Smartphone Eating Disorder: मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने पर सिर्फ हमारी आंखें खराब होती है? यानी आंखें थकती है? क्या आप भी ऐसा ही सोचते हैं. हालांकि आप सही सोच रहे हैं. लेकिन इसके साथ-साथ मोबाइल आपके खाने-पीने की आदतों को भी बदल रहा है. उन्हें नुकसान पहुंचा रहा है. जर्नल ऑफ मेडिकल इंटरनेट रिसर्च के अनुसार बेहद चिंताजनक है.
ये एक खतरे की बीमारी की ओर इशारा करता है. जानकारी के अनुसार जो लोग अधिक समय तक स्मार्टफोन पर चिपके रहते हैं, ऐसे युवाओं में ईटिंग डिसऑर्डर और उनके लक्षण तेजी से देखने को मिल रहे हैं. रिसर्च बताती है कि जो लोग घंटों अपना समय सिर्फ फोन पर बिताते हैं, उन्हें मानसिक रूप से अधिक परेशान रहते है.
अधिक परेशान रहते हैं ऐसे युवा
जानकारी के अनुसार ऐसे युवा अधिक परेशान रहते हैं. उन्हें सैटिस्फैक्शन की कमी देखी जा रही है. नतीजा स्ट्रेस में आकर वो ज्यादा खाने लगते हैं और अपने खाने-पीने पर कंट्रोल नहीं रख पाते इस तरह खाने पीने का कंट्रोल खत्म हो जाता है. हालांकि साइंटिस्ट ने ये भी कहा कि स्मार्टफोन सीधे तौर पर इस बीमारी का कारण नहीं है. लेकिन ये ही इस बीमारी को ट्रिगर करता है. इस बीमारी का बड़ा कारण जरूर बन गया है.
इतने लोगों को किया गया शामिल
बताया गया कि इस रिसर्च में 52 हजार से भी ज्यादा लोगों को शामिल किया गया है. रिसर्च और आंकड़ों से पता चलता है कि रोजाना 7 घंटे से ज्यादा फोन का इस्तेमाल करते हैं उनमें ईटिंग डिसऑर्डर का खतरा अधिक रहता है. ऐसे लोग भूख की समस्या को कंट्रोल नहीं कर पाते, अधिक खाना खाने लगते हैं. यही आदतें खाने की लत में कंवर्ट हो जाती हैं. अब ये समस्या काफी आम होती जा रही हैं.
क्या है इसके पीछे का कारण
अब जान लेते हैं कि आखिर ऐसा हो क्यों हो रहा है. तो सोशल मीडिया इसका कारण बताया जा रहा है. दरअसल जब युवा दूसरों की परफेक्ट या फिर आदर्श लाइफ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खोजते हैं, तो जानें अनजाने में अपने शरीर की तुलना उन्हीं तस्वीरों से करना शुरू करने लगते हैं. इस तरह उनके मन में बिना किसी कारण अपने आपको फिट रखने की हीन भावना और स्ट्रेस पैदा होता है. यही उनकी स्ट्रेस और डाइट की आदत में भी बदल जाता है.
वहीं रिसर्च में ये भी खुलासा हुआ कि इसका असर टीनएज बच्चों पर ज्यादा पढ़ रहा है. इसका भी कारण है, उनका जीवन एक ऐसे अहम पड़ाव पर है जहां एक इंसान खुद की पहचान और सेल्फ इमेज बनाने की जद्दोजहद में लगो होता है. वहीं इस बीच लगातार फोन का इस्तेमाल दूसरों की तुलना में फिजीकली और मेंटली स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन रही है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प बिल्कुल भी न मानें. अगर आप किसी समस्या से जूझ रहें हैं तो किसी एक्सपर्ट्स या डॉक्टर से सलाह जरूर लें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


