Anemia : भारत में एनीमिया (खून की कमी) अब एक बड़ी और बढ़ती हुई स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है. खासतौर पर महिलाओं और बच्चों में इसकी स्थिति चिंताजनक है. हाल के आंकड़ों के मुताबिक, 15 से 49 साल की लगभग 69.7% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, जबकि 6 महीने से 5 साल तक के 67.2% बच्चों में भी इसकी समस्या पाई गई है.
इसी गंभीर स्थिति को समझने के लिए All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण रिसर्च की है. इस अध्ययन में यह पाया गया कि एनीमिया को कम करने के लिए ‘स्क्रीन एंड ट्रीट फॉर एनीमिया रिडक्शन’ (STAR) रणनीति काफी प्रभावी और व्यवहारिक है.
जानकारी के अनुसार यह रिसर्च तेलंगाना के 14 गांवों में की गई, जिसमें 6 महीने से लेकर 50 साल तक के लोगों को शामिल किया गया. इस रणनीति के तहत लोगों की उनके ही समुदाय में ही एनीमिया की जांच की गई और जिनमें खून की कमी पाई गई, उन्हें उनके ही घर पर आयरन और फोलिक एसिड (IFA) सप्लीमेंट दिए गए.
रिसर्च में शामिल किए गए दो ग्रुप्स
आपको बता दें कि इस अध्ययन में दो समूह बनाए गए पहला एक STAR रणनीति वाला और दूसरा सामान्य सरकारी सेवाओं वाला. STAR समूह में 6,131 लोगों को शामिल किया गया. जबकि दूसरे समूह में 5,255 लोग शामिल थे. यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल BMJ Global Health में प्रकाशित हुआ है.
Dr. Bharati Kulkarni के अनुसार, अभी भारत में एनीमिया से निपटने के लिए ज्यादातर फोकस गर्भवती महिलाओं पर और केंद्र-आधारित जांच पर होता है, जिससे सभी तक पहुंच नहीं बन पाती, ऐसे में यह नई ‘स्क्रीन-एंड-ट्रीट’ रणनीति ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है क्योंकि यह सीधे लोगों तक पहुंचती है.
इस रणनीति में आशा कार्यकर्ताओं और समुदाय के सहयोग से लोगों को उनके घर के पास ही इकट्ठा किया गया और वहीं पर पोर्टेबल मशीन से हीमोग्लोबिन की जांच की गई. जिन लोगों में एनीमिया पाया गया, उन्हें इलाज के तौर पर IFA सप्लीमेंट दिए गए, जबकि बाकी लोगों को बचाव के लिए जरूरी खुराक दी गई.
रिसर्च के नतीजे क्या कहते हैं?
- 10 से 19 साल की किशोरियों में एनीमिया 15.3% तक कम हुआ
- औसत हीमोग्लोबिन स्तर में 0.73 g/dL की बढ़ोतरी हुई
- प्रजनन आयु की महिलाओं में एनीमिया 4.4% कम हुआ
कुल मिलाकर STAR समूह में एनीमिया का स्तर कम पाया गया (29.6% बनाम 32.5%)इस अध्ययन के सह-रिसर्चर Dr. Raghu P ने बताया कि इस रणनीति का सबसे ज्यादा फायदा किशोरियों जैसे हाई-रिस्क ग्रुप में देखा गया. हालांकि, कुछ चुनौतियां भी सामने आईं। लोगों द्वारा IFA सप्लीमेंट नियमित रूप से लेने (compliance) की दर बहुत ज्यादा नहीं थी—इलाज के लिए सिर्फ 32% और बचाव के लिए 47.5% लोगों ने ही सही तरीके से दवा ली। इसका मतलब है कि जागरूकता और व्यवहार में बदलाव लाना अभी भी जरूरी है.
भारत में एनीमिया को तेजी से कम किया जा सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की सक्रिय स्क्रीनिंग और इलाज को मौजूदा सरकारी कार्यक्रमों में शामिल किया जाए, तो भारत में एनीमिया को तेजी से कम किया जा सकता है. इससे न केवल लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि देश की उत्पादकता पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.
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