AIIMS Dry Eye Treatment: आजकल कम उम्र में लोग कई गंभीर बीमारी का शिकार होते जा रहे हैं. इसका कारण है लोगों का खराब लाइफस्टाइल. लगातार लैपटॉप के आगे बैठे रहना. स्क्रीन टाइम लोगों का काफी ज्यादा हो चुका है. नतीजा आंखों की दिक्कत का सामना करना पड़ता है. कम उम्र वाले लोग भी लैपटॉप, मोबाइल और टीवी का अधिक इस्तेमाल करने लगे हैं. जिसके कारण ये समस्या और भी बढ़ती जा रही है.
अब दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी AIIMS ने एक ट्रायल किया और उसके काफी अच्छे रिजल्ट्स देखने को मिले. जानकारी के अनुसार साइंटिस्ट ने ड्राई आई की समस्या और उसके इलाज के लिए एक नई दवा की खोज की. जिसे बाजार में लाने की तैयारी की जा रही है. खास बात ये है कि यह दवा दूध से मिलने वाले प्रोटीन लैक्टोफेरिन पर आधारित है, जिसे खासतौर पर आंखों की नमी बनाए रखने और सूजन कम करने के लिए विकसित किया गया है.
गाय के दूध से तैयार की गई ये दवा
आपको हैरानी होगी कि इस टैबलेट को गाय के कोलोस्ट्रम यानी पहला दूध जिसे कहा जाता है. उससे प्राप्त लैक्टोफेरिन प्रोटीन से तैयार की गई है. यानी ये दवा गाय के दूध से तैयार की गई है. जानकारी के अनुसार कोलोस्ट्रम पोषक तत्व और बायोएक्टिव कंपाउंड्स का खजाना माना जाता है. जो हमारे शरीर को रिपेयर और इम्यून सिस्टम को बढ़ाने में हमारी मदद करता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले पर साइंटिस्ट डॉक्टर सुजाता शर्मा ने बताया कि इस दवा को तैयार करने के लिए एक जापानी कंपनी के साथ पार्टनरशिप की गई है. इस ट्रायल पर आधारित रिसर्च पेपर फिलहाल एक साइंटिस्ट जर्नल में प्रकाशन के लिए समीक्षा के दौर में है.
क्या होता है ड्राई आई?
पहले जान लेते हैं कि ड्राई आई क्या होता है, तो बता दें कि ये एक ऐसी परेशान करने वली समस्या है. जो तब होती जब आंखों में आंसू की पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते. उनकी क्वालिटी ठीक नहीं होती. नतीजा आंखों में जलन, लालपन और भारीपन महसूस होने लगता है. खासतौर पर ये समस्या लंबे समय तक स्क्रीन देखने के कारण होती है और यही आदत और इस समस्या को बढ़ा रही है. क्योंकि इससे पलक झपकने की दर काफी कम हो जाती है. अब तक AIIMS में 200 मरीजों पर ट्रायल किया गया. बताया गया कि सीनियर आई एक्सपर्ट डॉ नम्रता शर्मा की अगुवाई में मरीजों को तीन महीने तक रोजाना 250 एमजी लैक्टोफेरिन दिया गया.
आंखों के आंसुओं की क्वालिटी और क्षमता में सुधार
जानकारी के अनुसार जिन मरीजों पर ट्रायल किया गया उनके आंखों में आंसू बनने की क्षमता और उनकी क्वालिटी दोनों में काफी सुधार देखने को मिला. फिलहाल डॉक्टर ड्राई आईज की समस्या से निपटने के लिए ड्रॉप्स या कभी-कभी स्टेरॉयड का सहारा लेते हैं, लेकिन ये केवल अस्थायी राहत देते हैं और इनके साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. इसके मुकाबले लैक्टोफेरिन आधारित यह नई थेरेपी सुरक्षित, असरदार और किफायती विकल्प के रूप में सामने आई है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


