How to Recognize Autism: इस दुनिया में कई बच्चे ऐसे होते है, जिनकी अपनी दुनिया होती है. वह किसी से बोलना या बात करना बिल्कुल पसंद नहीं करते. यहां तक तो उनके पैरेंट्स तक ये बोलकर छोड़ देते है कि ये अपनी दुनिया में मस्त हैं. लेकिन यह एक प्रकार का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर होता है. कई पैरेंट्स को इस डिसऑर्डर के बारे में कम ही जानकारी होती है, जिसके चलते बच्चों का विकास बाधित हो सकता है. इसलिए इस डिसऑर्डर के बारे में आपको जरूर पता होना चाहिए. चलिए इस आर्टिकल में जानते है क्या होता है ऑटिज्म और क्या हैं इसके सामान्य लक्षण, कैसे आप बच्चों में इसकी पहचान कर सकते हैं?
कई घरों में ऐसे बच्चे होते हैं जो अपनी दुनिया में खोए-खोए से रहते हैं. वह भावनाएं या विचार तक शेयर नहीं करते. लेकिन पैरेंट्स को समझना चाहिए कि वह अपने ऐसे बच्चे को ढेर सारा प्यार दें और उनकी जरूरतों को समझकर उनकी मदद करें. उन्हें कम डांटे और उनका हर बार स्पोर्ट करें.
क्या होता है ऑटिज्म?
ऑटिज्म एक ऐसा लक्षण है जिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के साथ कम्यूनिकेट नहीं कर पाता, यानि उसे बातचीत, या बोलने में हिचकिचाहट महसूस होती है. ये एक तरह की न्यूरोडेवेलपमेंट कंडीशन है. कई बच्चों में यह समस्या बचपन से ही होती है. इस समस्या से पीड़ित बच्चों का व्यवहार बार-बार दोहराते हुए जैसा होता है. ऑटिज्म एक ऐसी न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर होता है. जो व्यक्ति के सोचने, व्यवहार करने और दूसरों से जुड़ने के तरीके को प्रभावित करता है.लेकिन अगर पैरेंट्स इस बात को समझ जाएं कि उनके बच्चे को प्यार की जरूरत है तो वह बच्चे को इस डिसऑर्डर से निकाल सकते हैं.
ये होते हैं ऑटिज्म के आम संकेत
- ऑटिज्म पहचानने के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं. जिन्हें पहचानना आसान होता है.
- लोगों से बातचीत करने में कठिनाई.
- आंखों से संपर्क बनाने में घबराहट या झिझक महसूस होना.
- बार-बार एक जैसा व्यवहार या आदतें दोहराना.
- तेज आवाज, रोशनी या भीड़ से परेशानी होना.
- भावनाओं को समझने या व्यक्त करने में दिक्कत होना.
- महिलाओं में ये संकेत हल्के या अलग तरीके से दिख सकते हैं, इसलिए पहचान करना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
- ऑटिज्म डिसऑर्डर से प्रभावित बच्चे अपने दोस्तों से बात करने में भी हिचकिचा सकते हैं.
- उन्हें शोर-गुल, तेज आवाज और भीड़ से बचना चाहते हैं. वहीं ऐसे बच्चों का कई बार ये बता पाना मुश्किल हो जाता है कि उनके भीतर क्या विचार चल रहे हैं, वे रोते हैं-चिल्लाते हैं और कई बार शांत भी बैठ जाते हैं.
समय पर पहचान क्यों जरूरी?
ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है, बल्कि एक अलग तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डिर होता है, जो बच्चों के सामाजिक विकास में बाधा पैदा करता है. लेकिन समय पर पहचान होने से व्यक्ति को सही सपोर्ट, थेरेपी और समझ मिल सकती है. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बेहतर तरीके से जीवन जी पाते हैं. अगर पैरेंट्स इन लक्षणों को नजरअंदाज कर दें तो बच्चे का सामाजिक विकास रूक सकता है. उनकी भावनात्मक और सामाजिक कठिनाइयां बढ़ सकती हैं. इसलिए परिवार और समाज दोनों को जागरूक होने की जरूरत है.
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