Hearing Problem: सेहत के बारे में हम अक्सर शारीरिक मानसिक और खान-पान की चीजों के बारे में ही सोचते रहते हैं. लेकिन इन दिनों एक खबर आपने जरूर सुनी, जिसके बाद आपके मन में ये सवाल जरूर उठ रहा होगा कि कानों की सेहत कैसे ठीक रखें.
दरअसल हम बात कर रहे हैं कान की सेहत के बारे में, कान की सेहत भी बहुत जरूरी है. क्योंकि जब कानों में दर्द होता है तो अस्थायी बहरापन, चक्कर आना, कान से तरल पदार्थ बहना, और जबड़े में दर्द जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. वहीं आपने मशहूर अलका याग्निक के कानों की सेहत की खबर भी जरूर सुनी होगी कि वह कान की दुर्लभ बीमारी, सेंसरी न्यूरल नर्व हियरिंग लॉस (Sensorineural Nerve Hearing Loss) से जूझ रही हैं. 2024 में एक अचानक वायरल संक्रमण के कारण उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हुई, जिसके चलते उन्होंने फिलहाल गायन से दूरी बना ली है और वह कोई नया प्रोजेक्ट नहीं ले रही हैं. इस आर्टिकल में हम बात करेंगे की कान की सेहत को कैसे ठीक रखें. चलिए जानते हैं.
इन बातों से कानों की सेहत रहेगी दुरुस्त
कान में कुछ डालना (कॉटन स्वैब्स): आपने अक्सर कई लोगों को देखा होगा कि जब किसी के कान में दर्द होता है तो वह कान में कुछ भी डाल लेते हैं. जैसे- कॉटन बड या लकड़ी. लेकिन इन चीजों को कान में डालने से कान की नाजुक नसों पर्दों को हानि हो सकती है. वहीं इंफेक्शन तक का खतरा हो सकता है. इसलिए इन चीजों को डालने से बचें.
तेज आवाज में म्यूजिक सुनना: कई मामलों में कुछ लोग बहुत तेज आवाज में गाने सुनते है. लेकिन तेज आवाज पर गाने सुनना कान के हियरिंग क्षमता को प्रभावित करते हैं. इसिलए हो सके तो तेज आवाज में बिल्कुल भी गाने न सुनें. बता दें कि तेज आवाज में गाने सुनने से अंदरूनी कान के हियरिंग सेल्स हमेशा के लिए खराब हो जाते हैं. इसलिए इस तरह की चीजों से जरूर बचे. धीमी आवाज में गाने सुनें.
हेडफोन/इयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल: आज के समय में युवा हो या बच्चा वह हेडफोन, इयरफोन जैसी चीजों को हर समय कान में लगाए रहते हैं. अगर आपको जरूरत है कि आपका काम हेडफोन या फिर इयरफोन के बिना नहीं हो सकता तो इस बात का ध्यान रखें कि एटलिस्ट उस डिवाइस में 60% से ज्यादा वॉल्यूम न रखें. क्योंकि इससे ऊपर वॉल्यूम होने पर ये आपके हियरिंग सेल्स को कमजोर कर देगी. जिससे आपके सुनने की क्षमता पर असर पड़ेगा. कई मामलों में ये परमानेंट हियरिंग लॉस का कारण बन सकता है. इसलिए हो सके तो जरूरी है 60 प्रतिशत से कम वॉल्यूम रखें या फिर इनके इस्तेमाल से बचें.
इन बातों पर भी करें अमल
सोते समय ईयरबड्स लगाकर रखना, नहाने या स्विमिंग के बाद कान ठीक से न सुखाना, वर्कआउट के दौरान हेडफोन का इस्तेमाल करना, लाउडस्पीकर के नजदीक बैठना, गलत खान-पान का जीवन में शामिल करना. बता दें कि जंक फूड खाने से, एक्सरसाइज न करना, ब्लड प्रेशर-शुगर बढ़ने से कान तक खून ठीक से नहीं पहुंचता और सुनने की क्षमता प्रभावित होती है. वहीं लंबे समय तक का तनाव कान तक खून का फ्लो कम करता है और टिनिटस (कान में घंटी बजना) जैसी समस्या पैदा करता है. इसलिए इन बातों पर भी साथ की साथ अमल करें.
यह भी पढ़ें: अब स्ट्रेस-एंग्जाइटी मिनटों में होगी दूर, ब्लू माइंड थेरेपी बनेगा मददगार
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


