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‘टेस्ट में बेस्ट एवरेस्ट’ पर क्यों हो रहा विवाद? सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल; यहां जानें पूरा विवाद

Everest Spice Controversy: 'टेस्ट में बेस्ट, मम्मी और एवरेस्ट' ये टैगलाइन आपने फेमस इंडियन ब्रांड एवरेस्ट की ऐड्स में सुना होगा.

Everest Spice Controversy: ‘टेस्ट में बेस्ट, मम्मी और एवरेस्ट’ ये टैगलाइन आपने फेमस इंडियन ब्रांड एवरेस्ट की ऐड्स में सुना होगा. आज वही टेस्ट में बेस्ट एवरेस्ट मसालों पर सवाल उठना शुरू हो चुका है. दरअसल एवरेस्ट मसालों के कुछ प्रोडक्ट्स की क्वालिटी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा जारी है.

आपको बता दें कि ये चर्चा उस समय तब तेज हुई जब ट्रस्टिफाइड नाम के एक यूट्यूब चैनल ने एक वीडियो जारी किया. जानकारी के लिए बता दें कि चैनल ने एक मार्च 2026 को ये वीडियो जारी किया था. इसमें क्लेम किया गया कि एवरेस्ट के कुछ मसाले लैब टेस्ट के तय स्टैंडर्ड्स पर खरे नहीं उतरे. उन्होंने इस वीडियो में ये भी जानकारी दी कि मसालों की खरीदारी उन्होंने डी-मार्ट स्टोर से की जहां लैब टेस्ट के लिए जब उसे भेजा गया.

क्यों करवाई गई जांच?

इस जांच को करवाने के पीछे चैनल का मकसद ये पता लगाना था कि ये मसाले इंडियन फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया की सुरक्षा सीमाओं को पूरा करते भी हैं या नहीं. जब टेस्ट के लिए मसाले भेजे गए तो क्या पाया गया? इसी का खुलासा इस वीडियो में किया गया. जानकारी दी गई कि उन्होंने एक पैकेट को टेस्ट के लिए भेजा था. जिसमें प्रोडक्ट्स की जांच की गई उसमें एवरेस्ट गरम मसाला, एवरेस्ट किचन किंग मसाला, एवरेस्ट कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर और एवरेस्ट मीट मसाला शामिल थे.

कीटनाशक पाए गए

इस वीडियो में दी गई जानकारी के अनुसार एवरेस्ट के गरम मसाला में दो कीटनाशक तय सीमा से कई अधिक पाए गए. इन कीटनाशक के नाम का खुलासा किया गया. इनका नाम एसेटामिप्रिड और एजोक्सीस्ट्रोबिन बताया गया. इसके अलावा इन सैंपल्स में एंटरोबैक्टीरिएसी परिवार के बैक्टीरिया की मात्रा भी अधिक बताई गई.

लिवर, आंत और नर्वस सिस्टम पर असर

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ करेंट माइक्रोबायोलॉजी एंड एप्लाइड साइंस में छपी एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार जब किसी भी खाने के सामान में लंबे समय तक ऐसे कैमिकल्स का इस्तेमाल किया जाए तो इसका शरीर पर काफी बुरा असर पड़ता है. क्योंकि समय के साथ इन कैमिकल्स के कुछ पार्ट्स शरीर में जमा हो सकते हैं. जो हमारे लिवर, आंतों और नर्वस सिस्टम पर काफी बुरा प्रभाव डाल सकता है. खासतौर पर इसका असर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून वाले लोगों को इसका खतरा अधिक माना जाता है.

अब इसपर एक्सपर्ट्स का ऐसा कहना है कि ऐसे मसालों में अगर एंटरोबैक्टीरिएसी की मौजूदगी है, तो ये इस बात का संकेत है कि सफाई या फिर प्रोसेसिंग के दौरान काम सही नहीं हुआ. या फिर यूं कहा जाए कि कच्चे मसालों को ठीक तरह से साफ नहीं किया गया. इस प्रोसेस और पैकिंग की प्रक्रिया में स्वच्छता का ख्याल नहीं रखा गया है.

यह भी पढ़ें: हरीश राणा की इच्छामृत्यु को सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी, फैसला सुनाते हुए भावुक हुए जज

sarthak arora
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अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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