New Diarrhea Virus Variant: बच्चों और उनकी सेहत का खास ख्याल रखना पड़ता है. दरअसल छोटे बच्चों की सेहत को लेकर नई चिंताएं सामने आ रही है. उनमें भी खास तौर से 5 साल या फिर उससे कम उम्र के बच्चों में. जानकारी के अनुसार इस Age ग्रुप के बच्चों में डायरिया यानी वायरल गैस्ट्रोएंटोराइटिस का खतरा तेजी से फैलता जा रहा है. हालांकि पहले तक इस बीमारी में रोटावायरस को बड़ा कारण माना जाता था. लेकिन अब एक नए खतरे की पहचान की गई है.
जानकारी के अनुसार साइंटिस्ट ने एक नए वायरस की पहचान की है. जिसे ह्यूमन एडेनोवायरस-एफ यानी (HAdV-F) नाम दिया गया है. ये वायरस बच्चों में दस्त और उल्टी की समस्या पैदा कर रहा है. इसलिए इसे लेकर काफी चिंता बढ़ रही है. जानकारी के लिए बता दें कि इसपर एक रिसर्च की गई जिसमें एक नए वेरिएंट की पहचान की गई है. साइंटिस्ट ने इस नए वायरस में जेनेटिक बदलावों की पहचान की है. आपको बता दें कि आने वाले समय में इसके संक्रमण और भी खतरनाक बन सकते हैं. इसलिए इसे लेकर माता-पिता को अलर्ट रहना चाहिए.
इस Age ग्रुप के बच्चे बन रहे शिकार
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर बैक्टीरियल इंफेक्शन रिसर्च यानी ICMR और NIRBI ने इसपर रिसर्च की और जानकारी साझा की कि 6 महीने से 2 साल तक के बच्चे सबसे अधिक इस संक्रमण का तेजी से शिकार बन रहे हैं. जानकारी के अनुसार 6 से 12 महीने के बच्चों में इस वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है. इसका कारण साफ है इस उम्र में बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाती. जिसके कारण उनका शरीर इसे लड़ने में कमजोर पड़ जाता है. यानी अगर थोड़ी भी लापरवाही बरती तो ये गंभीर बीमारी का भी कारण बन सकता है.
मौसम बन सकता बड़ा कारण
एक स्टडी में पता चला कि मौसम की वजह से इसका संक्रमण अधिक फैलता है. क्योंकि तापमान और नमी जब बढ़ती है जिससे बारिश होती है और इसका संक्रमण तेजी से फैल सकता है. रिसर्चर्स के अनुसार ये एक साइन है कि मौसम और पर्यावरण कंडिशन भी इस संक्रमण को फैलने में अहम भूमिका निभाते हैं. पिछले आंकड़ों पर अगर गौर किया जाए तो भारत में करीब 1.7 अरब बच्चे जो हैं हर साल डायरिया के समस्या से परेशान होते हैं. इतने बच्चों में डायरिया की समस्या सामने आती है. इसमें भी 70 प्रतिशत से भी अधिक मामलों में रोटावायरस, नोरोवायरस, एडेनोवायरस-एफ, एस्ट्रोवायरस जिम्मेदार होते हैं. इसीलिए वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस की निगरानी बच्चों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों का अहम हिस्सा मानी जाती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


