World Kidney Day 2026: हर साल 12 मार्च को वर्ल्ड किडनी डे (World Kidney Day) के रूप में मनाया जाता है. देशभर में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मामले बढ़ते जा रहे हैं.
ये बीमारी इतनी आम हो चुकी है कि इसे आम क्रॉनिक बीमारियों की लिस्ट में गिना जाता है. डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का किडनी पर गहरा असर पड़ता है. वो भी एक नहीं दोनों. क्योंकि 12 मार्च को वर्ल्ड किडनी डे सेलिब्रेट किया जाता है, इसलिए आज के दिन किडनी से जुड़ी सदस्याओं के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाई जाती है. आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से किडनी पर क्या असर पड़ता है? ये कितनी गंभीर हो सकती है.
हमारी बॉडी का नेचुरल फिल्टर है किडनी
क्या आप जानते हैं कि हमारी किडनी शरीर के लिए नेचुरल फिल्टर की तरह काम करती है. ये हमारे शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है. इतना ही नहीं हमारे ब्लड प्रेशर या फिर शुगर को भी कंट्रोल्ड रखने में। किडनी हमारी काफी हेल्प करती है
हालांकि कुछ लोगों को ब्लड प्रेशर, शुगर की समस्या ज्यादा समय तक रहती है, जो हमारी किडनी की नाजुक ब्लड वेसल्स को डैमेज करने लगती हैं. जब ऐसी कंडीशन होने लगे तो व्यक्ति को क्रॉनिक किसने डिज़ीज (CKD) का खतरा अधिक बढ़ने लगता है. लेकिन आप इस से बचाव कर सकते हैं कैसे आइए जानते हैं.
करोड़ों लोगों पर असर डालती है ये समस्या
WHO के अनुसार कॉर्निक किडनी डिजीज दुनियाभर में करोड़ों लोगों पर असर डालती है. यानी इस से परेशान होने वालों की संख्या करोड़ों में है. इसका कनेक्शन पूछेंगे तो डायबिटीज है फिर हाइपरटेंशन जैसे मेटाबॉलिक विकारों में से एक हैं.
क्या है इस बीमारी के शुरुआती लक्षण
बात करें इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों के बारे में तो अक्सर शुरुआती स्टेज में इसके कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, जिस कारण जब यह बढ़ जाती है तो समस्या और भी गंभीर होने लगती है. कई मामलों में इसी कारण किडनी डैमेज का काफी देरी से पता चलता है.
डॉक्टरों का कहना है कि ये बीमारियां किडनी तक खून पहुंचने वाली आर्टरीज को भी नुकसान पहुंचना सकती है. इसका नतीजा हमारा ब्लड फ्लो कम हो जाता है. हमारे किडनी के काम करने की क्षमता भी काफी प्रभावित होती है.
इसका सबसे बड़ा कारण क्या है?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दुनियाभर में होने वाली कॉर्निक डिजीज का सबसे बड़ा कारण डायबिटीज है. दूसरे नंबर पर हाई ब्लड प्रेशर आता है. क्योंकि यही दोनों चीजें हमारे शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और बैलेंस बनाए रखने में हमारी मदद करती है. इसलिए ये उनकी क्षमता को और भी कम कर देती है.
हमारी किडनी पर कैसे असर डालती है डायबिटीज
आपको बता दें कि डायबिटीज से होने वाली समस्या को डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है. लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से किडनी के फिल्टरिंग यूनिट्स को नुकसान होने लगता है. जब ऐसी बीमारी होती है तो कुछ प्रॉब्लम्स जैसे पेशाब में प्रोटीन का रिसाव, किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम होना, धीरे-धीरे हमारा किडनी फंक्शन कमजोर होना जैसी समस्या होने लगती हैं.
वहीं रिपोर्ट्स बताती हैं कि डायबिटीज से परेशान हर तीन में से एक व्यक्ति को क्रॉनिक डिज़ीज का खतरा हो सकता है. इसके शुरुवाती दौर में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते. लेकिन जब किडनी के काम करनी क्षमता कम होने लगे तो लक्षण दिखाई देते सकते हैं. जैसे लगातार थकान, पैरों या टखनों में सूजन, पेशाब की आदतों में बदलाव.
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Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


