Blood Kick Trend: आजकल युवाओं में चिंताजनक ट्रेंड देखा जा रहा है. इस ट्रेंड का नाम है ब्लड किक. हैरानी की बात है कि ये ट्रेंड भोपाल में देखा गया है. ब्लड किक आखिर है क्या? अगर आप इसे किसी तरह का नशा समझ रहे हैं, तो गलत है. ये किसी तरह का नशा नहीं है. न ही शराब है, न ही ब्लड किक कोई ड्रग्स है.
ब्लड किक युवाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है. आपको बता दें कि ये जानलेवा भी हो सकता है. दरअसल कुछ युवा अपने शरीर से खून निकालकर उसे एक बार फिर से इंजेक्ट करवा रहे हैं. इससे उन्हें कुछ ही पलों के लिए एनर्जी, सुकून या फिर कंट्रोल का एहसास हो रहा है.
साइकेट्रिक के पास जाने की जरूरत
NDTV की रिपोर्ट्स के अनुसार जनवरी 2026 में अब तक गांधी मेडिकल कॉलेज से ऐसे कम से कम पांच मामले अब तक सामने आ चुके हैं. हैरानी की बात है कि इन पांच मामलों में 18 से 25 साल के ही युवा शामिल थे. जब युवा इस तरह खून को वापस इंजेक्ट करवाते हैं, तो उनकी फैमिली को नहीं पता चल पाता क्योंकि धीरे-धीरे इसके लक्षण दिखाई देते हैं. जैसे चिड़चिड़ापन, गुस्सा होना, अकेले रहना. अगर समय रहते नहीं ध्यान दिया जाए तो उन्हें साइकेट्रिक के पास ले जाना पड़ सकता है.
मानसिक और फिजिकली जाल है
एक्सपर्ट्स के अनुसार ये पारंपरिक से अलग मामला है. यानी इससे युवाओं में न शराब के लक्षण दिखाई देते हैं न ही ड्रग्, ते मिलते हैं. इससे शरीर पर सुई के निशान दिखाई देते हैं. अब युवा ऐसा क्यों कर रहे हैं? इसपर एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोबारा शरीर में खून को डालने से उन्हें तुरंत राहत मिलती है. लेकिन असलियत इसके उलट है. ये एक खतरनाक मानसिक और शारिरिक जाल है.
सोशल मीडिया दे रहा है बढ़ावा
जानकारी के अनुसार एक्सपर्ट्स का ऐसा मानना है कि सोशल मीडिया इस खतरनाक उत्सुकता को बढ़ावा दे रहा है. दरअसल चरम या विचित्र व्यवहारों को महिमामंडित करने वाले वीडियो और पोस्ट युवाओं को प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. जो एक चुनौती या जिज्ञासा के रूप में शुरू होता है, और ये जल्द ही एक लत में बदल जाता है. जब तक चेतावनी के संकेत दिखाई देते हैं, तब तक लत जड़ पकड़ चुकी होती है.
डॉक्टरों के अनुसार इसके परिणाम काफी डरावने हो सकते हैं. दरअसल अगर आप बार-बार इंजेक्शन लगाते हैं तो गंभीर संक्रमण जैसे सेप्सिस, HIV, हेपाटाइटिस, नर्व डैमेज, खून के क्लॉट एनीमिया और यहां तक कि ऑर्गन्स डैमेज भी हो सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की अननैचुरल स्ट्रेस के कारण नैचुरल सिस्टम्स बिगड़ने लगते हैं. एक्ट्रीम मामलों में मौत भी हो सकती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


