Cancer Risk Prevention: विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) मुताबिक दुनिया में 20 करोड़ लोग कैंसर के शिकार हैं. चौंकाने वाली बात ये है कि साल 2050 तक दुनियाभर में कैंसर से पीड़ित लोगों की संख्या हर साल साढ़े तीन करोड़ के करीब तक बढ़ सकती है. जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल ये संख्या 2 करोड़ से कम है.
भारत देश में दिल के और कैंसर के मरीजों की संख्या में कुछ अंतर नहीं है. सबसे बड़ी रिसर्च संस्था ICMR ने भी चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए थे,जिनके मुताबिक भारत में साल 2025 तक कैंसर के कुल 15 लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे. यानी औसतन भारत में हर एक लाख लोगों में करीब 100 लोगों को कैंसर होने का खतरा है. हालांकि WHO भी इस बात को स्वीकार करता है कि लोग अगर अपने लाइफस्टाइल में बदलाव कर लें तो कैंसर के खतरे क 30 से 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है.
सभी के शरीर में है कैंसर के सेल्स
क्या आप जानते हैं कि कैंसर के सेल्स हम सभी के शरीर में मौजूद हैं, लेकिन हमारी इम्युनिटी उन्हें सुलाए रखती है. लेकिन हमारे खाने में कई ऐसी चीजें है जो इन सोए हुए कैंसर को ट्रिगर कर सकती हैं. यानी कैंसर सेल्स को जगा सकती हैं. इतना ही नहीं हमारे खाने में कैंसर के ऐसे तत्व भी मौजूद हैं जो कैंसर सेल्स को कभी जागने ही नहीं देती.
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कैंसर का क्या है कारण?
आप कैंसर का सीधा कारण पूछेंगे तो इसे कोई नहीं बता पाेगा. कई बार ये जेनेटिक्स के कारण भी होता है. यानी आपके परिवार में पहले किसी को कैंसर हुआ हो. लेकिन प्रदूषण, कमजोर इम्युनिटी, खराब लाइफस्टाइल – मोटे तौर पर इन कारणों को कैंसर के लिए जिम्मेदार माना जाता है. वहीं अब कई रिसर्च सामने आ चुकी हैं जो ये दावा करती हैं कि हमारे खाने पीने की आदतें भी कैंसर की एक वजह हो सकती है. आपको बता दें कि अब तक कैंसर को ऐसी बीमारी माना जा रहा था जो DNA में गड़बड़ी के कारण होती है. लेकिन हालिया रिसर्च के मुताबिक कैंसर सिर्फ़ जीन की गलती नहीं है. हमारे शरीर के सेल्स एनर्जी कैसे बनाते हैं, इसका भी बड़ा रोल है.
किस खाने के सेवन से जाग जाएगा कैंसर?
हमारे शरीर का हर सेल यानी कोशिका, चाहे वह सामान्य हो या कैंसर वाला सेल – एनर्जी के लिए ग्लूकोज़ यानी शुगर का इस्तेमाल करते हैं. यह शुगर हमें सिर्फ चीनी से नहीं मिलती. हालांकि चीनी सबसे तेज़ी से ग्लूकोज यानी शुगर बनाने के लिए जिम्मेदार होती है. सब्ज़ियों, फलों, गेंहूं चावल जैसे अनाज और डेयरी प्रोडक्ट से भी कार्बोहाइड्रेट यानी ग्लूकोज बनता है. कई रिसर्च में सामने आया है कि खाने में मौजूद शुगर सीधे तौर पर सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर ट्यूमर को ज़्यादा पोषण देती है.
ज़्यादा शुगर और कार्बोहाइड्रेट वाला खाना खाने से शरीर को ज़रूरत से अधिक कैलोरी मिलती है, जिससे वज़न बढ़ता है और शरीर में फैट जमा हो जाता है. चर्बी यानी मोटापे को – ब्रेस्ट कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, किडनी, पेट और प्रोस्टेट के कैंसर के लिए जिम्मेदार माना गया है. रिसर्च के आधार पर हमने एक लिस्ट बनाई है जो आपको ये बताने में हेल्प कर सकती है कि किस खाने से कैंसर जगेगा और किस खाने से कैंसर भाग जाएगा.
14 प्रतिशत तक बढ़ सकता कैंसर
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की रिसर्च के मुताबिक पोटैशियम सोर्बेट (potassium sorbate) कैंसर का खतरा 14% तक बढ़ सकता है. ये केमिकल केक-पेस्ट्री, ब्रेड, जैम जैली की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और उसे फंगस से बचाने के लिए इस्तेमाल होता है. सोडियम नाइट्राइट से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 30% से ज्यादा बढ़ सकता है. ये प्रोसेस्ड मीट, रेडी टू ईट नॉनवेज खाने में इस्तेमाल होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर रजिस्ट्री IARC प्रोसेस्ड मीट को कैंसरकारी कैटेगरी में रखती है. सफलाइट्स को जूस, बीयर और वाइन का कलर बनाए रखने और देर तक चलाने के लिए डाला जाता है इससे कैंसर का खतरा 12% तक बढ़ सकता है.
कैंसर से बचाने वाला खाना
कैंसर से बचाने में ब्रोकली, फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी सब्जियां अच्छी मानी गई हैं. इसके अलावा रंग बिरंगे फल जैसे बेरीज़, संतरा, और अनार एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो सेल्स के लिए अच्छे माने गए हैं. टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपीन, हल्दी की एंटी इंफ्लामेटरी ताकत प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक माना जाता है. इसी तरह लहसुन को इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर माना जाता है. साबुत अनाज और दालें पाचन और हार्मोन दोनों को अच्छी स्थिति में रखते हैं जिससे कैंसर का खतरा कम हो सकता है.
डॉक्टर से जानें डाइट
दिल्ली एनसीआर के जाने माने कैंसर सर्जन डॉ अंशुमन कुमार के मुताबिक अगर डायट में ग्लूकोज कम से कम कर दिया जाए, तो कैंसर सेल्स भूखे रहेंगे और खतरा कम हो जाएगा. कुछ हद तक “भूखा” किया जा सकता है. कुछ डॉ कैंसर के इलाज के साथ साथ मरीज को कीटोन आधारित डायट भी देते हैं जिससे इलाज में मदद मिलती है. इसमें चीनी के अलावा गुड़, शक्कर और खांड भी आते हैं.
खाने की शेल्फ लाइफ ज्यादा? सावधान !!
दिल्ली के बीएलकपूर मैक्स अस्पताल से जुड़े इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ विवेक पाल सिंह के मुताबिक रेडी टू ईट खाने में ऐसे प्रिजरवेटिव और केमिकल होते हैं जो कैंसर के सो रहे सेल को जगा सकते हैं.
कैंसर और मोटापा – इकॉनॉमिक सर्वे में वॉर्निंग
भारत सरकार का आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26, जिसे संसद में पेश किया गया, उसमें भी देश में मोटापे के बढ़ते बोझ को साफ़ तौर पर स्वीकार किया गया है. आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि जंक फूड और पैकेट बंद तैयार खाना खाने से भारत में मोटापा बढ़ रहा है. सर्वे के मुताबिक इस खाने में ज्यादा शुगर, फैट, नमक और प्रिजरवेटिव्स होते हैं, जिससे बच्चे और भारत के युवा मोटापे के शिकार होकर कई बीमारियों को दावत दे रहे हैं. खाने का सीधा संबंध मोटापे से है और मोटापे का कैंसर से तो अब आप रोज का खाना ये सोच कर चुनें है कि आपको लंबा सेहतमंद जीवन जीना है.
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