How to keep your respiratory system healthy: बदलते मौसम में खुद का ख्याल रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. बारिश, धूप और तेज हवा के कारण सर्दी, जुकाम, गले में खराश और सांस संबंधी समस्या होने का खतरा रहता है. ऐसे में इस चुनौती से कैसे निपटा जाएं, अयुष मंत्रालन ने कुछ जरूरी सुझाव सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर किए हैं. आयुष मंत्रालय ने कुछ आसान और नेचुरल उपायों की मदद से सांस संबंधी समस्याओं के खतरों से निपटने की सलाह दी है. इन सलाह को अपनाकर आप खुद को बीमारियों से काफी हद तक बचा सकते हैं.
बता दें कि बारिश के मौसम में बैक्टीरिया, फंगस और वायरस तेजी से पनपते हैं. ये बैक्टीरिया ही सर्दी, जुकाम और वायरल का कारण बनते हैं. लेकिन अगर आप कुछ छोटी-मोटी सावधानियां रखते हैं तो खुद को बीमारियों से आसानी से बचा सकते हैं. एक छोटा-सा कदम ही आपको बड़ी बीमारी के खतरे से बचाने में सक्षम है. इसिलए समय रहते सावधानियां अपनाएं जो आपको बीमारी से बचाने में मदद करेंगी.
बदलते मौसम में अपनाएं ये उपाय
- आयुष मंत्रालय के अनुसार बदलते मौसम में सबसे पहले शरीर को गर्म रखें. साथ ही गुनगुना पानी और हर्बल पेय (Herbal Infusions) का सेवन करते रहें. गुनगुना पानी गले को आराम पहुंचाने के साथ शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. वहीं हर्बल पेय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा.
- मंत्रालय ने सूखी अदरक (सोंठ) और गुड़ के सेवन करने की सलाह भी दी है. बता दें कि अदरक में मौजूद नेचुरल तत्व गले की खराश और सर्दी-जुकाम से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं, जबकि गुड़ शरीर को एनर्जी देने के काम करेगा. साथ ही गले में राहत पुहंचाएगा. आप इसका सेवन सुबह और रात के समय कर सकते हैं.
- अगर आप दूध का सेवन करते हैं तो हल्दी वाला दूध (Turmeric Milk) भी पी सकते हैं. हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन (Curcumin) तत्व एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है. इसलिए बदलते मौसम में अक्सर हल्दी वाला दूध पीने की सलाह दी जाती है. साथ ही ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा और बीमारियों से लड़ने में काफी हद तक कारगर साबित होगा.
- तुलसी का रस और शहद का सेवन भी सांस संबंधी समस्याओं से लड़ने में कारगार साबित हो सकता है. तुलसी का उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है. इसमें ऐसे गुण पाए जाते हैं जो सांस संबंधी बैक्टीरियों को खत्म रखने की क्षमता रखते हैं. तुलसी को औषधीय पौधों में गिना जाता है. वहीं शहद गले की खराश और खांसी से राहत दिलाने में मदद कर सकता है.
योगासन भी जरूरी
आयुष मंत्रालय घरेलू उपायों के साथ-साथ भुजंगासन और गोमुखासन करने की सलाह भी देता है. भुजंगासन (Bhujangasana) फेफड़ों की सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है. रोजाना इसकी प्रैक्टिस से सांस संबंधी समस्याएं कम होने में मदद मिलेगी वहीं शरीर में लचीलापन बढ़ेगा. वहीं गोमुखासन (Gomukhasana) शरीर की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद माना जाता है. गोमुखासन से शरीर का पोश्चर भी बेहतर होने में मदद मिलती है. एक्सपर्ट कहते हैं अगर आप रोज इस योगासनों का अभ्यास करते हैं तो बीमारियों से काफी हद तक लड़ने में मदद मिल सकती है.
ये सावधानी बरतना भी जरूरी
एक्सपर्ट के अनुसार, मौसम बदलने के दौरान छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से अस्थमा, एलर्जी या सांस संबंधी मरीजों को खास ध्यान रखने की जरूरत है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, संतुलित आहार लेना, अच्छी नींद लेना और संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना भी जरूरी है.
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FAQs
सवाल:बदलते मौसम में श्वसन स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखें?
जवाब: गुनगुना पानी या हर्बल पेय पिएं, योग करें और मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या रखें.
सवाल: श्वसन स्वास्थ्य के लिए कौन से योगासन फायदेमंद हैं?
जवाब:भुजंगासन और गोमुखासन फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकते हैं.
सवाल: क्या केवल घरेलू उपाय ही पर्याप्त हैं?
जवाब: नहीं, यदि सांस लेने में तकलीफ, तेज खांसी या अन्य गंभीर लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. एक्सपर्ट्स द्वारा दी जाने वाली जानकारी के लिए जुड़े हमारे Youtube के साथ.)

