Chips Affect on Memory: पैकेट बंद स्नैक्स हमारी डेली लाइफ का एक हिस्सा बन चुके हैं. रोजाना ऑफिस में घर में जब कभी भूख लगे तो लोग पैकेट वाले चिप्स का सेवन कर लेते हैं. शाम की चाय के साथ खाने के लिए, हल्कि भूख लगे तो सेवन किया, बिस्किट, या फिर इंस्टैंट नूडल्स, नूडल्स का सेवन कुछ लोग ऑफिस में भी करते हैं. ऐसा मानना है कि इनसे कुछ नुकसान नहीं होता. जिसके चलते रोजाना इन्हें खाते हैं.
अब इसपर एक नई रिसर्च हुई है. ये रिसर्च काफी चौंकाने वाली है. पिछले काफी समय से अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स जैसे चिप्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेट वाले स्नैक्स हमारी मेंटल हेल्थ पर काफी बुरा असर डालते हैं. इसपर एक रिसर्च सामने आई जिसमें खुलासा हुआ कि अगर आप भी रोजाना इस तरह के फूड्स का सेवन करते हैं, तो ये आपकी मेमोरी कमजोर होने का कारण बन सकता है. आपके फोकस में कमी आने की समस्या हो सकती है. आपको डिमेंशिया का भी खतरा अधिक बढ़ सकता है. यानी अभी अपनाया हुआ ऐसा लाइफस्टाइल आपके फ्यूचर हेल्थ पर काफी अफेक्ट डालता है.
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड क्या होता है
आसान भाषा में कहा जाए तो पैकेट वाले फूड्स. जिनमें अधिक मात्रा में नमक, शुगर प्रिजर्वेटिव यानी कैमिकल्स और स्वाद लाने के लिए आर्टिफिशियल फ्लेवर यानी (नकली फ्लेवर) शामिल किए जाते हैं. ऐसे फूड्स फैक्ट्रीयों में तैयार किए जाते हैं. उसी को अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स कहा जाता है.
इनमें कौन-कौन से प्रोडक्ट्स शामिल होते हैं अगर उनकी बात की जाए तो उनमें चिप्स, पैकेट वाले बिस्किट, इंस्टेंट नूडल्स, शुगरी सीरियल्स, प्रोसेस्ड मीट या फिर सॉफ्ट ड्रिंक्स ये कुछ उदहारण है जिनसे आप समझ सकते हैं कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की कैटेगरी में कौन से खाने शामिल होते हैं. स्वाद के लिए लोग इसे खाते हैं. क्योंकि नकली फ्लेवर्स एड होते हैं जिनके कारण इन्हें टेस्टी बनाया जाता है. पर ये हेल्थ पर बुरा असर डाल रहे हैं. खासतौर पर हमारी बॉडी और दिमाग पर अफेक्ट कर रहे हैं ऐसा खाना.
यादाश्त हो जाती कमजोर?
ऐसे खाने पर मोनाश यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने इसपर रिसर्च की और रिपोर्ट पेश की. जानकारी के अनुसार ये रिपोर्ट जर्नल अल्जाइमर्स एंड डिमेंशियाः डायग्नोसिस, असेसमेंट एंड डिजीज मॉनिटरिंग पर भी पब्लिश की जा चुकी है. रिपोर्ट बताती है कि जो लोग अपनी डाइट में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का सेवन अधिक मात्रा में करते थे उनमें याददाश्त और सोचने समझने की क्षमता में कमी देखी जाती है. यानी उनकी यादादश्त और सोचने समझने की शक्ति कमजोर होने लगती है.
रिसर्च बाती है कि कोई व्यक्ति अगर अपनी डाइट में सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा भी ऐसे फूड्स में लगा दे रहा है. तो ये पैकेट चिप्स के बराबर ही माना जाता है. खासतौर पर उनमें डिमेंशिया का खतरा अधिक बढ़ जाता है. हैरानी की बात है कि खतरा धीरे-धरे बढ़ता जा रहा है. उन लोगों में जो जंक फूड का सेवन करते हैं उनमें अधिक रिस्क रहता है.
दिमाग पर पड़ता है असर
अब रिसर्चर्स का कहना है कि अलट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स बॉडी में सूजन बढ़ा देते हैं. इसका असर हमारे माइंड पर पड़ता है. खासतौर पर जरूरी पोषक तत्व कम होते हैं और अनहेल्दी फैट्स अधिक होते हैं. स्टडी ये भी बताती है कि ऐसे लोगों में फोकस करने में काफी परेशानी होती है. मानसिक प्रतिक्रिया काफी स्लो हो जाती है. हालांकि कुछ बदलाव काफी छोटे लगते हैं. लेकिन अगर लंबे समय तक ऐसे ही लक्षण दिखाई दे तो ये गंभीर न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम बन सकती हैं.
फल-सब्जियों से नहीं चलेगा काम
कुछ लोगों का कहना है कि आप हेल्दी चीजें खाते हैं. यानी फल-सब्जी का सेवन करते हैं, तो उन्हें खतरा अधिक नहीं होता, वो लोग पैकेट वाले स्नैक्स खा सकते हैं. कुछ लोग ऐसे खा भी लेते हैं. लेकिन अगर हेल्दी चीजें खाते हैं तो आपका काम नहीं चलेगा. दरअसल जंक फूड्स और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन करने से कम मात्रा करना भी जरूरी है. यानी क्या खा रहे हैं के साथ क्या नहीं खा रहे यह भी उतना ही अहम है.
ऐसे कम करें चिप्स खाना
हालांकि अचानक जंक फूड्स का छोड़ देना किसी के लिए भी आसान नहीं होता. लेकिन आप धीरे-धीरे इसे कम कर सकते हैं. इसकी मात्रा कम करते हुए आप इसे कम कर सकते हैं. आप चिप्स की जगह ऐसी चीजों का सेवन करें जो फायदा दिलाए जैसे फल, ड्राई फ्रूट्स. इन सभी का सेवन करने से एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसी तरह के छोटे बदलाव से आपके शरीर और दीमाग दोनों को फायदा पहुंचा सकते हैं.
यह भी पढ़ें: बदलता मौसम कर रहा बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़! ऐसे रखें ध्यान
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं. )

