Best Sleep Posture: रात में आप किस तरह से सोते हैं? यानी आपका कैसा पोश्चर है. कुछ लोग कमर के बल या फिर पेट के बल, राइट साइड, लेफ्ट साइड में सोना पसंद करते हैं. कुछ लोग स्टार फिश में सोते हैं. हालांकि सोते हुए हम ये ध्यान नहीं दे पाते कि आखिर हम सो कैसे रहे हैं. इसलिए लोगों को ध्यान ही नहीं रहता. कुछ के साथ ऐसा भी है कि उन्हें जिस तरह से नींद आ जाए वो वैसे ही सोना पंसद करने लगते हैं.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोने की सही पोजीशन क्या है? यानी अगर आप गलत पोश्चर में सो रहे हैं, तो उससे आपको कई परेशानी हो सकती है. जैसे दायीं करवट में अगर सोते हैं, तो सीने में जलन, एसिडिटी या फिर कब्ज की समस्या होती है. अगर आप पेट के बल सोते हैं तो स्पाइन का अलाइंमेंट बिगड़ जाता है. अगर आप कमर के बल सीधे लेटते हैं, तो ये स्लीप एपनिया का कारण बन सकता है.
सही पोश्चर में सोएं, हो सकती स्पील एपनिया
रात में अगर आप सही पोश्चर में नहीं सोते हैं, तो आपको स्लीप एपनिया की समस्या हो सकती है. दरअसल ग्रैविटी टंग को नीचे की ओर खींचती है. जिससे हमारी सांस लेने की नली ब्लॉक हो जाती है. इसी कारण खर्राटे और स्लीप एपनिया की शिकायत हो सकती है. वहीं जो लोग स्टारफिश पोजिशन में सोते हैं, उनका सिर रातभर ऊपर की ओर रहता है. इससे हमारा नर्व कंप्रेशन और कंधों में जकड़न महसूस हो सकती है. जो लोग फीटल पोज़ीशन में सोना तो एंग्ज़ाइटी, स्ट्रेस बढ़ा देता हैं.
6 घंटे की नींद नहीं पूरी कर पा रहे लोग
क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में 70 करोड़ से ज्यादा लोग अपने सेहत के लिए जरूरी 6 घंटे की नींद को भी पूरा नहीं कर पाते. उनके स्लीप साइकल काफी बिगड़ा होता है. आंकड़ों पर गौर करें तो 23 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो 4 से 5 घंटे नींद पूरी करते हैं. सिर्फ 8 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो अपने 8 से 10 घंटे की नींद पूरी करते हैं. क्योंकि इतना सिर्फ छोटे बच्चे ही सो पाते हैं. इसलिए ये आंकड़ों को छोटे बच्चों से जोड़कर देखा जा रहा है. क्योंकि बच्चे बिना किसी चिंता के सोते हैं. वहीं अगर आपको अच्छी नींद नहीं आ रही तो आप कुछ उपाय हैं जिन्हें अपनाकर अपनी नींद की क्वालिटी को सुधार सकते हैं.
अच्छी नींद के लिए क्या करें?
जिन लोगों की नींद बिगड़ी हुई है वो सोशल मीडिया से लेकर कई जगहों पर उपाय खोजते रहते हैं. एक उपाय जो उन्हें मिल जाए जिससे स्लीप साइकल सुधर जाए. इस उपाय की खोज में अक्सर रहते हैं. अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं, तो बता दें कि रोजाना ताजा खाना खाएं, हो सके तो तला-भुना खाने से दूरी बना लें, 5 से 6 लीटर पानी पीएं, रोजाना वर्क आउट करें. हालांकि अगर समस्या ज्यादा गंभीर है तो डॉक्टर की सलाह लिए बगैर किसी सलाह को न माने.
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