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डॉक्टर्स भी हो रहे AI पर डिपेंड? चैटजीपीटी की मदद से किया जा रहा इलाज!

ChatGPT vs Medical AI In Healthcare: भारत में 48% डॉक्टर AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. जानिए ChatGPT जैसे सामान्य AI और Medical AI में अंतर, फायदे, जोखिम और हेल्थकेयर पर असर.

ChatGPT vs Medical AI In Healthcare: देश तेजी से आगे बढ़ रहा है. फिर चाहे वो टेक्नोलॉजी के मामले में हो या फिर हेल्थ सेक्टर में. रोजाना नए-नए रिकॉर्ड्स बनाए जा रहे हैं. लेकिन टेक्नोलॉजी का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है. खासतौर पर AI का इस्तेमाल. मेडिकल रिसर्च, क्लिनिकल नोट्स तैयार करने के लिए और बीमारी के बारे में समझने के लिए और उस बीमारी को मरीजों को समझाने के लिए डॉक्टर्स AI का सहारा ले रहे हैं.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI का बढ़ता हुआ इस्तेमाल एक बड़ा रिस्क से जुड़ा होता है. क्योंकि कई डॉक्टर ऐसे सामान्य एआई चैटबॉट्स का उपयोग कर रहे हैं जिन्हें मेडिकल निर्णय लेने के लिए तैयार नहीं किया गया है. इसपर एक रिपोर्ट पब्लिश हुई है. क्या कहती है रिपोर्ट आइए जानते हैं.

इतने प्रतिशत डॉक्टर्स कर रहे AI का इस्तेमाल

दरअसल भारत में एक सर्वे किया गया था. साइंटफिक पब्लिकेशन संस्था एल्सेवियर की क्लिनिशियन ऑफ द फ्यूचर 2026 ने इस सर्वे रिपोर्ट को पब्लिश किया है. रिपोर्ट बताती है कि भारत में 48 प्रतिशत ऐसे डॉक्टर हैं जो अपने काम में AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. और 54 प्रतिशत ऐसे हैं जो ChatGpt, क्लॉड जैसे एआई टूल्स का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि 26 प्रतिशत डॉक्टर्स ऐसे हैं जो मेडिकल रिसर्च, क्लिनिकल डेटा पर आधारित ही AI प्लेटफॉर्मस का रेगुलर इस्तेमाल करते हैं. नर्सों में भी यही स्थिति देखने को मिली, जहां सामान्य एआई का उपयोग विशेष मेडिकल एआई की तुलना में अधिक पाया गया.

कैसे काम करता है AI

ये चिंता वाली बात इसलिए भी है क्योंकि जो नॉर्मल AI टूल्स होते हैं वो इंटरनेट पर उपलब्ध अलग-अलग सोर्सेस से जानकारी लेते हैं. इनमें वो जानकारियां भी मिक्स हो जाती हैं जिनका कोई साइंटफिक प्रूफ शामिल नहीं होता है. वहीं मेडिकल AI प्लेटफॉर्म प्रमाणित होते हैं वो मेडिकल किताबों, रिसर्च जर्नल और क्लिनिकल गाइडंस पर आधारित होते हैं. आसान भाषा में कहा जाए तो अगर कई साइंटिफिक प्रूफ किसी भी जानकारी का इन प्लेटफॉर्म पर नहीं मिलता तो वो सीधे-सीधे इसकी जानकारी दे देते हैं कि ये जानकारी उपलब्ध नहीं है. बजाए इसके कि अपना अनुमान तैयार करके जवाब तैयार कर दें.

अब रिस्क ये भी है कि जो डॉक्टर्स बीमारी की खोज नॉर्मल एआई पर खोज रहे हैं, और उसके आधार पर ट्रीटमेंट करते हैं तो छोटी सी गलती गंभीर परिणाम दे सकती है. क्योंकि वो जानकारी गलत भी हो सकती है फिर उसकी जवाबदेही एआई की नहीं बल्कि डॉक्टर की ही होगी.

इतने लोगों का डेटा किया शामिल

ये रिपोर्ट ऐसे ही नहीं पब्लिश की गई है. इसमें 118 देशों के 2,757 स्वास्थ्यकर्मियों के डेटा को शामिल किया गया है. इसमें भारत के डॉक्टर्स सबसे अधिक थे जिनकी संख्या 426 डॉक्टर्स और 112 पैरामेडिक्स शामिल थे. जानकारी है कि भारत में सबसे अधिक एआई का इस्तेमाल डॉक्टर्स द्वारा मेडिकल रिसर्च, नई जानकारी को हासिल करने, दवाओं की जानकारी खोजने के लिए, मरीजों को जवाब देने के लिए क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट और डॉक्यूमेंटेशन इन जैसे कामों को करने में किया जा रहा है.

यह भी पढ़ें: कैंसर और टिटनेस की दवाएं हुईं महंगी! NPPA ने क्यों बढ़ाई 50% तक कीमतें, जानिए वजह

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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