Astronauts in space: आज के समय में अगर हम किसी से कुछ शेयर करना चाहते हैं, तो कितना आसान हो गया है. सोशल मीडिया पर आप चुटकियों में किसी भी जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं. फिर चाहे वो ज्ञान की बात को या फिर विज्ञान. तकनीक हो या फिर स्पेस से जुड़ी जानकारी ही क्यों न हो.
स्पेस की बात आज हम आपसे इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि भारतीय वायु सेना के टेस्ट पायलेट, इंजीनियर और इसरो के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पर एख ऐसी तस्वीरें साझा की जिसकी इस समय काफी चर्चा हो रही है. उनका ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हो रहा है.
स्पेस मेडिसिन की ओर खींचा लोगों का ध्यान
शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें साझा की उसमें अंतरिक्ष में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स के लिए छोटी सी रहने वाली मेडिकल समस्या कितनी बड़ी चुनौती साबित हो सकती है, इसकी झलकियां सोशल मीडिया पर साझा की है. हमारी आंख में अगर कुछ चला जाए तो यहां आप धरती पर कितनी ही आसानी से पानी मारकर उसे निकाल लेते हैं. लेकिन स्पेस में ऐसा कर पाना मुश्किल है.
क्योंकि स्पेस में माक्रोग्रैविटी होती है. यानी यहां पर ग्रैविटी लगभग न के बराबर ही होती है. ऐसे में स्पेस में पानी धरती की तरह नीचे नहीं गिरता. बल्कि हवा में छोटे और गोल बूंद की तरह इधर से उधर तैरने लगता है. अब शुभांशु शुक्ला ने इस तस्वीर में दिखाया कि आखिर एक एस्ट्रॉनोट कैसे अपनी आंखों को स्पेस में साफ करता है. कैसे आंखों को साफ करने के लिए स्पेस में पानी का इस्तेमाल किया जाचा है. जिससे वो पानी पूरे कैबिन में न तैरेे और बाकी लोगों को इससे परेशानी न हो.
पहले ही दी जाती है ट्रेनिंग
स्पेस में जाने से पहले एस्ट्रोनॉट्स को इस बात की ट्रेनिंग दी जाती है कि वो इन समस्याओं का कैसे सामना कर सकते हैं. क्योंकि जिस तरह हम धरती पर चोट लगने पर या फिर सामान्य समस्या होने पर डॉक्टर को दिखा सकते हैं. अस्पताल जा सकते हैं. लेकिन स्पेस में ऐसा कुछ नहीं होता. स्पेस में स्थिती अलग होती है. ऐसे में छोटी से छोटी मेडिकल एमरजेंसी भी स्पेस में काफी बड़ी बन सकती है. इसलिए एस्ट्रोनॉट्स को ट्रेनिंग दी जाती है कि कैसे घाव की देखभाल की जाए, छोटी चोट का इलाज किया जाए. आंखों की सफाई या फिर उसकी देखभाल की जाए.
इस गॉगल्स से मिला सॉल्यूशन
इस परेशानी का इंजीनियर्स ने शानदार सॉल्यूशन निकाल लिया है. दरअसल इंजीनियर्स ने एक ऐसा गॉगल तैयार किया है जिसे सील्ड आई इरिगेशन कहा जाता है. ये दिखने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म के गैजेट जैसा लगता है. अगर इसके खूबी की बात की जाए तो ये आंखों में पूरी तरह फिट हो जाता है. दो ट्यूब इसमें जुड़ी होती है. पहली ट्यूब का काम है स्टेराइल सलाइन यानी नमकीन पानी आंख तक पहुंतता है. दूसरी ट्यूब सक्शन के जरिए पानी को वापस खींच लेती है. शुभांशु शुक्ला ने इसी मशीन की तस्वीर को सोशल मीडिया पर साझा किया है. बताया कि कैसे इस गैजेट को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर मेडिकल इमरजेंसी के लिए तैयार किया गया है.
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