Antimicrobial resistance (AMR): जब कोई जर्म खुद को मारने के लिए बनाई गई दवाओं के खिलाफ लड़ने लगता है. ऐसी ताकत डेवलप कर लेता है उसे कहा जाता है एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस. ये एक गंभीर समस्या है जिससे आज पूरी दुनिया में कई लोग झेल रहे हैं और अब ये एक खतरा बनकर सामने आ रहा है.
ऐसा क्यों होता है कि कोई जर्म (Germs) दवाओं से ही लड़ने लगते हैं? तो इसका कारण है कि जब एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन अधिक किया जाता है तो ये कारण बन जाता है. अब इसपर एक स्टडी रिपोर्ट सामने आई है. इस स्टडी रिपोर्ट ने नए पहलुओं को उजाहर किया है. आइए जान लेते हैं कि वो नई वजह क्या है.
एंटीबायोटिक दवा के कारण ऐसा होता है?
अब तक इसके मुख्य कारण एंटीबायोटिक दवाओं को ही माना जाता था. लेकिन जब रिसर्च सामने आई तो इसमें खुलासा हुआ कि इसका मुख्य कारण सिर्फ एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल नहीं था. इसके पीछे और कारण भी जिम्मेदार थे. जैसे सोशल इकोनोमिक इनइक्वैलिटी और हमारे लाइफस्टाइल यानी रहना-सहने की स्थिती काफी हद तक इसके जिम्मेदार हैं. क्योंकि कई बार भीड़-भाड़ इलाकों में सफाई की सुविधा की कमी होती है. जो इसके खतरे को और तेजी से बढ़ा रहा है.
इतने करोड़ मौतों का खतरा
इसे लेकर बड़ा संकट इसलिए है क्योंकि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के कारण अगले 25 सालों में दुनियाभर में 3.9 करोड़ से भी अधिक लोगों की जान जाने का खतरा बढ़ता जा रहा है. द लैंसेट जर्नल में इसपर एक रिपोर्ट जारी हुई है. जिससे इसके खतरे का अनुमान लगाया जा सकता है.
क्या कहती है रिसर्च?
इस रिसर्च पर किंग्स कॉलेज लंदन में साइंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रोफेसर सीनियर राइटर तानिया डाटोरिनी ने कहा कि उनकी रिसर्च मल्टी-स्केल, मल्टी मॉडल अप्रोच का इस्तेमाल करता है. जिसे पहले कभी इस तरह से लागू नहीं किया गया है. दवाओं से बढ़ते खतरे पर तानिया का कहना है कि इस खतरे से निपटने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं के जिम्मेदारी का इस्तेमाल, उसके साथ-साथ साफ-साफाई, पोषण और हेल्थ इक्वैलिटी जैसे मुद्दों को बड़े और संरचनात्मक बदलाव करने की सख्त जरूरत है.
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