SUP Plastic Ban: देशभर में सिंगल यूज़ प्लास्टिक (SUP) पर प्रतिबंध लागू हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत अब भी चिंता बढ़ाने वाली है. एक हालिया अध्ययन ने खुलासा किया है कि प्रतिबंध के बावजूद देश के कई बड़े शहरों में बैन किए गए प्लास्टिक उत्पाद खुलेआम इस्तेमाल और बिक्री में बने हुए हैं. यह स्थिति न केवल नियमों के कमजोर पालन को दर्शाती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी चुनौती भी पेश करती है.
पर्यावरण संगठन Toxics Link की रिपोर्ट “Revisiting Single Use Plastic Ban” के अनुसार, दिल्ली, मुंबई, गुवाहाटी और भुवनेश्वर के 560 स्थानों में से 84% जगहों पर प्रतिबंधित सिंगल यूज़ प्लास्टिक उत्पाद मिल रहे हैं. यह सर्वे अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच किया गया, जिसमें स्ट्रीट वेंडर्स, जूस स्टॉल, छोटे रेस्टोरेंट, बाजार, धार्मिक स्थल, रेलवे प्लेटफॉर्म और बड़े रिटेल आउटलेट्स को शामिल किया गया.
प्लास्टिक में मिलते कई केमिकल्स
प्लास्टिक को बैन करने के पीछे का मुख्य कारण इसमें मौजूद कैमिकल्स होते हैं. जानकारी के लिए बता दें कि प्लास्टिक में 16 हजार से अधिक प्रकार के कैमिकल्स मौजूद हो सकते हैं. इसमें 4,200 से भी अधिक ऐसे हैं जो हमारे लिए काफी खतरनाक हो सकते हैं. ऐसे में आप ये सोचिए कि स्ट्रीट वेंडर्स से लेकर कई कंपनियां जब इसका इस्तेमाल करती हैं, तो ये हमारी सेहत के लिए कितना नुकसानदेह सकता है.
अगर आप पूछेंगे कि कौन से कैमिकल्स प्लास्टिक में मौजूद होते हैं, तो इनमें बिस्फेनॉल (BPA), थैलेट्स (Phthalates), भारी धातुएं (Heavy Metals), अग्निरोधी (Flame Retardants), और फ्लोरीनयुक्त यौगिक (Fluorinated compounds) शामिल होते हैं. ये कैमिकल प्लास्टिक खाने-पीने की चीजों के साथ मिक्स हो सकते हैं. जिससे कई तरह की प्रॉब्लम्स और कमी यहां तक की कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है.
कहां इस्तेमाल हो रहे बैन हुए प्लास्टिक
अब ये जानना भी बहुत जरूरी है कि आखिर ये बैन हुए प्लास्टिक का इस्तेमाल कहां हो रहा है. रिसर्च के अनुसार ये प्लास्टिक का इस्तेमाल पतले प्लास्टिक बैग, डिस्पोजेबल कप, प्लेट, स्ट्रॉ और कटलहरी छोटे बाजारों और कटलरी छोटे बाजारों और दुकानों में आमतौर पर मिल रहे हैं. जानकारी के अनुसार सबसे अधिक इस्तेमाल स्ट्रीट फूड वेंडर्स, जूस वाले, सब्जी वाले या फिर स्थानिय दुकानदार इसका अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं.
अगर आप सोच रहे हैं कि मॉल या फिर बड़े स्टोर्स सेफ हैं तो सही है. क्योंकि ग्राहक की मांग इस सेक्टर में नियमों का पालन देखा गया है. लेकिन रिटेल में अक्सर ये समस्या आती है कि दुकानदारों से ग्राहक की प्लास्टिक बैग्स की मांग करते हैं. जिसके कारण उनके पास कोई ऑप्शन नहीं बचता क्योंकि अगर इसके कई ऑप्शन रखेंगे तो वो कीमत में बदलाव लाना पड़ सकता है. जिसके कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
क्या मार्केट में कोई ऑप्शन नहीं?
सवाल आता है कि क्या मार्केट में इसका कोई विकल्प नहीं तो इसका जवाब है कि है जैसे पेपर कप प्लेट, लकड़ी के कटलरी, कपड़े के बैग, स्टील के बर्तन और मोटे प्लास्टिक बैग जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन अभी भी इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा. कुछ लोग करते हैं लेकिन कुछ लोग इसका इस्तेमाल करने से बचते हैं. कुछ ग्राहक डिस्पोजेबल चीजों को अधिक साफ सुथरा मानते हैं, लेकिन ये एक बड़ी समस्या है. हालांकि रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ दुकानदार ही नहीं सप्लाई चेन भी जिम्मेदार है. बैन होनेके बाद भी इसका प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन जारी है. जिसके कारण ये आसानी से बाजारों में उपलब्ध हो रहा है. साथ ही, लोगों में इसके नुकसान को लेकर जागरूकता भी कम है.
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