Health Expenditure: भारत में लोगों की जेब से इलाज पर होने वाला खर्च यानी Out-of-Pocket Expenditure (OOPE) पिछले कुछ वर्षों में काफी कम हुआ है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी National Health Accounts (NHA) 2022-23 की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक 2013-14 में कुल स्वास्थ्य खर्च में लोगों की जेब से होने वाला खर्च 64.2% था, जो अब घटकर 43.4% रह गया है। यानी करीब 21% की कमी दर्ज की गई है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इसका मतलब है कि अब लोगों को इलाज के लिए पहले जितना आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ रहा. सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं और मुफ्त सुविधाओं का फायदा आम जनता तक पहुंच रहा है.
आयुष्मान आरोग्य मंदिर का बड़ा योगदान
सरकार का कहना है कि देशभर में 1.8 लाख से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर वेलनेस सेंटर शुरू किए गए हैं. यहां लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त में मिल रही हैं. इन सेंटरों पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल, संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों का इलाज, मुफ्त दवाएं, जांच, टेली-कंसल्टेशन और हेल्थ वेलनेस सेवाएं दी जा रही हैं. इससे लोगों को अस्पतालों के चक्कर कम लगाने पड़ रहे हैं और बीमारियों की रोकथाम में भी मदद मिल रही है.
दवाइयों और सप्लीमेंट पर अब भी ज्यादा खर्च
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लोगों की जेब से होने वाले खर्च का सबसे बड़ा कारण अब भी दवाइयां, हेल्थ सप्लीमेंट, विटामिन और प्रोटीन सप्लीमेंट्स की खरीदारी है.
GDP में बढ़ा सरकारी स्वास्थ्य खर्च
रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च भी बढ़ाया है.
- 2013-14 में सरकार का स्वास्थ्य खर्च GDP का 1.15% था
- 2022-23 में यह बढ़कर 1.43% हो गया
वहीं कुल सरकारी खर्च में हेल्थ सेक्टर की हिस्सेदारी भी 3.78% से बढ़कर 4.89% हो गई है.
प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च में बड़ी बढ़ोतरी
सरकारी स्वास्थ्य खर्च प्रति व्यक्ति के हिसाब से भी काफी बढ़ा है.
- 2013-14 में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च ₹1,042 था
- 2022-23 में यह बढ़कर ₹2,786 हो गया
यानी करीब 2.7 गुना बढ़ोतरी हुई है.
कोरोना काल में सबसे ज्यादा बढ़ा खर्च
कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने हेल्थ सेक्टर पर ज्यादा खर्च किया था। 2021-22 में स्वास्थ्य खर्च GDP के 1.84% तक पहुंच गया था. इसी दौरान लोगों की जेब से होने वाला खर्च घटकर 39.4% तक आ गया था.
हेल्थ इंश्योरेंस का बढ़ा इस्तेमाल
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अब लोग हेल्थ इंश्योरेंस की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.
- 2013-14 में प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस की हिस्सेदारी 3.4% थी
- 2022-23 में यह बढ़कर 9.2% हो गई
सरकार का मानना है कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और खर्च करने की क्षमता दोनों बढ़ी हैं.
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