Bluetooth Headphones Cancer Risk 2026: आजकल लोग दिनभर हेडफोन्स या फिर इयरफोन्स का इस्तेमाल करते हैं. मानों ये उनकी लाइफ का एक अहम हिस्सा बन गया है. हर कोई चाहे स्कूल जाने वाला व्यक्ति हो या फिर कॉलेज और ऑफिस जाने वाला व्यक्ति. हर कोई घंटों तक हेडफोन का इस्तेमाल करता है. हालांकि इसने लोगों की लाइफ को काफी हद तक इजी भी किया है. यानी बिना किसी को परेशान किए गाने सुन सकते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है?
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रही है. वायरल वीडियो में ये क्लेम किया जा रहा है कि अगर आप घंटों इस डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है. वीडियो सामने आई और तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल भी हुई. लेकिन क्या ये सच है? क्या वायरल वीडियो में क्लेम किया गया दावा सही है? आइए जानते हैं.
ब्लूटूथ से पहुंचता शरीर को नुकसान?
पहले जान लेते हैं कि क्या सच में ब्लूटूथ हमारे शरीर में घुसकर नुकसान पहुंचाना शुरू करता है? तो इसका जवाब है कि ब्लूटूथ में रेडियो सिग्नल्स का इस्तेमाल होता है. ये इसी पर काम करती है. जिसके चलते इसे नॉन आयोनाइजिंग रेडिएशन की कैटेगरी में रखा जाता है. इनकी तुलना में X-rays या सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणें बहुत ज्यादा खतरनाक होती हैं. यानी इनमें इतनी ताकत नहीं होती कि ये शरीर के सेल्स या DNA को नुकसान पहुंचा सकें. ये उतनी ही सुरक्षित होती हैं जितने कि घर में लगे वाई-फाई राउटर से निकलने वाले सिग्नल.
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सिद्ध हुई कैंसर की बात? Are Bluetooth headphones dangerous?
अब जान लेते हैं कि क्या साइंटिस्ट ने ऐसा क्लेम किया है कि ब्लूटूथ नुकसानदेह है? तो बता दें कि अभी तक ऐसी किसी रिसर्च में ऐसा सिद्ध नहीं हुआ कि ब्लूटूथ हेडफोन का इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है, या फिर इससे कैंसर हो सकता है. इसलिए ऐसा नहीं कहा जा सकता है. इसके उल्ट ही एक्सपर्ट्स का ऐसा कहना है कि मोबाइल फोन से निकलने वाले सिग्नल्स ब्लूटूथ के मुकाबले काफी स्ट्रॉन्ग होते हैं, यानी अगर आप सीधा कान सटाकर बात करते हैं, तो हेडफोन या फिर ब्लूटूथ का इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर माना जा सकता है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्लूटूथ या फिर हेडफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो उससे कैंसर नहीं बल्कि तेज आवाज में गाने सुनने से आपको प्रॉब्लम हो सकती है. जो लोग रोजाना ऐसे रूटीन को फॉलो करते हैं उनके कान के अंदरूनी हिस्से परमानेंटली डैमेज हो सकते हैं. अक्सर एक्सपर्ट्स ऐसी जानकारी देते हैं कि अगर आप गाने सुनना चाहते हैं, तो 60/60 के रूल को फॉलो करे. यानी गानों की वॉल्यूम को 60 प्रतिशत पर रखें और 60 मिनट से ज्यादा इनका इस्तेमाल न करें. अगर आपका काम ऐसा है कि आपको हेडफोन का इस्तेमाल करना पड़ता है तो आप बीच-बीच में अपने कानों को ब्रेक दें. कान के अंदर इयरबड्स की जगह ओवर इयर हेडफोन का इस्तेमाल करें.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


