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मोनालिसा की उम्र की होगी जांच, कैसे होता है ये टेस्ट? पढ़ें पूरी डिटेल यहां

NHRC Order Age Verification Of Mona Lisa: कुंभ मेले में करोड़ों श्रद्धालु पहुंचे और उन्होंने आस्था की डुबकी लगाई. मेले में काफी लोग फेमस हुए.

NHRC Order Age Verification Of Mona Lisa: कुंभ मेले में करोड़ों श्रद्धालु पहुंचे और उन्होंने आस्था की डुबकी लगाई. इस मेले में काफी लोगों को फेम मिली. इनमें मोनालिसा का नाम सबसे अधिक छाया रहा. मोनालिसा आज भी सोशल मीडिया पर बनी हुई है. हाल ही में उन्होंने शादी की. जिसके बाद उनकी उम्र को लेकर सवाल उठना शुरू हो चुके. दरअसल हिंदू पक्षों के कई लोगों की ओर से मोनालिसा की उम्र को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

शिकायत है कि मोनालिसा ने कुंभ मेले के दौरान अपनी उम्र 16 साल बताई थी. कुंभ मेले को बीते एक साल हुए. जिसके हिसाब से मोनालिसा की भी उम्र 17 साल होनी चाहिए थी. लेकिन जब उन्होंने शादी की तो डॉक्यूमेंट्स में कुछ हेरफेर की है. साथ ही अपनी उम्र छिपाते हुए गलत जानकारी दी. जिसके कारण मोनालिसा के नाबालिग होने पर सवाल उठना शुरू हो गए. साथ ही उनके पति पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि फरमान ने नाबालिग से शादी की है.

फरमान के खिलाफ होगा एक्शन?

इस जानकारी के बाद फरमान के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत मामला दर्द किया जा रहा है. उधर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से पुलिस को इस मामले की गंभीरता से जांच के आदेश दिए जा चुके हैं. अब मोनालिसा की उम्र का पता लगाया जाएगा. लेकिन ये प्रोसेस कैसे होगा? कैसे किसी की Age का पता लगाया जा सकता है. इन सभी सवालों का जवाब आज हम आपके लिए लाए हैं. क्या है इसका साइंटिफिक तरीका. क्या इस प्रोसेस से मोनालिसा की सही Age सामने आ सकती है. आइए डिटेल में जान लेते हैं.

कई तरह के टेस्ट होते हैं

आपको बता दें कि किसी की उम्र पता करने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं. हालांकि ये जितना आसान दिख रहा है उतना है नहीं. ये फॉरेंसिक साइंस की एक मुश्किल प्रक्रिया है. इस प्रोसेस को ऑसिफिकेशन टेस्ट कहा जाता है. इस प्रोसेस और टेस्ट में आपकी बोन्स के जुड़ाव की कंडिशन को चेक किया जाता है. इस प्रोसेस को पूरा करने के बाद डेंटल Aging टेस्ट होता है. यानी दातों और उसकी जड़ों की बनावट को चेक किया जाता है. जिससे उम्र का पता लगाना और हार्मोनल और सेकेंडरी सेक्शुअल कैरेक्टर को भी आधार बनाया जाता है. फोरेंसिक साइंस में बोन डेंसिटी टेस्ट भी प्रमुख है. इसके बाद टेलोमीयर टेस्टिंग से भी इसका पता लगाया जाता है.

इन टेस्ट का सबसे अधिक किया जाता इस्तेमाल

मोनालिसा के केस में यानी जो नाबालिग होते हैं उनके केस में ओसिफिकेशन टेस्ट और डेंसिटी टेस्ट सबसे प्रमुख टेस्ट में से एक हैं. नाबालिग की उम्र पता लगाने के लिए इन्हीं टेस्ट का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है. अब सवाल आता है कि आखिर कैसे होता है ये टेस्ट? इसका जवाब है कि आपके हाथ की कलाई का एक्स-रे किया जाता है. इस एक्स-रे में हड्डियों की जांच की जाती है.

दरअसल जब हमारी उम्र बढ़ती है तब हड्डियां भी आपस में जुड़ती है. साइंस के हिसाब से उनके सिरे फ्यूज होने लगते हैं. अब जब डॉक्टर एक्स-रे और डेंटल स्कैन करते हैं, तो इससे हड्डियं और दातों के बनावट का विश्लेषण करते हैं. इसमें देखा जाता है कि बालिग है या फिर नाबालिग. अब ऐसे में सवाल आता है कि ये टेस्ट कितना सफल होता है तो 80 से 90 प्रतिशत तक इसकी सटीकता होती है. पोषण और बीमारियों के कारण इसमें 2-3 साल का अंतर आ सकता है.

दातों के टेस्ट से क्या होता है?

दातों के टेस्ट से जीवित व्यक्ति और हाल ही के शवों की उम्र का पता करने का सबसे सटीक तरीका है. इसमें बच्चों के दातों को निकलने के क्रम और वयस्कों में दांतों के घिसने या एस्पार्टिक एसिड रेसमीकरण की जांच की जाती है. बच्चों और किशोरों में यह 95% तक सटीक होता है लेकिन वयस्कों में इसमें 5-10 साल का अंतर आ सकता है.

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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

sarthak arora
sarthak arora
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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