Ribociclib and Abemaciclib: यहां ना सिर्फ कैंसर ही मौत का कारण बना सकता है, बल्कि कोर्ट में लंबित मामला भी व्यक्ति की मौत का कारण बन सकता है. ये बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि केरल हाई कोर्ट में साल 2022 से लंबित एक मामले ने कैंसर पीड़िता की मौत का कारण बन गया.
दरअसल केरल में एक महिला बेस्ट कैंसर से लंबे समय से जूझ रही थी, उसने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो दवाओं रिबोसिक्लिब (Ribociclib) और एबेमासिक्लिब (Abemaciclib) की कीमतों को कम करने के लिए याचिका दायर की, लेकिन 57 सुनवाई को बात भी दवाई को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं आ सका. वहीं महिला दवाओं के सस्ते होने के इंतजार ही करती रह गई और आखिर में कैंसर ने उसकी जान ले ली. बता दें कि इन दवाओं का खर्च महीने में लाखों तक पहुंच जाता है. रिबोसिक्लिब की कीमत लगभग 78,468 रुपये है तो एबेमासिक्लिब (Abemaciclib) की कीमत 47,752 रुपये से 95,504 रुपये प्रति माह के बीच है.
कई कैंसर मरीज की पहुंच से बाहर ये दो दवा
कैंसर जितनी खतरनाक बीमारी है, उतनी ही महंगी है. ऐसे में अगर ये बीमारी गरीब और आम नागरिक की पहुंच से काफी दूर है. गौरतलब है कि अगर समय पर दवा की पहुंच मरीजों तक हो तो उनकी जान बचाई जा सकती है. वहीं इन दोनों दवाओं की कीमत लाखों में जो गरीब और आम नागरिक की पहुंच से बहुत दूर है. अगर इनकी कीमत में किसी प्रकार का कोई बदलाव होता है तो कैंसर मरीजों के लिए ये किसी खुशखबरी से कम नहीं होगी.
पटेंट दवाओं होने के कारण पहुंच से बाहर
दरअसल रिबोसिक्लिब (Ribociclib) और एबेमासिक्लिब (Abemaciclib) दोनों दवा पेटेंट हैं. ये दवाएं ब्रेस्ट कैंसर के खास इलाज के लिए बेहद जरूरी हैं, लेकिन पेटेंट सुरक्षा के कारण ये कई मरीजों के लिए पहुंच से बाहर हैं. इन दवाओं की कीमते हजारों में हैं, जिसके कारण महीने में इनका खर्च लाखों में पहुंच सकता है, ऐसे में ये दवाएं कई मरीजों की पहुंच से बाहर हो जाती हैं. इन दोनों दवाओं पर पेटेंट के तहत यानि मूल कंपनियों का अधिकार है. ऐसे में दूसरी कंपनियां इन दवाओं को नहीं बना सकती और ना ही कीमतें तय कर सकती. इसलिए इनकी कीमते तय हैं. बाजार में प्रतिस्पर्धा कम रहती है और कीमतें ज्यादा बनी रहती हैं.
रिबोसिक्लिब (Ribociclib)
रिबोसिक्लिब (Ribociclib) एक टारगेटेड कैंसर दवा (CDK4/6 inhibitor) है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से HR-पॉजिटिव और HER2-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में किया जाता है. यह दवा भारत में उपलब्ध है.
एबेमासिक्लिब (Abemaciclib)
एबेमासिक्लिब (Abemaciclib) भी एक CDK4/6 inhibitor टारगेटेड थेरेपी है, जिसका उपयोग हार्मोन रिसेप्टर पॉजिटिव (HR+) और HER2-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के कुछ मरीजों में किया जाता है.
आपको बता दें कि अब यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के पास पहुंच चुका है. वहीं अब इस मामले पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत वाली बेंच शुक्रवार को सुनवाई करेगी, उम्मीद की जा रही है कि दवाईयों को लेकर कोई सकारत्मक फैसला आएगा.
अब CJI ने खुद लिया संज्ञान
मामले की जल्द सुनवाई की मांग को लेकर ज्योत्सना सिंह और केएम गोपाकुमार ने केरल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखी थी. इस चिट्ठी की कॉपी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और CJI सूर्यकांत को भी भेजी थी. इसी पर स्वतः संज्ञान लेते हुए CJI सूर्यकांत ने इसे शुक्रवार की सुनवाई के लिए लिस्ट किया है.
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