How To Treat Dyslexia in A Child: हमारे आस-पास ऐसे कई बच्चे हैं, जिनके पढ़ने-लिखने की क्षमता अलग होती है. वह अन्य सामान्य बच्चों से अलग होते हैं. लेकिन उन्हें देखकर अक्सर ये कह दिया जाता है कि वह मंदबुद्धि है, लेकिन असल में वह बच्चे डिस्लेक्सिया डिसऑर्डर से जूझ रहे होते हैं.
यह डिसऑर्डर पढ़ाई-लिखाई से जुड़ा हुआ है. डिस्लेक्सिया डिसऑर्डर, न्यरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है. जो किसी व्यक्ति के लिखने वाली भाषा को प्रोसेस करने और डिकोड करने की क्षमता को प्रभावित करता है. अगर किसी बच्चे का पढ़ाई-लिखाई में प्रोसेस अन्य बच्चों से अलग है तो इसका मतलब ये नहीं कि वह मंदबुद्धि है, बल्कि उस बच्चे का दिमाग में जानकारी प्रोसेस करने का तरीके अलग है.
बता दें कि न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर (तंत्रिका विकास संबंधी विकार) मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास में रुकावट के कारण बचपन में शुरू होने वाली स्थितियां हैं. ये विकार सोचने, व्यवहार, संचार, सीखने और मोटर कौशल को प्रभावित करते हैं, जो आमतौर पर जीवन भर बने रहते हैं. न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर के मुख्य उदाहरणों में ऑटिज्म (ASD), ADHD, सीखने की अक्षमता (Learning Disabilities), और बौद्धिक विकलांगता शामिल हैं.
क्या है डिस्लेक्सिया डिसऑर्डर?
डिस्लेक्सिया एक लर्निंग डिसेबिलिटी है, जो सीखने की क्षमता से जुड़ा हुआ है. ये मुख्य रूप से बच्चे के पढ़ने, लिखने और शब्दों को समझने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. जो बच्चे डिस्लेक्सिया से पीड़ित होते है वह तेजी से पढ़ नहीं पाते साथ ही वह लिखते समय बहुत गलतियां करते हैं. उन बच्चों को पढ़ने, लिखने, शब्दावली और हाथ-आंख के समन्वय की आवश्यकता वाले कार्यों में कठिनाई हो सकती है.
डिस्लेक्सिया के लक्षण
डिस्लेक्सिया वाले बच्चों को पढ़ने में परेशानी हो सकती है, जैसे कि शब्दों को पहचानने में समस्या होना या बहुत धीरे-धीरे पढ़ पान. साथ ही उन्हें लिखने में भी खास परेशानी होती है, जैसे शब्दों को सही तरह से लिखने में परेशानी होनी. डिस्लेक्सिया वाले बच्चों को मैथ सॉल्व करने में भी दिक्कत हो सकती है. फोकस करने में परेशानी होना, जिसकी वजह से पढ़ने, लिखने में परेशानी होती है. वहीं बच्चों में आत्मविश्वास में कमी हो सकती है.
डिस्लेक्सिया को कैसे करें ठीक
इस बीमारी का मुख्य कारण आनुवंशिक और न्यूरोलॉजिकल माना जाता है. इसलिए बच्चों में बीमारी के लक्षणों की पहचान कर इसे जितना जल्दी हो सके उतनी जल्दी ठीक कराएं. क्योंकि इस बीमारी के कारण बच्चों के मानसिक विकास में बाधा हो सकती है. इस बीमारी को ठीक करने के लिए कुछ खास प्रकार की थेरेपी, एजुकेशनल प्लान की मदद से इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें: Fatty Liver को इग्नोर करना बन सकता है खतरनाक! जानें कब डॉक्टर से करवाएं जांच और लक्षण
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


