Type 2 Diabetes Lead to Liver Fibrosis: भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है. टाइप-2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) की अगर बात की जाए तो ये आज 20 साल की उम्र के कम युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है. कई केस ऐसे भी होते हैं, जिसमें लोगों को ये मालूम नहीं होता कि वो डायबीटिज की चपेट में है. इसी कड़ी में हाल ही में The Lancet Regional Health में टाइप-2 डायबिटीज पर एक रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित हुई, जो काफी चौंकाने वाली है.
जारी हुई रिपोर्ट में टाइप-2 डायबिटीज से जुड़े एक गंभीर और अक्सर नजरअंदाज किए जाने वाले खतरे को उजागर किया है. जानकारी के अनुसार इस रिसर्च को अक्षय कुमार ने लीड किया था. जिसमें देशभर के 9,200 से भी अधिक मरीजों को शामिल किया गया. रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात सामने आई कि लगभग 26 प्रतिशत मरीजों को लिवर फाइब्रोसिस की प्रोब्लम का सामना करना पड़ रहा है.
लंबे समय तक लिवर को नुकसान
रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि लगभग 26 प्रतिशत लोगों में लिवर फाइब्रोसिस की समस्या पाई गई. जानकारी के लिए बता दें कि लिवर फाइब्रोसिस एक ऐसी कंडिशन हैं, जहां जब हमारे लिवर को लंबे समय तक नुकसान पहुंचता है, उस दौरान उसमें सख्त घाव जैसे टिश्यू बनने लगते हैं. अगर और आसान भाषा में कहें तो लिवर में बार-बार जब चोट लगती है, तो वो खुद को ठीक करने की कोशिश करता है. लेकिन इस प्रोसेस में उसमें दाग पड़ना शुरू हो जाते हैं. जब दाग पड़ते हैं, तो लिवर सख्त हो जाता है. जिसे लिवर फाइब्रोसिस कहा जाता है. आप पूछेंगे कि आखिर ये समस्या होती क्यों है तो इसका कारण है फैटी लिवर, अधिक शराब का सेवन या फिर हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के वजह से लिवर फाइब्रोसिस की शिकायद देखी जाती है.
लेकिन इस रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जो लोग टाइप-2 डायबिटीज की चपेट में हैं, उनमें भी लिवर फाइब्रोसिस की शिकायत देखी जा रही है. जानकारी के अनुसार इसमें 14 प्रतिशत लोग ऐसी कंडिशन में थे जिनमें ये कंडिशन अधिक एडवांस थी और 5 प्रतिशत करीब संभावित सिरोसिस की कंडिशन में थे. कुछेक लोगों में कोई क्लीयर लक्षण भी नहीं थे.
सिर्फ मोटापे या फिर फैटी लिवर से नहीं रहा लिंक
वहीं इस रिसर्च ने इस बात का भी खुलासा किया कि लिवर फाइब्रोसिस की समस्या अब सिर्फ मोटापे या फिर फैटी लिवर की समस्या से जुड़ा नहीं रह गया है. क्योंकि जानकारी सामने आई कि ऐसे कई लोग इसकी चपेट में थे जो मोटे थे भी नहीं या फिर उनके लिवर में फैट नहीं जमा था. ऐसे लोगों में भी लिवर फाइब्रोसिस की समस्या देखी गई. इससे ये तो साफ होता है कि केवल फैटी लिवर या फिर मोटापे को इस रिस्क के खतरे का संकेत नहीं माना जाता सकता. वहीं मोटापा, खराब कोलेस्ट्रॉल, किडनी से जुड़ी समस्याएं या फिर लंबे समय तक डायबिटीज होना इसके प्रमुख कारणों में शामिल होताजा रहा है. लेकिन जो लोग दुबले-पतले हैं उनमें बढ़ती उम्र एक बड़ा जोखिम कारक बनकर सामने आई.
समय पर जांच टाल सकता खतरा
वहीं ये रिसर्च इसलिए भी जरूरी है क्योंकि लिवर फाइब्रोसिस की ये समस्या डायबिटीज की चौथी बड़ी जटिलता के रूप को स्थापित करता है. यानी ये दिल, किडनी, आंखों की समस्याओं के साथ-साथ एक नई चिंता बनकर सामने आई है. ये संकेत इस ओर इशारा करता है कि डायबिटीज के मरीजों की देखभाल में नियमित जांच करवाना शामिल करना होगा. इसमें भी काफी अहम बात ये है कि अगर आपको लगता है कि आपके शरीर को कुछ नुकसान नहीं पहुंचा तब भी आपको रेगुलर चेकअप करवा लेना चाहिए. समय रहते जांच इस खतरे से बचाव का बेहतर तरीका है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


