Bad posture research: आज हमारा देश तमाम सुविधाओं से लैस है. हाथों में फोन, लैपटॉप ये सब दिखना काफी आम बात हो गई है. लेकिन चिंता की बात सिर्फ इतनी है कि लोग अपनी लाइफस्टाइल का खास ख्याल नहीं रखते. कैसा खाना खा रहे हैं, कैसे बैठ रहे हैं. कुछ ख्याल नहीं. डिजिटल एरा के कारण जहां हमने प्रगति की है वहीं दूसरी ओर यही सुविधा तकलीफ बनती जा रही है.
ये सुविधा आईं थी हमारा काम आसान बनाने हमें तकलीफ न हो. लेकिन इन्हीं सुविधाओं ने हमारी गर्दनों को झुका दिया है, आखों को थका दिया है, नींदो को उड़ा दिया है, बूढ़ा बना दिया है. ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि बूढ़ा बनते जा रहे हैं. इसका कारण एक ही है हमारी मोबाइल में टुक-टुक करने वाली आदत. लेकिन टुक-टुक वाली आदत हमारी कलाई, अंगूठे, कंधे, गर्दन, कमर, आंख, कान और दिमाग के दर्द का कारण बन रही है. लेकिन ‘सुनता है इंडिया सुधरता नहीं’.
इन बीमारियों की चपेट में युवा
पहले जान लें कि आखिर युवा किन बीमारियों की चपेट में हैं. लगातार लैपटॉप पर टाइपिंग करने से कारपल टनल सिंड्रोम, माउस पकड़कर काम करने से माउस आर्म या फिर टेनिस एल्बो, झुकी-झुकी गर्दन के साथ फोन का इस्तेमाल करना तो टेक्स्ट नेक सिंड्रोम, लैपटॉप के आगे लगातार बैठने से कंप्यूटर हंच, लगातार स्क्रॉलिंग से गेमर थंब, घंटों बैठे रहने से डेड बट सिंड्रोम की समस्या का युवा शिकार हो रहे हैं. लगातार लैपटॉप देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन तेज आवाज में ईयरफोन लगाने से रिंगिंग सिंड्रोम, रात में मोबाइल चलाने से ‘स्लीप डिसऑर्डर’, फोन दूर होते ही बेचैनी यानी ‘नोमोफोबिया’और दिनभर बैठे-बैठे सुस्त जीवनशैली, ये सब मिलकर शरीर के पूरे सिस्टम को प्रभावित करते हैं. इतनी सारी बिमारियां गिनवाई तो ये आखिर होता क्या है? आइए जानते हैं.
क्यों होती हैं ये बीमारियां?
- कारपल टनल सिंड्रोमः ये समस्या तब होती है जब हम लगातार टाइपिंग करते रहते हैं. इससे हमारी कलाई पर प्रेशर पड़ता है. इसे कहते हैं कारपल टनल सिंड्रोम
- माउस आर्म टेनिस एल्बोः ये कंडिशन उन लोगों में देखी जाती है जो कंप्यूटर पर अधिक काम करे हैं. माउस पकड़ने से उनकी बाजू-कोहनी दर्द होने लगती है.
- टेक्स्ट नेक सिंड्रोमः लगातार फोन देखते-देखते हमारी गर्दन झुक जाती है, इससे गर्दन में दर्द हो जाता है. जिसे टेक्स्ट नेक सिंड्रोम कहा जाता है.
- कंप्यूटर हंचः लैपटॉप के आगे लगातार बैठने से ये आदत होती है. गर्दन और हाथ में दर्द की समस्या हो सकती है. इसे कहते हैं कंप्यूटर हंच
- गेमर थंबः जब हम लगातार स्क्रॉलिंग करते हैं, तो अंगूठा दर्द होने लगता है जिसे गेमर थंब कहा जाता है.
- डेड बट सिंड्रोमः एक जगह कई घंटों तक बैठकर काम करना, आपके कूल्हों को असहज करता है दर्द महसूस होती है. इस कंडिशन को कहा जाता है डेड बट सिंड्रोम.
- डिजिटल आई स्ट्रेनः जब काम करते-करते आंखों में सूखापन आ जाए, जलन हो जाए, धुंधलापन हो जाए. इस तरह की समस्या हो सकती है.
यह भी पढ़ें: इंश्योरेंस करवा रहा.. सेहत में सुधार ला रहा इंडिया, NFHS सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

