Sehat Ki Khabar Fit Rahe India: नमस्कार फिट रहे इंडिया की लेटेस्ट अपडेट में आपका स्वागत है. भारत और जापान के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने के लिए दिल्ली में बैठक हुई. इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के पहले सेगमेंट में. चूहों के इंफेक्शन से हुई 3 लोगों की मौत इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट में. हर 10 में से 1 बच्चा न सोने की समस्या का शिकार हो रहा है. क्या है इसका कारण. इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के तीसरे और आखिरी सेगमेंट में चलिए शुरू करते हैं.
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पहले सेगमेंट में जानेंगे भारत-जापान के बीच हुई पार्टनरशिप
भारत और जापान के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने के लिए नई दिल्ली के भारत मंडपम में तीसरी संयुक्त समिति (Joint Committee Meeting) की बैठक आयोजित हुई. इस बैठक की अध्यक्षता भारत के स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और जापान की हेल्थ पॉलिसी मंत्री किमी ओनोडा ने मिलकर की.
बैठक की शुरुआत में स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि भारत और जापान के रिश्ते भरोसे और आपसी समझ पर आधारित हैं. यह बैठक दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में नए सहयोग के रास्ते खोलने का एक अहम मंच है. इस दौरान जेपी नड्डा ने कहा कि भारत और जापान मिलकर अपने हेल्थ सिस्टम को मजबूत करना, लोगों तक बेहतर इलाज पहुंचाना और नई तकनीकों को बढ़ावा देना चाहते हैं. उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि भारत सभी के लिए बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रतिबद्ध है. जापान की मंत्री किमी ओनोडा ने भी कहा कि उनका देश तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन के जरिए भारत के साथ हेल्थ सेक्टर में सहयोग को आगे बढ़ाता रहेगा.
दूसरे सेगमेंट में जानेंगे हंतावायरस से तीन लोगों की मौत
कोरोना के बाद एक नए वायरस ने तेजी से अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है. इस वायरस का नाम है हंतावायस है. जानकारी के मुताबिक अब तक इस वायरस से तीन लोगों की मौत हो गई. बताया गया कि तीनों मृतक अटलांटिक महासागर में एक क्रूज जहाज पर थे. जहां संदिग्ध प्रकोप से तीनों की जान चली गई. मामला सामने आते ही एक्सपर्ट्स इसकी जांच में जुट गए हैं. अब ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर ये वायरस क्या है. कितना खतरनाक है. एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में कैसे फैलता है.
कोरोनावायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में तेजी से फैलता था. लेकिन ये ऐसा नहीं है. ये इंसानों से नहीं बल्कि चूहों द्वारा मचाई गई गंदगी से फैलता है. हालांकि ये बात सुनकर काफी हैरानी होगी कि आखिर चूहों से कैसे बीमारी फैल सकती है, तो बता दें कि अगर आपके घर या फिर आपके आसपास कहीं अधिक चूहें हैं, तो अलर्ट हो जाइए.
हैरानी होगी कि ये वायरस चूहों में पहले ही मौजूद होता है. जब चूहे घर में पेशाब, पॉटी करते हैं तो वो सूख जाते हैं और धूल बनकर हवा में उड़ने लगते हैं. अब किसी हवा के जरिए या फिर साफ-सफाई करते समय जब उसी जगह की धूल उड़ती है और शरीर के अंदर जाती है तो ये हमें बीमार बना देती है. इतना ही नहीं चूहों के काटने या फिर उनके झूठा खाने खाने से भी ये वायरस तेजी से फैलता है.
इस वायरस के कारण की बात की जाए तो साफ है गंदगी. साथ ही उस गंदगी में चूहों का होना. जहां साफ-सफाई नहीं है, गंदगी अधिक होगी और वहां चूहें भी है तो ये वायरस होने की संभावना है. खासतौर पर ऐसी जगहें जैसे पुराना कबाड़ जहां हो, गोदाम हो ऐसी जगहों पर अक्सर चूहें आते-जाते रहते हैं. ऐसी जगहों पर अधिक खतरा रहता है. इस कारण अगर ऐसी किसी जगह पर जाएं तो मास्क लगाएं और फिर साफ करना सही साबित हो सकता है. बिना मास्क के साफ-सफाई करना बीमारी को दावत देना हो सकता है.
तीसरे सेगमेंट में जानेंगे हर 10 में से एक बच्चा इस कंडिशन का शिकार
कई पेरेंट्स अपने बच्चों को बिजी रखने के लिए मोबाइल फोन हाथ में थमा देते हैं. लेकिन ये आदत उनपर काफी असर डालती है. दरअसल इसपर एक रिसर्च सामने आई और जानकारी दी गई कि हर 10 में से एक बच्चा स्क्रीन देखते हुए सोता है. जो गंभीर लक्षणों की ओर इशारा करता है. अगर आपके भी बच्चे का ऐसा ही बिहेवियर है तो उसे सुधारिए.
जानकारी के मुताबिक ये रिसर्च एस्टन यूनिवर्सिटी और अन्य ब्रिटिश यूनिवर्सिटी द्वारा की गई है. उन्हीं की रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है. अब ऐसे में वो पेरेंट्स भी इस रिसर्च पर विश्वास करेंगे जो अपने बच्चों को बिजी रखने के लिए मोबाइल फोन थमा देते हैं. पहले के समय में लोग बच्चों का स्क्रीन टाइम कम रखते थे. लेकिन आज के समय में बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी अधिक हो चुका है. नतीजा बच्चे शाम को दोस्तों के साथ भी खेलने बाहर नहीं निकलते. जिससे उनकी पर्सनालिटी पर भी गहरा असर पड़ रहा है. रिसर्च में भी जानकारी आई कि ये आदत बच्चों की हेल्थ के लिए सही नहीं है.
वहीं ये आदत ये दर्शाता है कि बच्चे धीरे-धीरे डिजिटल जुड़ाव की ओर बढ़ रहे हैं. रिसर्च में जिंदगी के शुरुआती ‘1001 महत्वपूर्ण दिनों’ (गर्भावस्था से दो साल की उम्र तक) का विशेष महत्व बताया गया है, जो कि शिशु के मानसिक-शारीरिक विकास के लिए जरूरी है. वहीं रिसर्चर्स के अनुसार बच्चों का माइंड दुनिया के साथ अपने एक्सपीरिएंस बातचीत के आधार पर हरेक सेकंड दस लाख नए कनेक्शन बनाता है.
दरअसल जब बच्चे स्क्रीन के साथ अधिक जुड़ते हैं, तो ये उनके डेवलपमेंट में असर डालता है. वहीं स्क्रीन में अधिक समय बिताने से बच्चों को मोटापा, मायोपिया यानी पास के विजन में कमजोरी, नींद की कमी, बिहेवियर चेंज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. रिसर्च में भी ये कंफर्म हुआ है कि स्क्रीन में अधिक समय बिताने से कई तरह के फिजिकल चैलेंज और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
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