Army Officer Wife Heart Donation: भारतीय सेना अधिकारी की पत्नी ने अंग दान कर मासूम की जिंदगी बचाई. दरअसल 2 मई 2026 को कमांड हॉस्पिटल, चंडीमंदिर, पंचकूला में सेना अधिकारी की पत्नी का ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया. ऐसे में अधिकारी ने अपनी दो युवा बेटियों की सहमति से पत्नी के अंगदान करने की सहमति बनाई.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा के पंचकूला स्थित कमांड अस्पताल, चंडीमदिंर छावनी में 41 वर्षीय महिला को गंभीर ब्रेन हेमरेज के बाद भर्ती कराया गया था. तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके और 2 मई को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर किया गया. इसके बाद उनके पति, जो भारतीय सेना में सेवारत अधिकारी हैं, और उनकी दो बेटियों ने बेहद साहसिक फैसला लेते हुए अंगदान की सहमति बनाई गई.
14 साल के बच्चे को मिली नई जिंदगी | Heart Transplant
अंगदान की सहमति के बाद महिला का हार्ट इंदप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली लाया गया. जहां ‘एंड-स्टेज हार्ट फेलियर’ से पीड़ित मासूम में सफलतापूर्वक हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया. बच्चा डॉक्टर की विशेष निगरानी में रखा गया है.
महिला अधिकारी के अंगदान से बच्चों को नई जिंदगी मिली है. कहा जा रहा है कि बच्चे की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे हर महीने अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता था. डॉक्टरों का कहना था हार्ट ट्रांसप्लांट से ही उसकी जान बचाई जा सकती है. बच्चे का नाम दो महीने पहले राष्ट्रीय अंग एंव टिशु ट्रांसप्लांट संगठन में दर्ज कराया गया था. ऐसे में सेना अधिकारी की पत्नी का अंगदान मासूम के लिए नई जिंगदी लेकर आया है.
सिर्फ 20 मिनट में अस्पताल पहुंचा अंग
यह कार्यवाही तेजी से की गई जिसमें अंग को लाने के लिए प्राइवेट जेट का प्रयोग किया गया. पूरी प्रक्रिया में हरियाणा ट्रैफिक पुलिस, पंजाब ट्रैफिक पुलिस और चंडीगढ़ में एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया सभी की मदद से काम को तेजी से अंजाम दिया गया.
वहीं दिल्ली में बदरपुर के ट्रैफिक इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने एयरपोर्ट से इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल तक एक ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाने का काम देखा, जिससे अंग को सिर्फ 20 मिनट में पहुंचाना संभव हो पाया. चंडीगढ़ के कमांड हॉस्पिटल के कर्नल अनुराग गर्ग को उनके नेतृत्व और तालमेल के लिए खास पहचान मिली, जिससे अंग दान और ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया सफल हो पाई.
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