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ऑटिज्म के इलाज के लिए स्टेम सेल थेरेपी गैरकानूनी, सिर्फ इन्हीं बीमारियों में हो सकेगा इस्तेमाल

NMC Order on Stem Cell Therapy: स्टेम सेल थेरेपी अब ऑटिज्म के इलाज के लिए गैरकानूनी है. (NMC) की ओर से इसपर एडवाइजरी जारी की गई है.

NMC Order on Stem Cell Therapy: स्टेम सेल थेरेपी अब ऑटिज्म के इलाज के लिए गैरकानूनी है. नैशनल मेडिकल कमिशन यानी (NMC) की ओर से इसपर एडवाइजरी जारी की गई है. इस एडवाजरी में साफ किया गया कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के इलाज के लिए स्टेम सेल थेरेपी का इलाज अब अवैध माना जाएगा. जानकारी के लिए बता दें कि ये फैसला सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है. इसका मकसद गलत और भ्रामक इलाजों पर रोक लगाना है. खासतौर पर निजी क्लीनिकों में ऑटिज्म के “इलाज” के नाम पर बेचे जा रहे थे.

इस आदेश के अनुसार सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पताल यहां तक की रजिस्टर्ड डॉक्टरों को आदेश जारी किया गया है कि स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल अब उन बीमारियों में किया जाएगा जिन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग जैसी एजेंसियों से अनुमति प्राप्त हैं. ऑटिज्म इस सूची में शामिल नहीं है.

किन बीमारियों के लिए मान्य?

जानकारी के अनुसार ये एडवाइजरी देशभर के मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और रजिस्टर्ड डॉक्टरों तक भेजा गया है. इसमें ये साफ किया गया है कि स्टेम सेल थेरेपी अब सिर्फ 32 बीमारियों के लिए मान्य है. ये 32 बीमारियां वहीं होगी जिन्हें स्वास्थ्य प्राधिकरणों ने मंजूरी दी है. इसमें Acute Myeloid Leukemia, Multiple Sclerosis, Thalassemia, Multiple Myeloma और Aplastic Anaemia जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं.इन तय बीमारियों के अलावा किसी भी अन्य स्थिति में, खासकर ऑटिज्म जैसे न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर में, इसका इस्तेमाल गैरकानूनी माना जाएगा.

क्या है स्टेम सेल थेरेपी? | What is Stem Cell Therapy

अब जान लेते हैं कि आखिर स्टेम सेल थेरेपी है क्या? तो बता दें कि ये एक एडवांस चिकित्सा तकनीक है. इसमें शरीर की खास तरह के सेल्स का इस्तेमाल करके खराब या बीमार टिश्यू को ठीक करने की कोशिश की जाती है. आप इसे शरीर की मास्टर सेल के रूप में जान सकते हैं. जिसमें अलग-अलग तरह की सेल्स जैसे खून, मसल्स, नस में बदलने की क्षमता होती है. जो शरीर की मरम्मत और पुनर्निर्माण में सहायता करती हैं.

ICMR की सिफारिश के बाद जारी किया गया

यह निर्देश Indian Council of Medical Research (ICMR) की सिफारिशों के बाद जारी किया गया है, जिसमें स्टेम सेल थेरेपी के सही और स्वीकृत उपयोगों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि यदि इन निर्धारित बीमारियों के अलावा किसी अन्य स्थिति में इस थेरेपी का उपयोग किया जाता है, तो वह केवल सख्त निगरानी वाले रिसर्च सेटअप के तहत ही संभव होगा. ऐसे किसी भी क्लिनिकल रिसर्च के लिए Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) या स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग से आवश्यक मंजूरी लेना अनिवार्य होगा.

यह भी पढ़ें: डायबिटीज वालों के लिए बड़ा खतरा, चुपचाप खराब हो रहा है लिवर! रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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