Human Immunodeficiency Virus: एचआईवी (Human Immunodeficiency Virus) एक खतरनाक बीमारी है. यह सीधा व्यक्ति के इम्यून सिस्टम पर प्रभाव डालती है. विशेषकर CD4 (टी-हेल्पर) कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है. बता दें कि यह कोशिकाएं शरीर को संक्रमण और बीमारियों से बचाने का काम करती है.
अगर बीमारी का सही समय पर इलाज ना किया जाए तो ये पूरे शरीर को धीरे-धीरे बीमार कर सकती है, और आगे चलकर एड्स (AIDS – Acquired Immunodeficiency Syndrome) की स्थिति पैदा कर सकती है. आज के आर्टिकल में जानेंगे कि इस बीमारी के शुरूआती लक्षण और बचने के तरीके क्या हैं?
HIV के शुरुआती लक्षण (Early Symptoms of HIV)
(HIV) एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति में 2 से 4 हफ्ते बाद कुछ फ्लू जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं. वहीं धीरे-धीरे, बुखार, गले में खराश, शरीर या मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, अत्यधिक थकान, गर्दन, बगल या कमर में लिम्फ नोड्स (गांठें) सूजना, स्किन पर लाल चकत्ते (रैश), रात में ज्यादा पसीना आना और मुंह में छाले आना जैसे लक्षण नजर आते हैं.
ध्यान रहे इन लक्षणों को देखकर ये नहीं कहा जा सकता कि किसी व्यक्ति को एचआईवी ही हैं. इसलिए एचाईवी की पुष्टि के लिए आपको समय रहते एचआईवी टेस्ट कराना बेहद जरूरी है.
क्या HIV में गले में छाले हो सकते हैं?
कुछ मामलों में एचआईवी होने पर गले में सक्रमण होने की समस्या हो सकती है. गले में दर्द, मुंह या गले में छाले, बुखार और फ्लू जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि इस तरह के लक्षण इसलिए नजह आते हैं क्योंकि वायरल शरीर के इम्यून सिस्टम पर असर डालता है.
किन कारणों से बार-बार होते हैं गले के छाले?
- फोलिक एसिड या आयरन की कमी
- वायरल इंफेक्शन होना
- कमजोर इम्यूनिटी
- स्ट्रेस लेना
एचआईवी (HIV) कैसे फैलता है?
- एचआईवी, एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है. वहीं बॉडी फ्लूड के संपर्क में आने से भी फैल सकता है.
- असुरक्षित (बिना कंडोम) यौन संबंध बनाने से.
- संक्रमित सुई या सिरिंज साझा करने से.
- एचआईवी संक्रमित रक्त या रक्त उत्पाद चढ़ाने से.
- एचआईवी संक्रमित मां से गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान बच्चे में.
- स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमित सुई चुभने जैसी दुर्घटनाओं से (दुर्लभ मामलों में).
एचआईवी इन तरीकों से नहीं फैलता
- हाथ मिलाने या गले मिलने से.
- साथ बैठने, खाना खाने या बर्तन साझा करने से.
- खांसने या छींकने से.
- मच्छर या अन्य कीड़ों के काटने से.
- एक ही शौचालय, स्विमिंग पूल या कपड़े इस्तेमाल करने से.
एचआईवी का इलाज क्या है?
बता दें कि एचआईवी का अभी तक कोई स्थायी इलाज मौजूद नहीं है. वहीं दुनिया भर में करीब 4 करोड़ इस बीमारी के साथ जी रहे हैं. वायरस को कंट्रोल करने के लिए मरीजों को एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) दी जाती है. वहीं अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार एचआईवी पर कई रिसर्च की गई है.
फिलहाल ब्रॉडली न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी (bNAbs) पर रिसर्च की जा रही है. इसमें पाया गया कि ये एंटीबॉडी वायरस को कंट्रोल करने में सक्षम है. हालांकि इसे अभी इलाज के रूप में मंजूरी नहीं मिली है. इसके अलावा जीन एडिटिंग (CRISPR), इम्यूनोथेरेपी, ‘किक एंड किल’, ‘ब्लॉक एंड लॉक’ जैसे ट्रीटमेंट पर भी रिसर्च जारी है. इन रिसर्च का मकसद है कि शरीर में छिपे हुए वायरस को जड़ से खत्म करना.
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