AIIMS Study On Autism: आजकल बच्चे अपने माता-पिता के साथ कम और अपने फोन पर अधिक समय बिताते हैं. खिलौनों की जगह अब टीवी रिमोट या फिर स्मार्टफोन ने ले ली है. नतीजा बच्चों के डेवलपमेंट में बिहेवियर में काफी असर पड़ता दिखाई दे रहा है. इसपर पहले से कई चेतावनी जारी की जा रही है. लेकिन हाल ही में AIIMS ने भी एक स्टडी रिपोर्ट जारी की थी. जिसमें कई बड़े खुलासे किए गए.
रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मोबाइल के इस्तेमाल से अधिक स्क्रीन टाइम से बच्चों में ऑटिज्म का रिस्क अधिक बढ़ जाता है. खासतौर पर उन बच्चों में जिनकी उम्र 3 साल से कम है. ऐसे बच्चों पर इसका असर अधिक पड़ता है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बात की जानकारी भी दी गई थी अब ऐसे में ये जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि आखिर ऑटिज्म के लक्षण क्या हैं.
AIIMS की स्टडी में हुआ खुलासा
जानकारी के मुताबिक इस स्टडी में 250 बच्चों को शामिल किया गया था. इन बच्चों में तीन से 6 साल के AGE ग्रुप के बच्चे शामिल थे. अब इन बच्चों में एनालाइस किया गया कि जो बच्चे शुरुआत से बहुत अधिक मोबाइल फोन, टीवी, या फिर लैपटॉप ऐसे किसी गैजेट्स का इस्तेमाल कर रहे थे. जिनसे उनका स्क्रीन टाइम बढ़ रहा था. इन 250 में से 150 बच्चे ऐसे थे जिन्हें ऑटिज्म के लक्षण दिखें.
100 बच्चे ऐसे थे जिनकी ग्रोथ नॉर्मल थी. हालांकि ये भी पूरी तरह साबित नहीं हुआ कि स्क्रीन टाइम अधिक हुआ तो ऑटिज्म हो जाएगा. यही ऑटिज्म का कारण बन जाएगा. यानी सीधे तौर पर फिलहाल ये स्पष्ट नहीं हुआ. लेकिन जो लक्षण सामने आए उन्हें देखते हुए इसका रिस्क और खतरा अधिक बताया गया. ऐसे में आपको लक्षणों की पहचान करना बहुत जरूरी हो जाता है.
क्या है ऑटिज्म के लक्षण? Symptoms of Autism
ऑटिज्म के लक्षणों की बात की जाए तो इसमें सबसे मुख्य लक्षण यही होता है कि अगर 9 महीने तक बच्चे का जब नाम लिया जा रहा है और वो उसपर रिएक्ट नगीं कर रहा, 12 महीने तक बच्चा किसी से आंखें मिलाते हुए कॉन्टैक्ट नहीं कर रहा, 15 से 18 महीने तक बच्चे अपनी पसंद की चीजें दूसरों को न देना, दो साल तक के बच्चे का दूसरे के दर्द या इमोशन्स को न समझना, चार से पांच साल का बच्चा गाना न गा पाना, डांस न कर पाना, एक्टिंग भी करने में काफी दिक्कत होना. एक ही चीज को बार-बार दोहराना. यही छोटे-छोटे कुछ बदलाव हैं जो ऑटिज्म को बढ़ावा देते हैं. किसी भी भाषा को सीखने में देरी होना. अधिक चिड़चिड़ा होना.
क्या है इसका कारण
इसके कारणों की अगर बात की जाए तो सबसे बड़ा कारण है स्क्रीन टाइम. स्टडी में खुलासा हुआ कि तीन साल से कम उम्र वाले बच्चों का माइंड डेवलपमेंट काफी तेजी से होता है. ऐसे में अगर बच्चे अधिक समय तक स्क्रीन या फिर मोबाइल फोन में ही लगे रहते हैं, तो उन्हें काफी परेशानी जैसे बात करने में, खेलने में, आंखें न मिलाना. इस तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कई चीजें सीखने में उन्हें दिक्कत हो सकती है. दरअसल जो बच्चा देखता है वही सुनता है और उसे ही बोलने की कोशिश करता है.
ऐसे में अगर आप उसके साथ अधिक समय न बिता कर उसे चीजें नहीं सिखाएंगे और उसे मोबाइल फोन पकड़ा देंगे तो ये उनके मानसिक विकास में बाधा बन सकता है. लगातार फोन में ही लगे रहने से उनकी लत बढ़ जाएगी. इमोशनली काफी वीक हो जाएंगे. उनमें फीलिंग्स की कमी हो सकती है. साथ ही आंखों पर असर पड़ेगा. क्योंकि मोबाइल से निकलने वाली रोशनी हमारी आंखों पर असर डालती है. साथ ही ये मेलोटोनिन जैसे हार्मोन को पर भी असर डालती है.
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