India-UK Trade Deal: भारत और ब्रिटेन के बीच पिछले काफी समय से बिजनेस डील के समझौते का इंतजार किया जा रहा था. जो अब खत्म हो चुका है. दरअसल जिस समझौते का इंतजार था वो अब लागू हो चुका है. जिससे की दोनों देशों के कारोबार को एक नई रफ्तार मिलने की उम्मीद की जा रही है.
इस उम्मीद के साथ अब लग्जरी कार, स्कॉच व्हिस्की, फैशन प्रोडक्ट्स और हेल्थ केयर सिस्टम पर इसका असर देखने को मिलेगा. यानी हेल्थकेयर सिस्टम में और मजबूती आएगी. दरअसल ब्रिटेन से भारत में कुछ खास डिवाइस और कुछ दवाएं इंपोर्ट होती है.
कीमतें होंगी कम
अब जो दवा और डिवाइसेस बाहर से इंपोर्ट किए जाते हैं इस समझौते के तहत आने वाले समय में उनकी कीमतों में कमी आ सकी है. जो भारत के हेल्थकेयर सिस्टम के लिए फायदे का सौदा है. ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर भारत यूके से कौन सी दवाएं और कौन से मेडिकल्स प्रोडक्ट्स को इंपोर्ट करता है. साथ ही इस नई ट्रेड डील के बाद कितना दाम उन प्रोडक्ट्स का होगा. आइए डिटेल में जानते हैं.
15 जुलाई से लागू हुआ समझौता
आपको बता दें कि भारत और ब्रिटेन के बीच ऑफिशियली आर्थिक एंव व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू हो चुका है. पिछले साढ़े तीन सालों तक इस समझौते पर दोनों देशों के बीच बातें चली. इन 14 दौर की चर्चा के बाद समझौते को अंतिम रूप दिया गया है. वहीं इस डिल का मकसद साफ है दोनों देशों के बीच डील होगी जिससे व्यापार बढ़ेगा, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट और भी आसान हो जाएगा. इससे आने वाले समय में इंपोर्ट प्राइस को कम या फिर खत्म करना इस डील का मकसद है. ये डील से भारत को काफी लाभ पहुंचेगा क्योंकि भारत के लगभग 99 प्रोडक्ट्स को ब्रिटेन में बिना किसी शुल्क के पहुंच मिलने में आसानी होगी. यानी ब्रिटेन से आने वाले कई प्रोडक्ट्स पर भारत में आयात शुल्क तरीके से कम किया जाएगा.
भारत में कौन-कौन सी दवाएं यूके से इंपोर्ट होती हैं?
अब जान लेते हैं कि आखिर UK से भारत में कौन-कौन सी दवाएं इंपोर्ट की जाती है, तो इसमें स्पेशलाइज्ड जेनरिक दवाएं और उसके साथ कई मेडिकल डिवाइस शामिल हैं. जिन्हें भारत में इंपोर्ट किया जाता है. इनमें सर्जिकल डिवाइस, डायग्नोस्टिक मशीनें, ईसीजी मशीनें, अन्य एडवांस हेल्थकेयर डिवाइस लिस्ट में शामिल हैं. क्योंकि ये ट्रेड डील सफल हुई तो इसे देखते हुए अब इन प्रोडक्ट्स पर लगने वाला इंपोर्ट शुल्क कम या फिर सस्ते होने की संभावना जताई जा रही है.
स्टेप-बॉय स्टेप कीमतों में होंगे बदलाव
ऐसा नहीं है कि इस डील के हो फाइनल होने के तुरंत बाद इन मेडिकल डिवाइसेस पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को कम कर दिया जाएगा. स्टेप-बॉय स्टेप इसे कम किया जाएगा. यानी पहले जहां इन प्रोडक्ट्स पर 7.5 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक इंपोर्ट शुल्क लगता था उसे घटाकर सीधे 3 प्रतिशत किया जा सकता है.
इसमें इमेजिंग सिस्टम, डायग्नोस्टिक डिवाइस, सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स और अन्य मेडिकल टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स शामिल हैं. मार्केट एक्सपर्ट्स और इस सेक्टर से जुड़े इंस्टीट्युशंस ऐसा मानते हैं कि इससे भारत में मेडिकल डिवाइस पहले के मुकाबले काफी सस्ते दामों पर मिल सकेंगे. यहां तक की ये शुल्क कम होने के बाद दवाओं की कीमतें भी गिरावट आ सकती है. इसके अलावा अगले 10 सालों में करीब 85 प्रतिशत ऐसे प्रोडक्ट्स पूरी तरह टैरिफ-फ्री हो जाएंगे. इससे अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और मरीजों को आधुनिक मेडिकल डिवाइस पहले की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं.
यह भी पढ़ें: डिमेंशिया को रोका जा सकता है! WHO ने बीमारी को रोकने के लिए दिए बड़े सुझाव
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

