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World Sleep Day 2026: चैन से सोना है तो शाम पांच के बाद न पिएं चाय – डॉ. खिलनानी से जानें

World Sleep Day : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली चीजों में से एक बन चुकी है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली चीजों में से एक बन चुकी है। देर रात तक मोबाइल चलाना, अनियमित दिनचर्या, भारी भोजन और तनाव जैसी आदतें लोगों की नींद को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग की सेहत के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है।

पीएसआरआई हॉस्पिटल के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर विभाग के चेयरमैन और स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. जी.सी. खिलनानी के मुताबिक, इंसान अपनी जिंदगी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सोते हुए बिताता है। यह समय शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौरान शरीर और दिमाग खुद को रीचार्ज करते हैं।

डॉ. खिलनानी बताते हैं कि नींद के दौरान शरीर का फिजिकल, इमोशनल, साइकोलॉजिकल और मेटाबॉलिक रीजुवेनेशन होता है। यानी शरीर शारीरिक रूप से तरोताजा होता है, दिमाग की कार्यक्षमता बेहतर होती है और ब्रेन में जमा होने वाले हानिकारक मेटाबोलाइट्स साफ हो जाते हैं।

कितनी नींद जरूरी है?

सामान्य तौर पर वयस्कों के लिए 6 से 8 घंटे की गहरी नींद जरूरी मानी जाती है। हालांकि कुछ लोग कम या ज्यादा नींद में भी ठीक रह सकते हैं, लेकिन औसतन यही समय शरीर के लिए पर्याप्त माना जाता है।

डॉ. खिलनानी के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक पर्याप्त नींद नहीं लेता तो इसका असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता। रिसर्च बताती है कि लगातार नींद की कमी से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, डिमेंशिया और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

इंसोम्निया कब बन जाता है बीमारी?

हर व्यक्ति की नींद कभी-कभी खराब हो सकती है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहे तो यह बीमारी का रूप ले सकती है। डॉ. खिलनानी बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को सोने के बाद लंबे समय तक नींद नहीं आती, रात में बार-बार नींद खुल जाती है, या सुबह बहुत जल्दी नींद खुल जाती है। और अगर यह समस्या सप्ताह में तीन बार से ज्यादा और तीन महीने से अधिक समय तक बनी रहती है, तो इसे क्रॉनिक इंसोम्निया कहा जाता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।

खर्राटे भी हो सकते हैं गंभीर बीमारी का संकेत

अक्सर लोग मानते हैं कि जो व्यक्ति जोर से खर्राटे लेता है वह गहरी नींद में होता है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। डॉ. खिलनानी के अनुसार कई मामलों में यह स्लीप एपनिया नामक बीमारी का संकेत हो सकता है।

इस बीमारी में सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुकती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इसके कारण व्यक्ति सुबह उठकर थका हुआ महसूस करता है और दिनभर उसे नींद आती रहती है।

गंभीर मामलों में यह समस्या हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अचानक मौत तक का कारण बन सकती है।

नींद की दवाइयों से सावधान

बहुत से लोग नींद न आने पर खुद ही दवाइयां लेना शुरू कर देते हैं। डॉ. खिलनानी चेतावनी देते हैं कि स्लीपिंग पिल्स हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए। लगातार लंबे समय तक इन दवाइयों का सेवन करने से इसकी आदत पड़ सकती है। वे बताते हैं कि कुछ लोग वर्षों तक बिना डॉक्टर की सलाह के नींद की दवाइयां लेते रहते हैं, जिससे समस्या और जटिल हो सकती है।

अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आदतें

डॉ. खिलनानी के अनुसार अच्छी नींद के लिए कुछ सरल आदतें अपनाना जरूरी है:

  • शाम 4 बजे के बाद चाय-कॉफी या कैफीन से बचें
  • सोने से कम से कम 3 घंटे पहले हल्का भोजन करें
  • सोने से एक घंटा पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप बंद कर दें
  • बेडरूम शांत और अंधेरा रखें
  • नियमित समय पर सोने और उठने की आदत बनाएं
  • दिन में धूप और शारीरिक गतिविधि जरूरी है

वे कहते हैं कि आज युवाओं में मोबाइल एडिक्शन भी नींद खराब होने की बड़ी वजह बन चुका है। इसलिए सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाना बेहद जरूरी है।

निष्कर्ष

डॉ. जी.सी. खिलनानी के अनुसार नींद ईश्वर की एक प्राकृतिक देन है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली ने इसे सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। अगर लोग अपनी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव करें और नींद को प्राथमिकता दें, तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। अच्छी सेहत के लिए यह समझना जरूरी है कि नींद कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि शरीर की मूलभूत आवश्यकता है।

यह भी पढ़ें: टॉक्सिक लोगों के बीच बिगड़ सकती आपकी सेहत, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

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