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मोटापा बन रहा है टाइम बम! डॉक्टर भारती कुलकर्णी ने दी बड़ी चेतावनी

Bharti Kulkarni on Obesity: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की खाने-पीने की आदतें तेजी से बदल रही हैं. इसका असर अब दिख रहा है.

Bharti Kulkarni on Obesity: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की खाने-पीने की आदतें तेजी से बदल रही हैं,लेकिन इसका असर अब हमारी सेहत पर साफ दिखने लगा है. बढ़ता मोटापा, खराब डाइट और कम शारीरिक गतिविधि एक बड़ी चिंता बनते जा रहे हैं. इसी को लेकर National Institute of Nutrition (NIN) की डायरेक्टर Dr. Bharati Kulkarni ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.

हैदराबाद में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम संतुलित आहार और रोजाना की शारीरिक गतिविधि को नजरअंदाज करते रहे, तो आने वाले समय में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. खासतौर पर बच्चों के पोषण को लेकर उन्होंने अहम बात कही. 2 साल से कम उम्र के बच्चों के खाने में ऊपर से चीनी बिल्कुल नहीं डालनी चाहिए. यह सलाह Indian Council of Medical Research (ICMR) और NIN के नए दिशा-निर्देशों पर आधारित है, जिनमें छोटे बच्चों के लिए शून्य चीनी सेवन की बात कही गई है.

नई डायट गाइडलाइंस में किया गया शामिल

डॉ. कुलकर्णी, जो 1 जनवरी 2025 से NIN की निदेशक हैं, मातृ और शिशु पोषण की विशेषज्ञ हैं. वे ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य के तहत देश में बेहतर पोषण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर काम कर रही हैं. संस्थान के नए डाइट गाइडलाइंस में साफ कहा गया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा नमक, चीनी और वसा (HFSS) से दूरी बनाना जरूरी है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक प्रोटीन सप्लीमेंट लेना नुकसानदायक हो सकता है. इससे दिल, किडनी और हड्डियों पर बुरा असर पड़ सकता है. सलिए बेहतर है कि हम अपनी डाइट में नैचुरल और संतुलित चीजें शामिल करें जैसे अनाज, दालें, सब्जियां और फल.

पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए NIN आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि लोगों तक सही जानकारी पहुंचे और कुपोषण की समय पर पहचान हो सके. साथ ही, DABS-I जैसे सर्वे के जरिए देश में पोषण की स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जिससे सरकार को सही नीतियां बनाने में मदद मिल सके.

एनीमिया को कम करने के लिए खास पहल

मोटापा और बीमारियों जैसे डायबिटीज और हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए नमक, चीनी और तेल का कम इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है.हाल ही में हुए राष्ट्रीय पोषण माह में भी इन मुद्दों पर खास फोकस किया गया. इसके अलावा ‘पोषण भी पढ़ाई भी’ जैसे अभियानों के जरिए बच्चों के शुरुआती विकास पर ध्यान दिया जा रहा है. वहीं, एनीमिया को कम करने के लिए मिशन पोषण 2.0 के तहत खास पहल की जा रही हैं.अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि हर घर तक सही पोषण की जानकारी पहुंच सके.

यह भी पढ़ें: AIIMS स्टडी का दावा! इस एक रणनीति से तेजी से कम हो सकता है एनीमिया

sarthak arora
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अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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