Cheap Weight Loss Jabs: आज से सेमाग्लूटाइड का पेटेंट खत्म होने वाला है. जिसके बाद बाजार से मिलने वाली जेनेरिक दवाओं के आने से उपचार की लागत लगभग आधी हो जाएगी. अब इससे एक फायदा होगा बाजार से मिलने वाले मोटापा कम करने वाले इंजेक्शन के इलाज के नए ऑप्शन्स खुल जाएंगे. देशभर में मोटापा तेजी से फैलता जा रहा है. कई लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं. एक ऑप्शन उन्हें दिखता है कि इंजेक्शन के जरिए इस मोटापे को कम कर लिया जाए.
अगर आप भी इसी तरह अपने वजन कम करने की सोच रहे हैं, तो आप लकी हैं. क्योंकि जल्द ही आपके डॉक्टर्स के प्रिस्क्रिप्शन पर सिर्फ इंजेक्शन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ शामिल होने वाला है. आपको डायट प्लान, डर्मेटोलिस्ट्स के साथ कंसल्टेशन्स, रेगुलर फॉलो अप्स का एक्सेस. साथ ही स्पेशेलाइज्ड ओबेसिटी क्लिनिक्स सहायता भी आपको मिल सकती है.
पेटंट खत्म होने का फायदा
आज यानी शुक्रवार को खत्म होने वाले इस पेटंट से कैसे फायदा मिलेगा? दरअसल डेनमार्क की मेडेसिन मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी नोवो नॉर्डिस्क की ब्लॉकबस्टर वेट-लॉस करने वाली दवा वेगोवी और ओज़ेम्पिक में सेमाग्लूटाइड का ही इस्तेमाल किया जाता है. अब जब इसका पेटंट आज खत्म हो जाएगा तो डोमेस्टिक फार्मास्यूटिकल कंपनियां बड़े स्केल पर सेमाग्लूटाइड के सस्ते या जेनेरिक वर्ज़न बनाना शुरू कर देंगी. इससे आपको क्या फायदा होगा? तो बता दें कि जब इसके और भी वर्जन बन जाएंगे तो इसके बाद होने वाली होड़ के कारण दाम काफ़ी गिर सकते हैं.
एक महीने में हो जाते इतने खर्च
पेटंट खत्म होने की चर्चा कई दिनों से की जा रही है. क्योंकि वो दिन आज आ चुका है. आपको बता दें कि वेट लॉस की दवा ओजेम्पिक और मोनजारो की खूब चर्चा हुई है. वहीं यही दवाएं मोटापा या फिर डायबिटीज जैसे मरीजों के लिए काफी शानदार साबित होने वाला है. हालांकि कई लोग इसका फायदा उठा रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों के लिए इसका खर्च उठा पाना मुश्किल हो पा रहा है.
जानकारी के अनुसार इन डवाओं के डोज का खर्चा महीने भर में 10 से 20 हजार रुपये आ जाता है. लेकिन अब यही बोझ कम होने वाला है. जी हां, ये दवाएं सस्ती होने वाली है. अब कई फार्मा कंपनियां इन दवाओं के जेनरिक वर्जन को तैयार कर पाएंगी. जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल देशभर में 40 से अधिक दवा कंपनी ऐसी हैं, जो इस ओर काम करते हुए अपना ब्रांड लॉन्च करने की तैयारी में है. यह डेवलपमेंट वेट लॉस और डायबिटीज के इलाज में एक गेमचेंजर साबित हो सकता है.
क्या पहले कभी हो चुका ऐसा?
सवाल आता है कि क्या पहले भी कभी ऐसा हुआ है? तो इसका जवाब है हां. भारत में पहले भी ऐसी स्थिती देखी गई है. जब डेपाग्लिफ्लोज़िन जैसी दवा पटेंट खत्म हुआ था. उस दौरान भी कई जेनरिक ब्रांड्स मार्केट में आ गए थे. जानकारी के अनुसार उस दौरान कुछ ही समय के करीब 100 ब्रांड्स उपलब्ध हो गए थे. हालांकि शुरुआती स्टेज में दिक्कत का सामना करना पड़ा था. इसके बाद डॉक्टर्स ने कई भरोसेमंद कंपनियों की दवाओं को प्रायोरिटाइज करना शुरू कर दिया था.
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