AI Assisted Surgery Craniopagus Twins: नाइजीरिया में दो सगी बहनों का जन्म हुआ. एक का नाम रखा गया गुडनेस तो दूसरी का नाम मर्सी. वहीं ये दोनों ट्विंस बहनों के जन्म से ही सिर एक दूसरे के साथ जुड़े हुए थे. यानी अलग नहीं हो सकते थे. लेकिन डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है और टेक्नोलॉजी में भी आज दुनिया कई दूर निकल चुकी है.
धरती के भगवान और टेक्नोलॉजी का साथ मिला और दोनों बहनों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से दोनों बहनों का सिर अलग कर दिखाया है जो एक बड़ा चमत्कार है. इस घटना ने कई लोगों को हैरान कर दिया है. अब सवाल ये है कि आखिर ये समस्या क्यों होती है? आइए इसके बारे में जानते हैं.
इस कंडिशन के कारण दोनों के सिर जुड़े थे
जब जन्म से ही ट्विंस के सिर आपस में जुड़े हुए हो तो इस कंडिशन को कहा जाता है क्रैनियोपैगस ट्विंस. सरल भाषा में यही कहा जाता है कि दोनों के सिर आपस में जुड़े हुए हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन दोनों के दीमाग की कुछ हिस्से की नस और खून की नस आपस में जुड़ी थी. डॉक्टर्स मानते हैं कि दुनियाभर में ऐसे मामले काफी कम देखने को मिलते हैं. आंकड़ा बताता है कि हर 25 लाख बच्चों के जन्म में से किसी एक में ये समस्या देखने को मिल सकती है. यानी ये एक रेयर कंडिशन है. जानकारी है कि गुडनेस और मर्सी का जन्म साल 2023 में जून महीने में हुआ था.
इस संस्था ने उठाया पूरा खर्च
बात करें कि आखिर बच्चों का इलाज कैसे संभव हो पाया तो इसका जवाब है वो छटा महीना जब ये दोनों बच्चियां छटे महीने की थी. उस दौरान दोनों के माता-पिता की मुलाकात लंदन के मशहूर ग्रेट ऑर्मेंड स्ट्रीट हॉस्टिपटल के डॉक्टर जिनका नाम था डॉक्टर नूर उल ओवैस जिलानी से हुई. ये वो डॉक्टर थे जो जेमिनी अनट्वाइंड नाम की एक संस्था चलाते हैं. ये संस्था ऐसे बच्चों की मदद करती है जिनके सिर जुड़े हो, उन्हें अलग करने का काम यही संस्था करती है. इस संस्था ने दोनों को लंदन बुलाया और उनके पूरे इलाज का खर्च उठाने का फैसला लिया.
40 घंटे का समय और 4 बड़े ऑपरेशन
अब साल 2025 में इन बच्चियों के सिर को अलग करने का काम शुरू किया गया. ये काफी मुश्किल था और मेडिकल हिस्ट्री में सबसे मुश्किल ऑपरेशनों में से भी एक था. क्योंकि इन दोनों बहनों को अलग करने के लिए कुल समय 4 महीने और 4 बड़े ऑपरेशन करवाने पड़े. ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों ने कुल 40 घंटे बिताए.
60 से अधिक एक्सपर्ट्स ने किया इलाज
हैरानी की बात ये है कि इस मिशन को सफल बनाने के लिए 20 अलग देश और 60 से ज्यादा मेडिकल एक्सपर्ट्स शामिल थे. ऑपरेशन को सुरक्षित बनाने के लिए डॉक्टरों ने AI, VR और 3D मॉडलिंग जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया था. इन्हीं सब तकनीकों की मदद से डॉक्टरों ने ऑपरेशन थिएटर जाने से पहले ही इन बच्चियों का दिमाग और उनकी नसों का एक डिजिटल मैप तैयार किया था. जिससे की उनसे कोई गलती न हो.
कैसी है दोनों की तबियत?
इस मुश्किल सर्जरी के बाद अगर बात करें कि आखिर कैसी है दोनों बच्चियों की तबियत तो फिलहाल दोनों तेजी से ठीक हुई और अपने परिवार के साथ वापस नाइजीरिया भी लौट चुकी हैं. अच्छे से खेल कूद भी पा रही हैं और एक नॉर्मल लाइफ भी जी रही हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

