Kam Sone Ke Nuksan: जब दिनभर की थकान हो तो शरीर सिर्फ रिलैक्सेशन चाहता है. ऐसा लगता है कि सिर्फ बिस्तर मिले और तन कर सो जाएं. पर कितना? कितना सोना चाहिए. बड़े बुजुर्गों से आपने ये कहते सुना होगा कि सिर्फ 6 घंटे की नींद काफी होती है. लेकिन क्या सच में ऐसा है? क्या सिर्फ 6 घंटे में हमारा माइंड रीसेट हो सकता है?
क्योंकि नींद हमारे लिए एक रीसेट बटन की तरह काम करती है. आप सोएंगे आपके माइंड को रिलैक्स मिलेगा और अगले दिन के लिए काम करने की एनर्जी आपको मिल पाएगी. दिनभर काम की थकान के बाद नींद हमारे खराब सेल्स को ठीक करने का काम करती है. ताकी आप अगले दिन अच्छे से काम कर सके.
लेकिन बड़े बुजुर्गों ने कहा कि 6 घंटे की नींद काफी होती है, तो कुछ लोग सिर्फ 6 घंटे के ही टाइम रूटीन को फॉलो करते हैं. ऐसे में ये रूटीन कितना सही है. सही है भी या नहीं, इसपर सोशल मीडिया पर हैदराबाद से एक डॉक्टर ने चिंता जाहिर की. पोस्ट तेजी से वायरल भी हो रहा है. डॉक्टर ने क्या कहा आइए जान लेते हैं.
रोजाना कम नींद लेने से क्या होता है
जो लोग सोचते हैं कि 6 घंटे या फिर उससे कम नींद लेकर भी वो काफी एक्टिव हैं. अपना सारा काम कर पा रहे हैं. किसी भी दिक्कत का उन्हें सामना नहीं करना पड़ रहा. इसी रूटीन पर डॉक्टर ने पोस्ट किया. हैदराबाद से डॉक्टर सुधीर कुमार सोशल मीडिया पर बताते हैं, अगर कोई भी व्यक्ति एक हफ्ते में रात में सिर्फ 6 घंटे ही सोते हैं, इससे उस व्यक्ति के दिमाग पर काफी असर पड़ता है.
सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
डॉक्टर सुधीर ने पोस्ट करते हुए बताया कि भले ही आप 6 घंटे सो रहे हैं और खुद को फिट या फिर ठीक महसूस कर रहे हैं. लेकिन ये काफी बड़ी समस्या है. उन्होंने बताया कि कई स्टडी रिपोर्ट्स में ऐसा देखा गया है कि जो लोग 2 हफ्तों तक रोजाना 6 घंटे ही सोए उनके सोचने और समझने की क्षमता वैसे ही हो गई जैसे वे 24 से 48 घंटे तक जागे हुए हों. अब आप समझ सकते हैं कि ये कितना खतरनाक साबित हो सकता है.
डॉक्टर ने बताया कि सबसे खतरनाक बात है कि उन्हें ऐसा लग रहा है कि वो बिल्कुल नॉर्मल रूटीन को फॉलो कर रहे हैं और उसी तरह से अपने काम को आसानी से कर पा रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. अगर नींद की कमी हो तो आप एक नशे में है ऐसा महसूस नहीं होगा लेकिन आपमें बेवजह आत्मविश्वास आएगा. अब जान लेते हैं कि अगर आप कम नींद लेते हैं तो क्या असर आपको पड़ सकता है.
- फोकस में कमी
जाहिर है की रात भर सोए नहीं तो हम अगले दिन अपने काम को नहीं कर पाएंगे. इसी तरह अगर आपकी नींद पूरी नहीं होगी तो आपके फोकस में कमी आना शुरू होगी. आपको ऐसा लगेगा कि फोकस कर पाना आपके लिे मुश्किल हो पा रहा है. कई छोटी-छोटी गलतियां बढ़ने लगेंगी. फोकस कम होता जाेगा. ज्यादा समय तक ऐसा रहा तो ये आगे चलकर यादाश्त में कमी, सीखने की क्षमता और काम की प्रोडक्टिवीटी पर असर डालती है.
- धीमे हो जाएगा रिएक्शन टाइम
रोजाना 2 हफ्तों तक सिर्फ 6 घंटे की नींद लेने से आप रिएक्ट स्लो करना शुरू कर देंगे. यानी ये एक ऐसी स्थिती होगी जैसे कोई व्यक्ति 24-48 घंटे जागा हुआ हो. आगे चलकर यादाश्त, डिसीजन लेने की पावर कम होती जाती है. आपको लगेगा ये नॉर्मल है लेकिन आप इसे पहचान भी नहीं पाएंगे ये उतना खतरनाक है.
- काम पर असर, मेमोराइज करने में दिक्कत
अपने नींद के टाइम स्पैन को आप प्रभावित कर रहे हैं. इसका साफ कारण है काम, लेकिन जिस काम के लिए आप टाइम स्पैन को कम कर रहे हैं. उसी के काण आपकी वर्किंग मेमोरी कम हो जाएगी. आपके लिए नई चीजें भी सीख पाना काफी मुश्किल हो सकता है. याद की गई कई बाते स्टेबल नहीं रह पातीं.
क्या कहते हैं डॉक्टर
अब ऐसे मामलों को लेकर डॉक्टर का कहना है कि आपको भले ही अभी वीकनेस महसूस न हो रही है. लेकिन इस चीज का प्रेशर आपका माइंड यानी दीमाग झेल रहा है. क्योंकि कुछ लोगों को लग रहा है कि वो ऐसा करकर कुछ प्रोडक्टिव कर पा रहे हैं, तो वो गलत हैं. इससे आपके माइंड पर काफी असर पड़ता है. अक्सर डॉक्टर द्वारा भी यंग लोगों को 7 से 9 घंटे की नींद लेना बहुत जरूरी होता है. इससे सिर्फ रेस्ट नहीं बल्कि आपके माइंड को ठीक तरह से काम करने में भी काफी मदद मिलती है, इसलिए डॉक्टर का कहना है कि नींद सिर्फ आपके लिए ऑप्शन नहीं ये हर दिन आपके माइंड की मरम्मत का काम करती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


