DIY Dialysis Machine: चीन से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जिससे डॉक्टर, साइंटिस्ट सोच में है. जानकारी है कि चीन का एक व्यक्ति जिसी दोनों किडनियां फेल हो गईं थी. काफी समय तक इलाज करवाया लेकिन खर्च इतना था कि परिवार सड़क पर आ गया. डॉक्टर ने व्यक्ति को उम्र भर के लिए डायलिसिस करवाने की सलाह दी थी.
क्योंकि अस्पताल का खर्चा ज्यादा था, स्थिती ठीक नहीं थी जिंदा रहने के लिए शख्स ने एक ऐसा देसी जुगाड़ निकाला जिसकी इस समय चारों ओर चर्चा हो रही है. हालांकि चर्चा पहले भी हुई थी. लेकिन अब एक वीडियो वायरल होने के बाद ये मामला फिर से उजागर हुआ है. क्या है मामला आइए जान लेते हैं.
प्रेशर कूकर से किया डायलिसिस मशीन
व्यक्ति ने देसी जुगाड़ के रूप में प्रेशर कूकर का इस्तेमाल किया. जानकारी है कि इस व्यक्ति ने कुछ बर्तन और मेडिकल पार्ट्स लिए और खुद ही डायलिसिस मशीन तैयार कर डाली. 13 सालों तक व्यक्ति ने खुद की बनाई हुई मशीन का इस्तेमाल किया. हालांकि डॉक्टरों ने उसे पागल घोषित कर दिया था. लेकिन शख्स ने खुद से बनाई हुई मशीन के दम पर ही 13 साल तक काट दिए थे.
साइंटिस्ट बनना चाहता था हू
चीन के इस व्यक्ति का नाम है हू. हू नानजिंग शहर में वेदर साइंटिस्ट बनने के लिए कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे. साल 1993 की ये कहानी अब फिर से चर्चा में है. पढ़ाई-लिखाई के लिए परिवार ने अच्छा खर्च भी किया. लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. हू की किस्मत बदली डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनकी दोनों किडनिया फेल हो गई है. मेडिकल टर्म में इस कंडिशन को रीनल फेलियर कहा जाता है. रीनल फेलियर तब होता है जब दोनों किडनिया पूरी तरह खराब हो गई हों.
यही से हू की पूरी जिंदगी बदल गई. क्योंकि उनकी पूरी जिंदगी बदल चुकी थी. डॉक्टरों ने साफ और कड़े शब्दों में कहा था जिंदा रहना है तो कुछ-कुछ दिनों में अस्पताल आकर डायलिसिस करवाना ही होगा. ये उस दौरान की बात है जब डायलिसिस का खर्च हर कोई नहीं उठा पाता था.
6 सालों तक उठाया खर्च
ऐसा नहीं है कि अस्पताल जाकर हू ने खर्चा नहीं किया. 6 सालों तक लगातार अस्पताल के चक्कर लगाए. हर दो से तीन दिन में उन्हें अपना खून साफ करवाने जाना पड़ता ही था. क्योंकि इलाज महंगा था. हर बार 50 पाउंड यानी 5,000 हजार रुपये से भी अधिक की कीमत देनी पड़ती थी.
क्योंकि कंडिशन खराब थी. जिसके कारण हफ्ते में दो से तीन बार खर्च उठाने पड़ते थे. छह साल के अंदर परिवार की सेविंग्स खत्म हो गई. सब कुछ बिक गया. जिसके कारण इलाज का खर्च उठा पाना मुश्किल हो चुका था. पैसा न होता तो हू कि जिंदगी भी चली जाती.
खुद ही बना ली मशीन
जीने की चाह हो.. मन में जज्बा हो कुछ कर दिखाने का तो शायद आपको कैसी भी स्थिती हो नहीं रोक सकती. ऐसा ही हू के साथ भी हुआ. साल 1999 में हू के पास पैसे खत्म हो चुके थे. यानी मौत के करीब आ चुके थे. लेकिन हार न मानते हुए हू ने ये तय किया कि वो अस्पताल न जाकर खुद की जान बचा सकते हैं. इसलिए उठा ली मेडिकल की किताब और डायलिसिस के बेसिक जाने उन्हें गहराई से समझा.
फिर क्या था रसोई के बर्तनों जैसे प्रेशर कुकर और कुछ मेडिकल ट्यूब्स ली और कुछ कैमिकल्स का इस्तेमाल किया और अपने ही घर में छोटे कमरे में डायलिसिस की मशीन बना डाली. हू की ये कहानी खूब चर्चा में आई. जिसके बाद कई इंटरव्यू के उन्हें कॉल आ गए.
सरकार ने नहीं की मदद?
हू की ये कहानी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई. बात सरकार तक भी जा पहुंची. क्योंकि हू फेमस हो चुका था. जिसके कारण उसकी किस्मत फिर बदली थी. सरकार को पता चला तो उन्होंने हू को सरकारी मेडिकल इंश्योरेंस स्कीम के तहत जोड़ लिया. जिसके तहत अस्पताल जाकर भी हू को उतने पैसों में इलाज मिल सकता था. जितने में मशीन में लगते थे. लेकिन हू का कहना था कि उनके घर से सबसे नजदीकी अस्पताल काफी दूर है, इसलिए आज भी उनका यह देसी जुगाड़ उनके बहुत काम आता है.
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