Sehat Ki Khabar Fit Rahe India: फिट रहे इंडिया में आपका स्वागत है. आज की सेहत के खबर के पहले सेगमेंट में बात करेंगे बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक रही वजन घटाने वाली दवाओं पर सरकार ने बरती सख्ती. सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट में बात करेंगे कि क्या डायबिटीज वाले मरीज गन्ने का जूस पी सकते हैं. सेहत की खबर के तीसरे सेगमेंट में जानेंगे कि हर 10 में से 6 महिलाएं मोटापे की चपेट में घिरती जा रही है. इसका क्या कारण है. ये जानेंगे आखिरी सेगमेंट में. चलिए शुरू करते हैं.
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सेहत की खबर के पहले सेगमेंट में जानेंगे बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक रही दवाओं पर सरकार की सख्ती
GLP-1 यानी वजन घटाने वाली दवाओं पर सरकार ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है. मार्केट में कई वर्जन मौजूद है. जिसके कारण बिना प्रिस्क्रिप्शन के दवाएं बिक्री पर रोक लगाई गई. अब वहीं सरकार की ओर से इसपर एडवाइजरी जारी की गई है. सरकार ने जानकारी देते हुए बताया कि बिना प्रिस्क्रिप्शन इन दवाओं का सेवन कितना नुकसानदेह साबित हो सकता है.
दरअसल GLP 1 ड्रग प्रिस्क्रिप्शन मेडिकेशन है. यानी बिना डॉक्टर की सलाह के इसे लेना खतरे को बढ़ा सकता है. ये दवाएं टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे को कम करने के लिए प्रिस्क्रिप्शन मेडिकेशन है. इस कारण सरकार की ओर से इसपर सख्ती बरती जा रही है. बाजार में बिना प्रिस्क्रिप्शन के इन दवाओं को बेचा जा रहा है.
सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट में जानेंगे क्या डायबिटीज पेशंट गन्ने का जूस पी सकते हैं?
गर्मियों का मौसम है. जगह-जगह गन्ने के जूस बिकना शुरू हो चुके हैं. जिस कारण इसका सेवन भी काफी बढ़ने वाला है. लेकिन जो लोग डायबिटीज का शिकार हैं क्या वो भी इसका सेवन कर सकते हैं? तो इसके लिए आपको पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. हर डायबिटीज पेशंट की कंडिशन अलग-अलग होती हैं. इस कारण अगर आपका डॉक्टर इसे पीने की सलाह देता है, तो आप इसका सेवन कर सकते हैं. अगर इजाजत नहीं देता तो परहेज करना ही बेहतर विकल्प साबित हो सकता है.
सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट में जानेंगे हर 10 में से 6 महिलाएं बैली फैट की समस्या से परेशान
भारत में 30 से 49 साल की हर दस में पांच-छह महिलाओं को पेट की चर्बी की समस्या है. पुरुषों से कहीं ज्यादा महिलाएं इससे जूझ रही हैं. डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड teenagers और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण.
BMI से बेहतर कमर नापना जरूरी, क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. भारत में मोटापे की परिभाषा बदल रही है क्योंकि एक्सपर्ट अब सिर्फ वेट मशीन पर दिखने वाले वजन से ही लोगों को ओवरवेट या मोटापे का शिकार नहीं मान रहे हैं, बल्कि वे अब कमर के बढ़ते साइज से भी मोटापे का पता लगा रहा है.
डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएं ‘एब्डोमिनल ओबेसिटी’ यानी पेट के मोटापे का ज्यादा शिकार हो रही हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि 30 से 49 साल की उम्र वाली 10 में से करीब 6 महिलाएं इस समस्या से घिरी हुई हैं. एक्सपर्ट्स इसे एक मेटाबॉलिक इमरजेंसी मान रहे हैं.
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