साथ कई अंगों में जमा हो सतते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


