Autoimmune Disease Symptoms Name and Diagnosis: सर्दी, बुखार और वायरल बीमारियों को ठीक करने के लिए शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत होना बेहद जरूरी है. लेकिन क्या हो अगर वहीं सिस्टम आपके शरीर को कमजोर करने लगे. ऐसे में आपकी सेहत पर गंभीर असर पड़ेगा. जी हां, कई लोगों को पता ही नहीं है कि हमारे आसपास एक ऑटोइम्यून सिस्टम नाम की बीमारी भी घूम रही होती है जो आपको कब पकड़ लें आपको पता ही नहीं चलेगा.
दरअसल इस बीमारी का कोई सटीक इलाज मौजूद नहीं है. ऐसे में इस बीमारी को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है? अगर समय रहते कंट्रोल ना किया जाए तो ये लंबे समय तक सूजन, दिल की सेहत को नुकसान और शरीर को गंभीर और स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं.
ऑटोइम्यून बीमारी क्या होती है? | What is an autoimmune disease?
आपको बता दें कि ऑटोइम्यून (Autoimmune) बीमारी ऐसी कंडीशन होती है, जिसमें इम्यून सिस्टम यानि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर की हेल्दी कोशिकाओं, ऊतकों या अंगों को दुश्मन समझकर उन पर हमला करने लगती है. आसान शब्दों में समझे तो इम्यून सिस्टम बैक्टीरिया, वायरस और वायरल से शरीर की रक्षा करता है, लेकिन ऑटोइम्यून बीमारी में यही सुरक्षा तंत्र अपने शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है.
इलाज क्या है? | Diagnosis
ऑटोइम्यून बीमारी का कोई इलाज फिलहाल मौजूद नहीं है. इस बीमारी को सही लाइफस्टाइल से ठीक किया जा सकता है. बशर्त ये हैं कि है कि मरीज को कौन-सी ऑटोइम्यून बीमारी है? क्योंकि अलग-अलग ऑटोइम्यून बीमारी में उसका असर शरीर के अलग-अलग अंग पर पड़ता है.
एक्सपर्ट की सलाह लें: इस बीमारी में एक्सपर्ट की सलाह लेनी बेहद जरूरी है. इम्यून सिस्टम की असामान्य गतिविधि को कंट्रोल करने के लिए दवा दी जाती है. कुछ मामलों में स्टेरॉयड, इम्यूनोसप्रेसेंट या बायोलॉजिक दवाओं की जरूरत पड़ती है.
जांच कराते रहें: समय-समय पर टेस्ट कराते रहना चाहिए. ब्लड टेस्ट कराएं और एक्सपर्ट से सलाह लेते रहें. ऐसा करने से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है.
बैलेंस्ड डाइट लें: फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन से भरपूर भोजन लेते रहें. वहीं प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड का सेवन बंद करें.
एक्सरसाइज करें: हेल्दी एक्टिविटी को रूटीन में शामिल करें. जैसे, पैदन चलना, योगा, स्ट्रेचिंग. एक्सरसाइज आपका तनाव कम करने में मदद करेगा. वहीं जितना हो सके तनाव कम लें. एक्सपर्ट कहते हैं कि तनाव आपके ऑटोइम्यून बिमारियों के लक्षण को बढ़ा सकते हैं. इसलिए तनाव मैनेज और अच्छी नींद लेनी बेहद जरूरी है.
धूम्रपान और शराब से बचें: ये कई ऑटोइम्यून बीमारियों को बिगाड़ सकते हैं.
- ध्यान दें कि ऑटोइम्यून बीमारी का इलाज एक्सपर्ट की मदद से करें. वहीं बिना सलाह के दवा लेना बीमारी को गंभीर रूप में बदल सकता है.
बीमारी के लक्षण | Autoimmune Disease Symptoms
ऑटोइम्यून बीमारी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर का कौन-सा अंग प्रभावित हुआ है. हालांकि कुछ सामान्य लक्षण लगभग सभी ऑटोइम्यून बीमारियों में देखे जा सकते हैं.
- लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
- जोड़ों में दर्द, सूजन या अकड़न
- बार-बार बुखार आना
- मांसपेशियों में दर्द
- त्वचा पर लाल चकत्ते, रैश या रंग में बदलाव
- बाल झड़ना
- हाथ-पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट
- पेट दर्द, दस्त या पाचन संबंधी समस्याएं (कुछ बीमारियों में)
- आंखों में सूखापन या धुंधला दिखाई देना
- ध्यान लगाने में कठिनाई या याददाश्त कमजोर लगना (ब्रेन फॉग)
अगर इस प्रकार के लक्षण बार-बार दिखाई दें तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं. सही जांच के बाद ही यह पता चल पाएगा कि व्यक्ति को किसी प्रकार की कोई ऑटोइम्यून बीमारी है या कोई दूसरी बीमारी?
ऑटोइम्यून बीमारियां कौन-कौन सी होती हैं?
दरअसल दुनिया में 80 से ज्यादा ऑटोइम्यून बीमारियां हैं. लेकिन कुछ सामान्य और सबसे ज्यादा चर्चित बीमारियां हैं. जैसे,-
- रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis): इस बीमारी में जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या रहती है.
- ल्यूपस (Systemic Lupus Erythematosus – SLE): ये स्किन से जुड़ी समस्या है, इसमें स्किन, जोड़ों, किडनी, दिल और अन्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचाती है.
- मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple Sclerosis – MS): इस ऑटोइम्यून बीमारी में दिमाग पर गहरा असर पड़ता है. हमारे दिमाग में माइलिन नाम की सुरक्षा परत होती है. इम्यून सिस्टम इसे ही नष्ट करने लगती है. इस परत के नष्ट होने पर शरीर के अन्य अंगों के बीच होने वाले संदेश में रूकावट पैदा हो जाती है.
- टाइप 1 डायबिटीज: इम्यून सिस्टम अग्न्याशय (पैंक्रियाज) की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है. ऐसे में डायबिटी का ठीक होना मुश्किल हो जाता है.
- सोरायसिस (Psoriasis): त्वचा पर लाल, मोटे और पपड़ीदार चकत्ते बन जाते हैं.
- हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस (Hashimoto’s Thyroiditis): थायरॉयड ग्रंथि को प्रभावित कर हाइपोथायरॉयडिज्म का कारण बन सकती है.
- ग्रेव्स डिजीज (Graves’ Disease): थायरॉयड हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनने लगते हैं.
- सीलिएक डिजीज (Celiac Disease): ग्लूटेन खाने पर छोटी आंत प्रभावित होती है.
- विटिलिगो (Vitiligo): त्वचा का रंग बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, जिससे सफेद धब्बे बनते हैं.
- एलोपेशिया एरियाटा (Alopecia Areata): इम्यून सिस्टम बालों की जड़ों पर हमला करता है, जिससे बाल झड़ने लगते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

