Bryan Johnson Period Blood: ब्रायन जॉनसन जो लंबी उम्र पर रिसर्च करते हैं. अमेरिका के टेक एंटरप्रेन्योर हैं, जो एक बार फिर से खूब सुर्खियां बटौर रहे हैं. हालांकि इस बार चर्चा उनकी नई डाइट या फिर एक्सरसाइज की नहीं हो रही है. बल्कि सोशल मीडिया पर एक क्लेम किया है. जिसपर एक बहस छिड़ गई है.
ब्रायन का कहना है कि वो अपनी गर्लफ्रेंड केट टेलो के पीरियड्स ब्लड का 10 मिलीलीटर सैंपल -80°C टेंप्रेचर पर लैब के फ्रीजर में स्टोर करके रखते हैं. उनका कहना है कि यह किसी सनसनी या अजीब प्रयोग के लिए नहीं, बल्कि हेल्थ रिसर्च का हिस्सा है.
आखिर पीरियड्स का खून क्यों स्टोर कर रहे हैं?
ब्रायन जॉनसन का कहना है कि पीरियड्स का खून नॉर्मल ब्लड टेस्ट से अलग जानकारी दे सकता है. क्योंकि यह सीधे गर्भाशय (Uterus) से निकलता है, इसलिए इससे महिलाओं की प्रजनन (Reproductive) स्वास्थ्य से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिल सकती हैं.
उनके मुताबिक
- इस सैंपल की मदद से साइंटिस्ट, गर्भाशय के सेल्स (Uterine Cells) पर अध्ययन कर सकते हैं.
- इम्यून सेल्स और स्टेम सेल्स पर रिसर्च कर सकते हैं.
- माइक्रोप्लास्टिक (Microplastics), PFAS (Forever Chemicals) और हार्मोन को प्रभावित करने वाले रसायनों (Endocrine Disrupting Chemicals) की जांच कर सकते हैं.
क्या पीरियड्स का खून रिसर्च के लिए उपयोगी हो सकता है?
ब्रायन जॉनसन का कहना है कि पीरियड्स के दौरान निकलने वाला टिशू शरीर का ऐसा हिस्सा है, जो हर महीने बनता और निकलता है. इसलिए बिना किसी सर्जरी के गर्भाशय की स्थिति को समझने का यह एक आसान तरीका हो सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया के कई रिसर्च ग्रुप्स एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) जैसी बीमारी की पहचान के लिए भी पीरियड्स के खून पर रिसर्च कर रहे हैं. इस बीमारी का पता लगाने में कई बार 7 से 10 साल तक का समय लग जाता है.
क्या पीरियड्स का खून फ्रीजर में रखना सामान्य प्रक्रिया है?
ब्रायन जॉनसन के मुताबिक, रिसर्च के लिए -80°C तापमान पर जैविक नमूनों (Biological Samples) को स्टोर करना वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में सामान्य प्रक्रिया है. इसलिए इसे किसी सनसनीखेज प्रयोग की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.
एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?
फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि पीरियड्स का खून महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को समझने के लिए भविष्य में एक महत्वपूर्ण रिसर्च टूल बन सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अभी इस विषय पर रिसर्च शुरुआती चरण में है. एक व्यक्ति का सैंपल किसी वैज्ञानिक निष्कर्ष का आधार नहीं बन सकता. इस तरह की जांच को अभी रोजमर्रा के मेडिकल टेस्ट का हिस्सा नहीं माना जा सकता. इसके लिए बड़े स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत है.
सोशल मीडिया पर क्यों मची बहस?
ब्रायन जॉनसन की पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ लोगों ने इसे नई वैज्ञानिक सोच और रिसर्च का हिस्सा बताया. वहीं कई यूजर्स ने इसे अजीब और गैर-जरूरी प्रयोग कहा. कुछ लोगों का मानना है कि हर व्यक्तिगत प्रयोग को सार्वजनिक करना जरूरी नहीं होता.
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